Daily Murli for Saturday 10 December 2016

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010/12/16 प्रातःमुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन 1``मीठे बच्चे - बाप आये हैं तुम्हें भक्ति का फल देने, भक्ति का फल है ज्ञान, ज्ञान से ही सद्गति होती है'' 2प्रश्न:- प्रश्न:- इस ब्राह्मण कुल में बड़ा किसको कहेंगे?

3उनकी निशानी सुनाओ? 4उत्तर:- ब्राह्मण कुल में बड़े से बड़े वह हैं जो अच्छी सर्विस करने वाले हैं। 5जिन्हें सदैव अपनी उन्नति का ही ओना (ख्याल) रहता है, जो पढ़ाई कर बहुत तीखे जाते हैं।

6ऐसे महावीर बच्चे अपना तन-मन-धन सब ईश्वरीय सेवा में ही सफल करते हैं। 7अपनी चलन पर बहुत ध्यान देते हैं। 8गीत:- तूने रात गवाई सोके…

9ओम् शान्ति। 10यह गीत अनकरेक्ट है।

11इस दुनिया में तुम जो भी सुनते हो सब है अनकरेक्ट अर्थात् झूठ। 12बाप बैठ समझाते हैं हे भारतवासी बच्चों, बच्चे जो सम्मुख हैं, उन्हों को ही कहेंगे। 13तुमको अभी मालूम पड़ा है वह है भक्ति मार्ग।

14वेद, शास्त्र, उपनिषद आदि कितने भक्ति मार्ग में जन्म-जन्मान्तर पढ़ते आते हैं। 15गंगा स्नान करते आये हैं। 16पूछो, यह कुम्भ का मेला कब से लगता आया है?

17कहेंगे यह तो अनादि है। 18कब से करते आये हैं? 19यह बता नहीं सकेंगे।

20उनको यह पता ही नहीं है कि भक्ति मार्ग कब से शुरू होता है। 21कल्प की आयु ही उल्टी कर दी है। 22कहते हैं शास्त्रों में लिखा हुआ है - ब्रह्मा का दिन और ब्रह्मा की रात।

23यह एक गीता में ही है। 24अब बाप समझाते हैं तुम ब्राह्मणों का दिन और रात है बेहद की। 25आधाकल्प दिन, आधाकल्प रात। 26जरूर इक्वल चाहिए ना।

0 10/12/16 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban

27आधाकल्प से भक्ति मार्ग शुरू होता है, यह किसको पता नहीं है। 28सोमनाथ का मन्दिर कब बना? 29पहले-पहले सोमनाथ का मन्दिर ही बना है - अव्यभिचारी भक्ति के लिए।

30तुम जानते हो आधाकल्प पूरा होता है तब ब्रह्मा की रात शुरू होती है। 31लाखों वर्ष की तो बात हो न सके। 32कहते हैं 13-14 सौ वर्ष हुए होंगे जबकि मुहम्मद गजनवी मन्दिर से खजाना लूटकर ले गया।

33अब तुम समझते हो इस पुरानी दुनिया से हमारा कोई तैलुक नहीं है, और-और धर्म वाले जो आते हैं वह सब बीच-बीच के बाइप्लाट हैं। 34अभी तो उन्हों की भी अन्त है। 35तमोप्रधान हैं।

36कितनी वैरायटी है।

37सूर्यवंशी फिर चन्द्रवंशी हुए, दो कला कम हुई फिर दूसरे वैरायटी आते गये हैं। 38इस समय है ही भक्ति मार्ग। 39ज्ञान से होता है दिन, सुख।

40भक्ति से होती है रात, दुःख। 41जब भक्ति पूरी हो तब ज्ञान मिले।

42ज्ञान देने वाला एक ही ज्ञान सागर बाप है। 43वह कब आते हैं, शिव जयन्ती कब मनाई जाती है, यह भी किसको पता नहीं है। 44अभी तुमको बाबा बैठ समझाते हैं कि भक्ति कितना समय चलती है फिर ज्ञान कब मिलता है।

45आधाकल्प से यह भक्ति मार्ग चलता ही आया है। 46सतयुग त्रेता में यह भक्ति मार्ग के चित्र आदि कुछ भी होते नहीं। 47भक्ति का अंश भी नहीं रहता।

48अब कलियुग का अन्त है तब भगवान को आना पड़ता है। 49बीच में किसको भगवान मिलता ही नहीं। 50कहते हैं पता नहीं किस रूप में भगवान मिलेगा?

51गीता का भगवान अगर कृष्ण है तो वह फिर कब आयेंगे - राजयोग सिखाने? 52मनुष्यों को कुछ भी पता नहीं है। 53भक्ति मार्ग बिल्कुल ही अलग है, ज्ञान बिल्कुल अलग है।

54गीता में है भगवानुवाच।

55गाते भी हैं हे पतित-पावन आओ। 56एक तरफ पुकारते रहते हैं; दूसरे तरफ फिर गंगा स्नान करने जाते हैं। 57निश्चय कुछ भी नहीं है कि पतित-पावन परमात्मा कौन है।

58तुम बच्चों को अब ज्ञान मिला है। 59तुम जानते हो अभी हम योगबल से सद्गति को पाते हैं। 60बाबा कहते हैं - मामेकम् याद करो तो विकर्म विनाश होंगे।

61मैं गैरन्टी करता हूँ - पतित-पावन बाप कहते हैं मैंने 5 हजार वर्ष पहले भी ऐसे कहा था कि हे बच्चे देह सहित देह के सब सम्बन्धों से बुद्धियोग तोड़ मुझे याद करो। 62यह गीता के महावाक्य हैं। 63परन्तु गीता मैंने कब सुनाई, यह किसको मालूम नहीं है।

64मैं बतलाता हूँ तो 5 हजार वर्ष पहले मैंने तुमको गीता सुनाई थी। 65इस समय सारा मनुष्य सृष्टि रूपी झाड़ जड़जड़ीभूत अवस्था को पाया हुआ है। 66तुमको भी अब बाप ने आकर ड्रामा के आदि-मध्य-अन्त का, सारे चक्र का राज़ समझाया है।

67बाप तो जरूर अन्त में ही आयेगा ना। 68तुम जानते हो नई दुनिया की स्थापना, पुरानी दुनिया का विनाश कैसे हो रहा है। 69अब तुम्हारी बुद्धि में है कि हम नई दुनिया स्वर्ग के मालिक बनेंगे।

70यह राजयोग है तो फिर हम प्रजा क्यों बनें। 71जबकि मम्मा बाबा राजा-रानी बनते हैं तो हम भी क्यों न राजा-रानी बनें। 72मम्मा तो जवान थी।

73यह बाबा तो बूढ़ा है फिर भी सबसे ऊंच पढ़ते रहते हैं ना। 74जवान तो सबसे तीखे होने चाहिए ना। 75बाप कहते हैं सिर्फ मुझे याद करो, जितना हो सके।

76बाकी सबको भूल जाओ। 77पुरानी दुनिया से वैराग्य। 78जैसे नया मकान बनता है तो बुद्धि उस तरफ चली जाती है ना।

79वह आंखों से देखा जाता है। 80यह बुद्धि से जानते हो। 81बहुतों को साक्षात्कार भी होता है।

82बरोबर वैकुण्ठ पैराडाइज, हेवन भी कहते हैं। 83जरूर कब था ना। 84अभी नहीं है।

85अभी फिर तुम राजाई प्राप्त करने के लिए राजयोग सीख रहे हो। 86पहली-पहली मुख्य बात ही यह है - शिव भगवानुवाच। 87कृष्ण तो भगवान हो न सके।

88वह तो पूरे 84 जन्म लेते हैं।

89भगवान तो जन्म-मरण में आ न सके, यह तो बड़ा साफ है। 90कृष्ण का वह रूप सतयुग में जो था वह तो फिर हो न सके। 91पुनर्जन्म लेते-लेते नाम रूप बदल जाता है।

92इस समय वह आत्मा भी तमोप्रधान है। 93कोई कहे कृष्ण द्वापर में थे परन्तु उनका वह रूप तो द्वापर में हो न सके। 94द्वापर में पतित से पावन बनाने आ नहीं सकता।

95कृष्ण तो सतयुग में ही रहते हैं। 96उनको पतित-पावन कहा नहीं जा सकता। 97गीता का भगवान कृष्ण नहीं, शिव है।

98वह आते भी जरूर हैं।

99शिव जयन्ती भी है, जरूर कोई रथ में प्रवेश करेंगे। 100खुद भी कहते हैं मैं साधारण तन में आता हूँ, जिनका नाम ब्रह्मा रखता हूँ। 101ब्रह्मा द्वारा विष्णुपुरी की स्थापना होती है।

102महाभारत लड़ाई भी सामने खड़ी है। 103यह नॉलेज अच्छी तरह बुद्धि में याद रखनी है। 104बुद्धि में यह याद रहे कि हम स्टूडेन्ट हैं।

105बाप पढ़ा रहे हैं। 106बाकी थोड़ा समय है। 107फिर बाबा हमको वापिस ले जायेंगे।

108जो अपने को ऊंच बनायेंगे, वही ऊंच्ा पद पायेंगे। 109परन्तु माया ऐसी है जो एकदम तवाई बना देती है। 110कई बच्चों को सर्विस का बहुत शौक है।

111छोटे-छोटे गांव में प्रोजेक्टर लेकर सर्विस कर रहे हैं। 112बहुत प्रजा बनाते हैं तो खुद जरूर राजा बनेंगे। 113गृहस्थ व्यवहार में रहते पवित्र भी रहना है।

114बहुत मेहनत करनी है। 115मातायें पवित्र बनती हैं तो पति बनने नहीं देते, तो झगड़ा भी चलता है। 116सन्यासी खुद पवित्र बनते हैं तो स्त्री को छोड़ देते हैं।

117फिर उनको कोई कुछ नहीं कहता कि अपनी रचना को छोड़ क्यों भागते हो। 118पवित्र बनने के लिए कोई मना नहीं कर सकता। 119हम किसको घरबार छोड़ने के लिए कहते नहीं हैं।

120सिर्फ कहते हैं पवित्र बनना चाहिए तो इसमें मना क्यों होनी चाहिए। 121परन्तु इसमें ताकत बहुत चाहिए बात करने की। 122भगवानुवाच - तुम पवित्र बनेंगे तो पवित्र दुनिया का मालिक बनेंगे।

123इसमें अवस्था बड़ी अच्छी मजबूत चाहिए, मोह आदि नहीं चाहिए, जो फिर याद पड़ती रहे। 124बुद्धियोग कुटुम्ब की तरफ जाता रहे, इसलिए फिर सर्विस लायक बन नहीं सकते। 125यहाँ तो बेहद का सन्यास चाहिए।

126यह तो कब्रिस्तान है। 127हमको याद करना है - बाप को।

128वह परिस्तान में ले चलने वाला है। 129इस ब्राह्मण कुल में जो अच्छी सर्विस करते हैं, वह बड़े ठहरे। 130उन्हों का बड़ा रिगार्ड रखना चाहिए, उन जैसी सर्विस करनी चाहिए तब ही ऊंच पद पायेंगे।

131अभी तो अपनी उन्नति का ओना रहना चाहिए। 132अपने को देखना चाहिए हम बाबा से वर्सा पाने के लायक बने हैं! 133बाप आया है पावन बनाकर साथ ले जाने।

134वह ठुकरायेंगे कैसे? 135बाबा सबसे पूछते हैं तो कहते हैं हम तो महारानी बनेंगे। 136तो ऐसी चलन भी हो ना।

137कई तो बहुत अच्छे बच्चे हैं। 138परन्तु जो पुरूषार्थ ही नहीं करेंगे तो वह क्या पद पायेंगे। 139हर बात में पुरूषार्थ से ही प्रालब्ध मिलती है।

140कोई बीमार पड़ जाते हैं फिर ठीक होने से ही दिन रात पुरूषार्थ में लग पढ़ाई में तीखे हो जाते हैं। 141यहाँ भी सर्विस में लग जाना है। 142सर्विस की युक्तियां तो बाबा बहुत बतलाते हैं।

143प्रदर्शनी पर समझाने का अभ्यास करो। 144बाबा तो कहते हैं अपनी उन्नति कर जीवन बनाओ। 145यह ओना रहना चाहिए कि मैंने कितनी सर्विस की, कितनों को आप समान बनाया।

146किसको आप समान नहीं बनाया तो ऊंच पद कैसे पायेंगे। 147फिर समझा जाता है प्रजा में चले जायेंगे अथवा दास दासियां बनेंगे। 148ढेर सर्विस पड़ी है।

149अभी तुम्हारा झाड़ छोटा है। 150मजबूत नहीं है। 151तूफान लगने से कच्चे गिर पड़ेंगे।

152माया बड़ा हैरान करती है।

153माया का काम ही है बाबा से बेमुख करना। 154चलते-चलते ग्रहचारी जब उतरती है तब कहते हैं अब तो हम बाबा से पूरा वर्सा लेंगे। 155तन-मन-धन से पूरी सेवा करेंगे।

156कहाँ-कहाँ माया गफ़लत कराती है फिर श्रीमत पर चलना छोड़ देते हैं। 157फिर कभी स्मृति आती है तो श्रीमत पर चलते हैं। 158इस समय दुनिया में है रावण सम्प्रदाय।

159यह देवतायें हैं राम सम्प्रदाय।

160रावण सम्प्रदाय वाले राम सम्प्रदाय के आगे माथा टेकते हैं। 161तुम जानते हो हम विश्व के मालिक थे। 16284 जन्म लेते-लेते अब क्या हाल हो गया है।

163अब बाप सबको पुरूषार्थ कराते हैं। 164नहीं तो बहुत पछताना पड़ेगा। 165हम भगवान की श्रीमत पर न चले, बाबा तो रोज़ समझाते हैं बच्चे गफ़लत मत करो।

166सर्विस करने वालों को देखते हो कैसे अच्छी सर्विस करते हैं। 167फलाना फर्स्ट ग्रेड, फलाने सेकण्ड ग्रेड में सर्विस करने वाले हैं। 168फ़र्क तो रहता है ना।

169बाप बच्चों को समझायेंगे तो सही ना। 170अज्ञान काल में बाप थप्पड़ भी मारते हैं। 171यहाँ यह बेहद का बाप तो प्यार से समझाते हैं, अपनी उन्नति करो।

172जैसा हो सके पुरूषार्थ करना चाहिए।

173बाप को खुशी होती है कि 5 हजार वर्ष के बाद फिर आकर बच्चों से मिला हूँ। 174राजयोग सिखला रहा हूँ। 175गीत है ना - तुम भी वही हम भी वही हैं।

176तो बाप कहते हैं तुम बच्चे भी वही हो। 177इन बातों को और कोई समझ न सके। 178अच्छा।

179मीठे मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निंग। 180रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते। 181धारणा के लिए मुख्य सार:-

1821) स्वयं को सर्विस के लायक बनाना है। 183जो अच्छी सर्विस करते हैं उनका पूरा-पूरा रिगार्ड रखना है। 184अपनी उन्नति का ख्याल करना है।

1852) तन-मन-धन से पूरी सेवा करनी है। 186श्रीमत पर चलना है, गफ़लत नहीं करनी है। 187वरदान:- विश्व परिवर्तन के श्रेष्ठ कार्य में अपनी अंगुली देने वाले महान सो निर्माण भव

188जैसे कोई स्थूल चीज़ बनाते हैं तो उसमें सब चीजें डालते हैं, कोई साधारण मीठा या नमक भी कम हो तो बढ़िया चीज़ भी खाने योग्य नहीं बन सकती। 189ऐसे ही विश्व परिवर्तन के इस श्रेष्ठ कार्य के लिए हर एक रत्न की आवश्यकता है। 190सबकी अंगुली चाहिए।

191सब अपनी-अपनी रीति से बहुत-बहुत आवश्यक, श्रेष्ठ महारथी हैं इसलिए अपने कार्य की श्रेष्ठता के मूल्य को जानो, सब महान आत्मायें हो। 192लेकिन जितने महान हो उतने निर्माण भी बनो। 193स्लोगन:- अपनी नेचर को इज़ी (सरल) बनाओ तो सब कार्य इज़ी हो जायेंगे।