Avyakt murli du lundi 9 février 1976
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09-02-76 ओम शान्ति अव्यक्त बापदादामधुबन
बिन्दु-रूप स्थिति से प्राप्ति
सेवाधारी ग्रुप के साथ मुलाकात करते समय जो प्रश्नोत्तर के रूप में वार्तालाप हुआ, वह यहाँ प्रस्तुत है:-
प्रश्न:- सर्व प्वॉइन्ट्स का सार एक शब्द में सुनाओ?
उत्तर:-प्वाइन्ट्स का सार - प्वाइन्ट रूप अर्थात् बिन्दु रूप हो जाना।
प्रश्न ः - बिन्दु रूप स्थिति होने से कौन-सी डबल प्राप्ति होती है?
उत्तर:-बिन्दु रूप अर्थात् पॉवरफुल स्टेज, जिसमें व्यर्थ संकल्प नहीं चलते हैं और बिन्दु अर्थात् बीती सो बीती। इससे कर्म भी श्रेष्ठ होते हैं और व्यर्थ संकल्प न होने के कारण पुरूषार्थ की गति भी तीव्र होगी। इसलिए बीती सो बीती को सोच-समझ कर करना है। व्यर्थ देखना,सुनना व बोलना सब बन्द। समर्थ आंखें खुली हों अर्थात् साक्षीपन की स्टेज पर रहो।
प्रश्न:- कमल-पुष्प समान न्यारा बनने की युक्ति क्या है?
उत्तर:-कोई की भी कमी देखकर के उनके वातावरण के प्रभाव में न आये, तो इसके लिए उस आत्मा के प्रति रहम की दृष्टि-वृत्ति हो और सामना करने की नहीं,अर्थात् यह आत्मा भूल के परवश है, इसका दोष नहीं है - इस संकल्प से उस वातावरण का व बात का प्रभाव आप आत्मा पर नहीं होगा। इसी को कहते हैं कमलपुष् प समान न्यारा।
प्रश्न:- सफलतामूर्त्त बनने के लिए क्या करना है?
उत्तर:-बदला नहीं लेना, बल्कि स्वयं को बदलना है। महावीर बनना है, मल्ल- युद्ध नहीं करना है। मल्ल-युद्ध करना माना अगर कोई ने कोई बात कही तो उसके प्रति संकल्प चलने लगें - यह क्या किया, यह क्यों कहा उसको कहा जाता है मन्सा से व वाचा से मल्ल-युद्ध करना। नमना अर्थात् झुकना। तो जब नमेंगे तब ही नमन योग्य होंगे। ऐसे नहीं समझो कि हम तो सदैव झुकते ही रहते हैं लेकिन हमारा कोई मान नहीं। जो झुकते नहीं व झूठ बोलते हैं उनका ही मान है - नहीं। यह अल्पकाल का है। लेकिन अब दूरन्देश बुद्धि रखो। यहाँ जितनों के आगे झुकेंगे अर्थात् नम्रता के गुण को धारण करेंगे तो सारा कल्प ही सर्व आत्मायें मेरे आगे नमन करेंगी। सतयुग त्रेता में राजा के रिगार्ड से काँध से नहीं लेकिन मन से झुकेंगे और द्वापर, कलियुग में काँध झुकायेंगे।