Sakar murli for Saturday 18 January 1969

18/01/1969 (साकार मुरली) आज रुहानी बाप से विश्लेषण है समझा, बच्चे सब जानते है बेहद के बाप से बेहद विश्व की बादशाही मिलनी है। यह बच्चो को कभी भूलना नही चाहिए। परंतू भूल जाते है, माया है ना बच्चे, घडी घडी भूला देती है। अगर माया ना भूलाये तो खुशी हो जाये बहुत। … बँच भी लगा रहता है, बाप समझाते भी है बच्चों को, बच्चा यह जो बेंच घडी घडी देखते रहो । घर में चित्रो को भी देखते रहो। ऑफिस में बेंच को भी देखते रहो, घुमते फिरते बेंच को देखते रहो । तो मालूम पडे की बाबा व्दारा यह हम बन रहे है, बाबा की याद से । दैवीगुण भी धारण करने है। क्योंकी यही समय है। फिर ये नॉलेज कभी बच्चों को मिलती नही है। ना, सिर्फ यही समय है जो बाप कहते है बच्चों को मीठे मीठे बच्चो मीठे मीठे मीठे मीठे रात दिन मीठे मीठे कहते रहते है। बच्चे नही कह सकते है बाबा को मीठे मीठे, ना, कहना तो दोनो को चाहिए क्योकी दोनो मीठे है, बेहद का बाप । परंतु कई बच्चे है देही अभिमानी जो बेहद बाप को भी मीठा मीठा कहते है। क्यो कोई हर्जा भी नही है इसमें भी। बाप से नही परंतू शायद कभी बाप से कहा या फिर दादा से कहा बात एक ही हो जाती है। वा कभी ब्राह्मणों के उपर नाराज परंतू बच्चो को यह जरूर समझना चाहिए, बाप शिक्षा देते है जरूर बेहद के बच्चों को । सभी बच्चों को देखो कहा है बच्चे? गाव गाव में है। सभी उनको लिखते रहते है। ये देखो तुम्हारी रिपोर्ट आती है। किसको गुस्सा करते हो, उसको जरूर बाबा बेहद का बाबा देहअभिमान कहेंगे। बाबा का तो फर्ज है सब बच्चों को कहना बच्चे देहीअभिमानी भव। तुम कहते हो ना, अपने लिए भी कहते है मै देह अभिमानी बनता रहता हूँ। ऐसे नही है कि यह दादा देहीअभिमानी बन गया है, नही, क्योंकी बाप ने समझाया है बरोबर इनका साक्षात्कार भी करते रहो सुक्ष्मवतन में। फिर भी खुद कहते है कि बनने में कर्मातीत अवस्था बनने में अभी समय चाहिए। मै बन जाऊ तो मेरे पिछाडीवाले भी राय लेते रहेंगे। बच्चो को यह भी कहते है सब जो भी बच्चा नीचे उपर जरूर होते है। उसमें भी बाप हमेशा समझाते है की माया जो है ना समर्थ बनते है जो समर्थ होते है उनसे लडाई करती है। जैसे लिखा है ना बच्ची महावीर हनुमान उनसे भी आयी कोशिश करने की हिलावे पर उस समय में थी कर्मातीत अवस्था । उस समय जैसे की परिक्षा लेते थे, है तो उसमें शास्त्रों में गायन पिछाडी की परिक्षा । परंतू उसके पहले जरूर माया की हार-जीत तो होती रहेंगी ना। साथ ही यह जो दादा है नी उनकी भी है। कितना समय याद करते रहेंगे बहुत याद करेंगे पर याद ही नही रहेंगी। कितना भी कोशिश करे नही आयेंगी। पर कभी कभी बहुत बडा अच्छी याद आती है। क्योंकी है ही यहाँ लडाई। लडाई में तो सब होगा ना बच्चे! होती है स्मृती । जितनी जो स्मृती में डांस करते है निरंतर कोशिश करते है स्मृती को याद करने तो वह अच्छा पद पा सकते है। बाप आये है पढ़ाने तो बच्चों को तो पढातेही रहते है। दिल में समझते है न बच्चे जो श्रीमत पर चलते रहेंगे। जो श्रीमत पर बाबा अपने लिए थोडी कहते बाबा श्रीमत के लिए कहते है जो श्रीमत पर चलते रहेंगे वह श्रेष्ठ जरूर बनेंगे। इसलिए कभी भी कोईपर बिगडने की इजाजत कोईसे भी बिगडने की बात नही है। बिगडना माना क्रोध करना। क्रोध तो किसी पर करना नही है कोई भी हालत में । क्योंकी बाबा ने वाणी कल-परसो ही चलायी है। तो लॉ अपने हाथ में नही लेना है। कोई क्रोध भी करते हो कोई भूल भी करते हो तो बाबा को रिपार्ट कर सकते। खुद नही कहना किसीको भी। क्योंकी लॉ अपने हाथ में लेना हुआ। जैसे गव्हर्नमेंट भी जो होती है ना बच्चे कभी भी कोई ने ठुसा मारा तो उसको ठुसा नही मारते, कहेंगे लॉ अपने हाथ में नही लो, रिपोर्ट करो उनके उपर केस करेंगे। तो यहाँ भी ऐसे है बच्चो को सामने कभी भी कुछ कहना नही चाहिए। बाबा को भले ही कहे सावधानी देने वाला भी बाबा है ना बच्चे । बाबा भी युक्ती से लेंगा बहुत मिठापणे से बाबा कहेंगे देह अभिमानी बनेंगे तो अपनाही पद कम कर देंगे। इसलिए तुम घाटा क्यो डालते हो जितना हो सके फायदा डालते रहो। बाप को याद करते रहो बडे प्यार से । बेहद प्यार से बाबा ऐसे नही कहते बेहद प्यार से याद करो, ना! कहते है बेहद बाप को बेहद प्यार से। क्यो? वह तुम्हे विश्व की बादशाही देते है। सिर्फ दैवी गुण धारण करने से दैवी गुण का अर्थ यह है किसी की निंदा नही करना । देवता निंदा करते है क्या किसी की? कभी भी किसी की निंदा नहीं करनी चाहिए? बाबा सब जानते है महामाया है ना अच्छी नामीग्रामी भी है ना वह भी निंदा करने बिगर रहते नही। तुम क्यो निंदा करते हो बाबा को रिपोर्ट करो तो बाबा उनको सावधानी देंगे। क्योंकी टाईम वेस्ट होता है ना बच्चों का, किसकी निंदा करना उसके बजाय बाप को याद करना, फायदा भी होगा बच्चोंको । बाप कहते ना किसी को याद करना, ना किसीसे बात करना बडा अच्छा है। तुम कम नही हो बच्चे, तुम दिल में समझते हो, नई दुनिया की बादशाही स्थापन कर रहा हू मै। तो कितना फक्र चाहिए! किसीसे कोई लड़ाई, झगड़ा, मारामारी तो नही है। याद का प्यार… व्दारा चक्र को तो याद ही कर लेते हो। सब बच्चे होंगे उनको चक्र सहज ही याद पड़ता होंगा, 84 का चक्र तो बिल्कुल ही सहज है। बाप भी कहते बच्चों को तुमको चतुर्भूज बनना है। देवताए नही बनते है। तुम ब्राह्मण बनते हो। तुम जानते हो सृष्टि के आदि- मध्य-अन्त के ड्युरेशन का मालुम है। वह तो गपोडा मारते है ड्युरेशन का लाखो वर्ष क्योकी तुम जानते हो अच्छी तरह से और फिर क्या करना है बच्चों को, बच्चों को बहुत प्यार से औरों को परिचय देना है। उनको बोलना है बच्चे बेहद का बाप अभी विश्व का मालिक बना रहे है। वह राजयोग सिखला रहे है और सामने विनाश भी खड़ा है। जब राजयोग सिखलाता था तब ही महाभारी महाभारत लड़ाई लगी थी। राजयोग सिखला रहा है बच्चो को है भी संगमयुग। संगमयुग पर लडाई जरूर लगने की है। नई दुनिया स्थापन होती है पुरानी दुनिया खत्म होती है। दो चार बाते है सिर्फ पर माया भूला देती है। बाप कहते है पुरुषार्थ करते करते करते सिमर सिमर सिमर सुख पाओ। बाप कहते कलह क्लेश मिटे सब तन के । बाबा कहते सब दुःख कलह क्लेश मिटेंगे तन के आधा कल्प । गाया भी जाता है दुःखधाम और सुखधाम। ये भी गायन है बाप सुखधाम स्थापन करते है रावण दुःखधाम स्थापन करते है। ये भी तुम बच्चे जानते हो दुनिया में कोई एक भी नही जानते है। अभी सुखधाम स्थापन हो रहा है। सभी तुम बच्चे नम्बरवार पुरुषार्थ अनुसार नही तो घडी घड़ी भूल जाते है, घडी घड़ी भूल जाते है। जितना बाप का लव होता है बाप का तो शुरुवात से लव है ना बच्चे । मालूम है मै जानता हूँ अपने बच्चो को जो काम चिता पर चढ काले बन गये है। मै आता हूँ गोरा बनाने के लिए। तुमको मालुम है ना नॉलेजफुल है, बच्चे आहिस्ते आहिस्ते नॉलेज लेते रहते है। माया भूलाती रहती है। वह खुशी आदि ठहरने नही देती है। बच्चों को तो खुशी में रहना चाहिए दिन प्रतिदिन। खुशी का पारा चढना चाहिए बाबा ने समझा दिया है। सतयुग में तुम्हारा पारा चढा हुआ था अभी कलियुगी में तमोप्रधान से गिरता रहा अभि खुशी का पारा चढेंगा बाबा की याद की यात्रा से। जितना जो याद करेंगा खुशी का पारा चढता जायेंगा। फौरन नही चढेंगा किसीका भी। ना! बच्चे आहिस्ते आहिस्ते धीरे धीरे हारा जीता, हार जीत, हार जीत करते करते नंबरवार पुरुषार्थ अनुसार कल्प पहिले माफिक सब कोई अपना पद ले लेंगे। बाकी टाईम वही लगता है जो कल्प कल्प लगता है, पास वही होंगे जो कल्प हुए होंगे। अवस्था देखते रहते बापदादा साक्षी होकरके। समझानी देते रहते है। जो बाहर में रहते है वह इतना रिफ्रेश नही रहते । सेंटर से गया बाहर में सोडा वॉटर सब खत्म कर देंगे उतना रिफ्रेश नही हो सकते । जो यहाँ आते है रिफ्रेश होने कुछ समय। सारा समय बाप कहे बाबा जैसे देखते है ना परिवार जैसे फलाने परिवार सहित सबको याद प्यार दे रहे है। इंजिनिअर को लिखेंगे परिवार सहित सर्वको याद प्यार दे रहे है, डॉक्टर को लिखेंगे परिवार सहित सर्वको याद प्यार दे रहे है। परिवार तो बापका सहारा है देखो। वह हद के है बाप के बेहद के है। बाप और दादा का बहुत लव है क्योंकी कल्प कल्प लवली सर्विस करते है। बहुत प्यार से याद करते है। बाबा को तरस पड़ता है किसीकी चलन अच्छी नही होती है तो तरस पड़ता है बिचारा कम पद पाएंगा। श्रीमत पर नही चलते तो बिचारा कम पद पायेंगा और बाबा क्या कर सकता है? माताए भी आती है कहती है जा रही है बाबा के पास, सारा दिन यहाँ रहती हो रात यहाँ रहती हो जब वहाँ सेंटर पर जाती है तो दिनरात थोड़ी रहती है? क्योंकी संग मिल जाता है अनेक प्रकार का। बाहर अंदर जाना-यहाँ वहाँ जाना वहाँ यहाँ रहने में फरक पड़ता रहता है। सब भी नही रह सकते। सब रहे तो पता नही क्या बनाना पडे? बाप जानते है स्थिती को पाते रहते है परमत भी करते रहते है। बाप ने समझाया मीठे मीठे बच्चो बडा भारी तीर्थ है यह आबू बहुत भारी तीर्थ है, बाप खुद कहते है यहा आकर के इस शरीर व्दारा सारी सृष्टि मनुष्य तो क्या पर ये पाँच तत्व भी इन सबको पवित्र बनाता हूँ, देखो कितनी सेवा होती है। बच्चे जानते है बरोबर एक ही बाप है जो आकर के सर्व की सद्गती करते है। एक ही दफा करते कया? नंबर ऑफ टाईमस | समझना चाहिएना बच्चों को मिलने आते बहुत बार फिर भी भूल जाते है। माया बडी जबरदस्त है। आधाकल्प उनका राज है आधाकल्प हमारा राज है। उनमें भी ताकत है नी। उन्हों की ताकत बाप समझाते है हाफ अन्ड हाफ। हराते है बाबा फिर खडा करते है, बच्चा कहता है गिर गया अच्छा बच्चे फिर नही गिरना, पंधरा दिन, दो महिना फिर कहते बाबा गिर गया झट लिख देते है 5 बरस, 3 बरस, 0 बरस फिर कभी गिरते है जरुर गिरते है तो फिर उपर नही चढते है। देखो कितनी चोट लगती है। असल में चोट लगती । समझो यहाँ बैठे है घर में बाबा के पास रोज रोज सुनते है तो कोई सबसे जास्ती पढ़ जाते है? ना। सारा पढ़ाई के उपर। भले यहाँ रहते है ऐसे भी है जो जरा भी नही पढ़ते। ऐसे भी है जो बहुत पढते है। पढाई चाहिए योग और पढ़ाई, योग और पढ़ाई, पढाई तो योग तो है ही है उसमें जब किसी के साथ बेठेंगे तो उनके साथ बुध्दि का योग जरूर जाएंगा। फलाना मुझे पढाढ रहे है। अब तुम जानते हो आत्माओं को बाप पढ़ा रहे है। अच्छा बच्चो को रिफ्रेश किया था नी। फिर उनको ख्याल उठता है बाबा की तबीयत कैसी है? नही बाबा की तबियत तो ठिक रहती है, कभी कभी बहुत अच्छा, कुछ ना कुछ रिफ्रेश जरूर करते रहते है। बाकी यहाँ जितना रिफ्रेश हो। हाँ वैसे बच्चे बहुत अच्छे है। जैसे यह बच्चा मोहन है बहुत अच्छा । बच्चा है इसने बाबा का कभी डिसरिगार्ड निंदा नही करेंगे। सबमें अपने अपने गुण भी होते है ना। कहा जाता है ना निंदा हमारी जो करे मित्र हमारा सो होय, भगवानुवाच है ना मेरी ग्लानी बहुत करते है में आकर मित्र बनता हूँ। गाया भी जाता है ना निंदा हमारी जो करे बाप बैठ समझाते है कैसे निंदा करते थे मेरी । बाप कहते यह तो मेरे बच्चे है, मेरी प्रित है इनके साथ। निंदा किसकी न करना अच्छी होती है। चेंज का तो है ही यह समय। इस समय सब खबरदारी रहनी चाहिए। अच्छा मीठे मीठे रुहानी बच्चो प्रती रुहानी बाप और दादा का दिल और जान, सिक और प्रेम से याद और प्यार और गुडनाईट। मीठे मीठे रूहानी बच्चो प्रती रुहानी बाप की नमस्ते। देखो कितनी नम्रता, प्यार और निरहंकार है बाबा का। अच्छा बाबा छुट्टी लेते है।