Daily Murli for Saturday 31 December 2016
Saving in progress..
You can now read this murli without Internet.
You can read this murli without Internet.
in order to be able to read it without internet.
Warning : Sentence alignment between two languages is based on the number of characters. It is therefore not perfectly reliable.
You can correct the sentence alignment yourself on part or all of the murli.
031/12/16 प्रातःमुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन 1``मीठे बच्चे - श्रीमत पर तुम्हें सबकी रूहानी खातिरी करनी है, खुशी की खुराक खाना और खिलाना यही है सच्ची खातिरी करना'' 2प्रश्न:- ज्ञान में स्प्रीचुलटी का जौहर भरने की विधि क्या है, उससे कौन-कौन से फायदे होंगे?
3उत्तर:- जब किसी को भी ज्ञान सुनाते हो तो आत्मा समझकर आत्मा को ज्ञान दो, इससे स्प्रीचुअल्टी का जौहर भर जायेगा। 4इस नई आदत से किसी को भी ज्ञान सुनायेंगे तो उसे झट तीर लग जायेगा। 5शरीर का भान भी खत्म होता जायेगा।
6फिर माया के तूफान वा बुरे संकल्प भी नहीं आयेंगे। 7क्रिमिनल आई भी नहीं रहेगी। 8ओम् शान्ति।
9ज्ञान का तीसरा नेत्र देने वाला रुहानी बाप बैठ रुहानी बच्चों को समझाते हैं। 10ज्ञान का तीसरा नेत्र सिवाए बाप के और कोई दे नहीं सकता। 11अभी तुम बच्चों को ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है।
12अभी तुम जानते हो कि यह पुरानी दुनिया बदलने वाली है। 13बिचारे मनुष्य नहीं जानते कि कौन बदलाने वाला है और कैसे बदलाते हैं क्योंकि उन्हों को ज्ञान का तीसरा नेत्र ही नहीं है। 14तुम बच्चों को अभी ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है जिससे तुम सृष्टि के आदि मध्य अन्त को जान गये हो।
15यह है ज्ञान की सैक्रीन सैक्रीन का एक बूंद भी कितना मीठा होता है। 16ज्ञान का भी एक ही अक्षर है मनमनाभव यह अक्षर सभी से कितना मीठा है। 17अपने को आत्मा समझ और बाप को याद करो।
18बाप शान्तिधाम और सुखधाम का रास्ता बता रहे हैं। 19बाप आये हैं बच्चों को स्वर्ग का वर्सा देने। 20तो बच्चों को कितनी खुशी रहनी चाहिए।
21कहते भी हैं खुशी जैसी खुराक नहीं।
22जो सदैव खुशीमौज में रहते हैं उनके लिए वह जैसे खुराक होती है। 2321 जन्म मौज़ में रहने की यह जबरदस्त खुराक है। 24यह खुराक सदैव एक दो को खिलाते रहो।
25एक दो की जबरदस्त खातिरी यह करनी है। 26ऐसी खातिरी और कोई मनुष्य, मनुष्य की कर न सके। 27तुम बच्चे श्रीमत पर सभी की रुहानी खातिरी करते हो।
28सच्ची-सच्ची खुश खैराफ़त भी यह है किसको बाप का परिचय देना। 29मीठे बच्चे जानते हैं बेहद के बाप द्वारा हमको जीवनमुक्ति की खुराक मिलती है। 30सतयुग में भारत जीवनमुक्त था, पावन था।
31बाप बहुत बड़ी ऊंची खुराक देते हैं। 32तब तो गायन है अतीन्द्रिय सुख पूछना हो तो गोप-गोपियों से पूछो। 33यह ज्ञान और योग की कितनी फर्स्टक्लास वन्डरफुल खुराक है और यह खुराक एक ही रूहानी सर्जन के पास है और किसको इस खुराक का मालूम ही नहीं है।
34बाप कहते हैं मीठे बच्चों तुम्हारे लिए तिरी (हथेली) पर सौगात ले आया हूँ। 35मुक्ति, जीवनमुक्ति की यह सौगात मेरे पास ही रहती है। 36कल्प-कल्प मैं ही आकर तुमको देता हूँ।
37फिर रावण छीन लेता है।
38तो अभी तुम बच्चों को कितना खुशी का पारा चढ़ा रहना चाहिए। 39तुम जानते हो हमारा एक ही बाप, टीचर और सच्चा-सच्चा सतगुरू है जो हमको साथ ले जाते हैं। 40मोस्ट बिलवेड बाप से विश्व की बादशाही मिलती है।
41यह कम बात है क्या!
42तो सदैव हर्षित रहना चाहिए। 43गाडली स्टूडेन्ट लाईफ इज़ दी बेस्ट। 44यह अभी का ही गायन है ना।
45फिर नई दुनिया में भी तुम सदैव खुशियाँ मनाते रहेंगे। 46दुनिया नहीं जानती कि सच्ची-सच्ची खुशियाँ कब मनाई जायेंगी। 47मनुष्यों को तो सतयुग का ज्ञान ही नहीं है।
48तो यहाँ ही मनाते रहते हैं। 49परन्तु इस पुरानी तमोप्रधान दुनिया में खुशी कहाँ से आई। 50यहाँ तो त्राहि-त्राहि करते रहते हैं। 51कितना दुःख की दुनिया है।
0 31/12/16 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban
52बाप तुम बच्चों को कितना सहज रास्ता बताते हैं। 53गृहस्थ व्यवहार में रहते कमल फूल समान रहो। 54धन्धा-धोरी आदि करते भी मुझे याद करते रहो।
55जैसे आशिक और माशुक होते हैं। 56वह तो एक दो को याद करते रहते हैं।
57वह उनका आशुक, वह उनका माशुक ओता है। 58यहाँ यह बात नहीं है, यहाँ तो तुम सभी एक माशुक के जन्म-जन्मान्तर से आशुक हो रहते हो। 59बाप कभी तुम्हारा आशिक नहीं बनता।
60तुम उस माशुक से मिलने के लिए याद करते आये हो। 61जब दुःख जास्ती होता है तो जास्ती सुमिरण करते हैं। 62गायन भी है दुःख में सुमिरण सब करें, सुख में करे न कोय।
63इस समय बाप भी सर्वशक्तिवान है, तो दिन-प्रतिदिन माया भी सर्वशक्तिवान तमोप्रधान होती जाती है इसलिए अब बाप कहते हैं मीठे बच्चे देही-अभिमानी बनो। 64अपने को आत्मा समझ मुझ बाप को याद करो और साथ-साथ दैवीगुण भी धारण करो तो तुम ऐसे लक्ष्मी-नारायण बन जायेंगे। 65इस पढ़ाई में मुख्य बात है ही याद की।
66ऊंच ते ऊंच बाप को बहुत प्यार, स्नेह से याद करना चाहिए। 67वह ऊंच ते ऊंच बाप ही नई दुनिया स्थापन करने वाला है। 68बाप कहते हैं मैं आया हूँ तुम बच्चों को विश्व का मालिक बनाने, इसलिए अब मुझे याद करो तो तुम्हारे अनेक जन्मों के पाप कट जायें।
69पतित-पावन बाप कहते हैं तुम बहुत पतित बन गये हो इसलिए अब तुम मुझे याद करो तो तुम पावन बन और पावन दुनिया का मालिक बन जायेंगे। 70पतित-पावन बाप को ही बुलाते हैं ना। 71अब बाप आये हैं, तो जरूर पावन बनना पड़े।
72बाप दुःखहर्ता, सुखकर्ता है।
73बरोबरसतयुग में पावन दुनिया थी तो सभी सुखी थे। 74अब बाप फिर से कहते हैं बच्चे शान्तिधाम और सुखधाम को याद करते रहो। 75अभी है संगमयुग खिवैया तुमको इस पार से उस पार ले जाते हैं।
76नईया कोई एक नहीं, सारी दुनिया जैसे एक बड़ा जहाज है, उनको पार ले जाते हैं। 77तुम मीठे बच्चों को कितनी खुशियाँ होनी चाहिए। 78तुम्हारे लिए तो सदैव खुशी ही खुशी है।
79बेहद का बाप हमको पढ़ा रहे हैं। 80वाह! 81यह तो कब न सुना, न पढ़ा।
82भगवानुवाच मैं तुम रुहानी बच्चों को राजयोग सिखा रहा हूँ, तो पूरी रीति सीखना चाहिए। 83धारणा करनी चाहिए। 84पूरी रीति पढ़ना चाहिए।
85पढ़ाई में नम्बरवार तो सदैव होते ही हैं। 86अपने को देखना चाहिए मैं उत्तम हूँ, मध्यम हूँवा कनिष्ट हूँ? 87बाप कहते हैं अपने को देखो मैं ऊंच पद पाने के लायक हूँ?
88रुहानी सर्विस करता हूँ?
89क्योंकि बाप कहते हैं बच्चे सर्विसएबुल बनो, फालो करो। 90मैं आया ही हूँ सर्विस के लिए। 91रोज़ सर्विस करता हूँ इसलिए ही तो यह रथ लिया है।
92इनका रथ बीमार पड़ जाता है तो भी मैं इनमें बैठ मुरली लिखता हूँ। 93मुख से तो बोल नहीं सकते तो मैं लिख देता हूँ, ताकि बच्चों के लिए मुरली मिस न हो तो मैं भी सर्विस पर हूँना यह है रुहानी सर्विस तुम भी बाप की सर्विस में लग जाओ। 94आन गॉड फादरली सर्विस।
95बाप ही तुमको सारे विश्व का मालिक बनाने आये हैं, जो अच्छा पुरुषार्थ करते हैं उनको महावीर कहा जाता है। 96देखा जाता है कौन महावीर हैं जो बाबा के डायरेक्शन पर चलते हैं। 97बाप का फरमान है अपने को आत्मा समझ भाई-भाई देखो।
98इस शरीर को भूल जाओ। 99बाबा भी शरीर को नहीं देखते हैं। 100बाप कहते हैं मैं आत्माओं को देखता हूँ।
101बाकी यह तो ज्ञान है कि आत्मा शरीर बिगर बोल नहीं सकती। 102मैं भी इस शरीर में आया हूँ, लोन लिया हुआ है। 103शरीर के साथ ही आत्मा पढ़ सकती है।
104बाबा की बैठक यहाँ है। 105यह है अकाल तख्त। 106आत्मा अकालमूर्त है।
107आत्मा कब छोटी बड़ी नहीं होती है, शरीर छोटा बड़ा होता है। 108जो भी आत्मायें हैं उन सभी का तख्त यह भृकुटी का बीच है। 109शरीर तो सभी के भिन्न-भिन्न होते हैं।
110किसका अकाल तख्त पुरुष का है, किसका अकाल तख्त स्त्री का है। 111किसका अकाल तख्त बच्चे का है। 112बाप बैठ बच्चों को रुहानी ड्रिल सिखलाते हैं।
113जब कोई से बात करो तो पहले अपने को आत्मा समझो। 114हम आत्मा फलाने भाई से बात करते हैं। 115बाप का पैगाम देते हैं कि शिवबाबा को याद करो।
116याद से ही जंक उतरनी है। 117सोने में जब अलाय पड़ती है तो सोने की वैल्यु ही कम हो जाती है। 118तुम आत्माओं में भी जंक पड़ने से तुम वैल्युलेस हो गये हो।
119अब फिर पावन बनना है। 120तुम आत्माओं को अब ज्ञान का तीसरा नेत्र मिला है। 121उस नेत्र से अपने भाईयों को देखो।
122भाई-भाई को देखने से कर्मेन्द्रियाँ कब चंचल नहीं होंगी। 123राज-भाग लेना है, विश्व का मालिक बनना है तो यह मेहनत करो। 124भाई-भाई समझ सभी को ज्ञान दो।
125तो फिर यह टेव पक्की हो जायेगी। 126सच्चे-सच्चे ब्रदर्स तुम सभी हो। 127बाप भी ऊपर से आये हैं, तुम भी आये हो।
128बाप बच्चों सहित सर्विस कर रहे हैं। 129सर्विस करने की बाप हिम्मत देते हैं। 130हिम्मते मर्दा… तो यह प्रैक्टिस करनी है - मैं आत्मा भाई को पढ़ाता हूँ।
131आत्मा पढ़ती है ना।
132इसको स्प्रीचुअल नॉलेज कहा जाता है, जो रुहानी बाप से ही मिलती है। 133संगम पर ही बाप आकर यह नॉलेज देते हैं कि अपने को आत्मा समझो। 134तुम नंगे आये थे फिर यहाँ शरीर धारण कर तुमने 84 जन्म पार्ट बजाया है।
135अब फिर वापिस चलना है इसलिए अपने को आत्मा समझ भाई-भाई की दृष्टि से देखना है। 136यह मेहनत करनी है। 137तुम बच्चों को अपनी मेहनत करनी है, दूसरे में हमारा क्या जाता।
138चैरिटी बिगेन्स एट होम अर्थात् पहले खुद को आत्मा समझ फिर भाईयों को समझाओ तो अच्छी रीति तीर लगेगा। 139यह जौहर भरना है। 140मेहनत करेंगे तब ही ऊंच पद पायेंगे।
141बाप आये ही हैं फल देने लिए तो मेहनत करनी पड़े। 142कुछ सहन भी करना पड़ता है। 143तुम्हें कोई उल्टी-सुल्टी बात बोले तो तुम चुप रहो।
144तुम चुप रहेंगे तो फिर दूसरा क्या करेगा। 145ताली दो हाथ से बजती है। 146एक ने मुख की ताली बजाई, दूसरा चुप कर दे तो वह आपेही चुप हो जायेंगे।
147ताली से ताली बजने से आवाज हो जाता है। 148बच्चों को एक दो का कल्याण करना है। 149बाप समझाते हैं बच्चे सदैव खुशी में रहने चाहते हो तो मनमनाभव अपने को आत्मा समझ बाप को याद करो।
150भाईयों (आत्माओं) तरफ देखो। 151भाईयों को भी यह नॉलेज दो।
152यह टेव (आदत) पड़ जाने से फिर कभी क्रिमिनल आई धोखा नहीं देगी। 153ज्ञान के तीसरे नेत्र से तीसरे नेत्र को देखो। 154बाबा भी तुम्हारी आत्मा को ही देखते हैं।
155कोशिश यह करनी है सदैव आत्मा को ही देखें। 156शरीर को देखें ही नहीं। 157योग कराते हो तो भी अपने को आत्मा समझ भाईयों को देखते रहेंगे तो सर्विस अच्छी होगी।
158बाबा ने कहा है भाईयों को समझाओ भाई सभी बाप से वर्सा लेते हैं। 159यह रुहानी नॉलेज एक ही बार तुम ब्राह्मण बच्चों को मिलती है। 160तुम ब्राह्मण ही फिर देवता बनने वाले हो।
161इस संगमयुग को थोड़ेही छोड़ेंगे, नहीं तो पार कैसे जायेंगे, कूदेंगे थोड़ेही। 162यह वन्डरफुल संगमयुग है। 163तो बच्चों को रुहानी यात्रा पर रहने की टेव (आदत) डालनी है।
164तुम्हारे ही फायदे की बात है। 165बाप की शिक्षा भाईयों को देनी है।
166बाप कहते हैं मैं तुम आत्माओं को ज्ञान दे रहा हूँ। 167आत्मा को ही देखता हूँ। 168मनुष्य-मनुष्य से बात करेगा तो उनके मुँह को देखेगा ना।
169तुम आत्मा से बात करते हो तो आत्मा को ही देखना है। 170भल शरीर द्वारा ज्ञान देते हो परन्तु इसमें शरीर का भान तोड़ना होता है। 171तुम्हारी आत्मा समझती है परमात्मा बाप हमको ज्ञान दे रहे हैं।
172बाप भी कहते हैं आत्माओं को देखता हूँ, आत्मायें भी कहती हैं हम परमात्मा बाप को देख रहे हैं। 173उनसे नॉलेज ले रहे हैं, इसको कहा जाता है स्प्रीचुअल ज्ञान की लेन-देन - आत्मा की आत्मा के साथ। 174आत्मा में ही ज्ञान है।
175आत्मा को ही ज्ञान देना है। 176यह जैसे जौहर है।
177तुम्हारे ज्ञान में यह जौहर भर जायेगा तो किसको भी समझाने से झट तीर लग जायेगा। 178बाप कहते हैं प्रैक्टिस करके देखो तीर लगता है या नहीं। 179यह नई टेव (आदत) डालनी है तो फिर शरीर का भान निकल जायेगा।
180माया के तूफान कम आयेंगे। 181बुरे संकल्प नहीं आयेंगे। 182क्रिमिनल आई भी नहीं रहेगी।
183हम आत्मा ने 84 का चक्र लगाया। 184अब नाटक पूरा होता है। 185अब बाबा की याद में रहना है।
186याद से ही तमोप्रधान से सतोप्रधान बन, सतोप्रधान दुनिया के मालिक बन जायेंगे। 187कितना सहज है। 188बाप जानते हैं बच्चों को यह शिक्षा देना भी मेरा पार्ट है।
189कोई नई बात नहीं। 190हर 5000 वर्ष बाद हमको आना होता है।
191मैं बंधायमान हूँ, बच्चों को बैठ समझाता हूँ - मीठे बच्चे रूहानी याद की यात्रा में रहो तो अन्त मते सो गति हो जायेगी। 192यह अन्तकाल है ना। 193मामेकम् याद करो तो तुम्हारी सद्गति हो जायेगी।
194याद की यात्रा से पाया मजबूत हो जायेगा। 195यह देही-अभिमानी बनने की शिक्षा एक ही बार तुम बच्चों को मिलती है। 196कितना वन्डरफुल ज्ञान है।
197बाबा वन्डरफुल है तो बाबा का ज्ञान भी वन्डरफुल है। 198कब कोई बता न सके। 199अभी वापस चलना है इसलिए बाप कहते हैं मीठे बच्चों यह प्रैक्टिस करो।
200अपने को आत्मा समझ आत्मा को ज्ञान दो।
201तीसरे नेत्र से भाई-भाई को देखना है। 202यही बड़ी मेहनत है। 203अच्छा - मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निग रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
204धारणा के लिए मुख्य सार:- 2051) ज्ञान के तीसरे नेत्र से तीसरे नेत्र को देखने का अभ्यास करना है। 206कोशिश करनी है सदैव आत्मा को ही देखें, शरीर को नहीं तो क्रिमिनल ख्याल नहीं आयेंगे।
207बुरे संकल्प खत्म हो जायेंगे। 2082) ताली दो हाथ से बजती है इसलिए जब तुम्हें कोई उल्टी-सुल्टी बात बोले तो तुम चुप रहो। 209अगर तुम चुप रहेंगे तो दूसरा आपेही चुप हो जायेगा।
210वरदान:- सत्यता की शक्ति द्वारा प्रकृति वा विश्व को सतोप्रधान बनाने वाले मास्टर विधि-विधाता भव 211जब आप बच्चे सत्यता की शक्ति को धारण कर मास्टर विधि विधाता बनते हो तो प्रकृति सतोप्रधान बन जाती है, युग सतयुग बन जाता है। 212सर्व आत्मायें सद्गति की तकदीर बना लेती है।
213आपकी सत्यता पारस के समान है। 214जैसे पारस लोहे को पारस बना देता है, ऐसे सत्यता की शक्ति आत्मा को, प्रकृति को, समय को, सर्व सामग्री को, सर्व सम्बन्ध को, संस्कारों को, आहार-व्यवहार को सतोप्रधान बना देती है। 215स्लोगन:- :- योगी आत्मायें वह हैं जिन्हें प्रकृति की हलचल भी आकर्षित न करे।