Sakar murli du vendredi 17 janvier 1969
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17/01/71969 रात्री क्लास बहुत करके सभी मुंझे हुए है। संन्यासी, उदासी, विद्वान, आचार्य। मुरली किसकी है कौन बजाते है श्रीक्रिष्ण का ही नाम ले लिया हुआ है। उनको यह मालूम नहीं है कि सभी मनुष्यमात्र है की सभी पार्टधारी है और एक्टर्स भी अविनाशी एक्टर्स है। मनुष्य मात्र है जब भी आते है शुरू से आते है, आते तो सभी एक्ट करने आते है, पार्ट बजाने आते है। आदि से अंत तक आते ही रहते हैं और पार्ट बजातेही रहते है। मुख्य एक्टर कौन है? पार्टधारी कौन है? बाकी यह सभी पार्टधारी है 500 करोड़। यह किसको मालूम नहीं है न ख्याल में है। न बुध्दि में है, न किसीको मालुम है की यह खेल है और ड्रामा है। यह सब एक्टर है 500 करोड मनुष्य कहेगे। हम कहेगे सभी एक्टर्स है और अविनाशी एक्टर है करके। यह पार्ट कभी भी विनाश नहीं हो सकता है। यह तो किसीको भी मालुम नहीं है। बाप बच्चों को रोज नयी नयी बात समझाते है । तो समझते हैं अगर एक क्लास की भी मुरली मिस की तो जैसे स्कुल में अबसेन्ट पड गयी। अबसेन्ट तो नही पड़नी चाहिए, ना। स्कूल में जो अच्छे स्टुडंटस होते है। वह मिस नहीं करते है क्योंकी अबसेंट पड जाती है और यह तो है बेहद के बाप का स्कुल। उसमें तो जरा भी अबसेंट नहीं होनी चाहिए। यह बहुत बड़े ते बड़ा स्कूल है और किसीको भी मालूम नही।। दुनिया में एक भी नहीं जिसको यह मालूम है कि गीता की पाठशाला कहते है यह बेहद का बड़ा स्कुल है। पाच पांच हजार बरस बाद बाप आकर करके पढ़ाते है। हर पांच हजार । यह तो तुम बच्चों को मालूम है नी सो भी नंबरवार पुरुषार्थनुसार । शास्त्रों में नहीं लिखा हुआ है कुछ भी। पढ़ाई का पताही नहीं कि बाप आकर के कब पढ़ाते है कब कब आकर पढ़ाते है। पढ़ाई भी रिपीट करते है ना बच्चे। इस पढ़ाई से स्वर्ग की स्थापना होती है। वह रिपीट करते है। स्वर्ग की स्थापना होती है यह भी बिचारे नही जानते । वास्तव में कुछ भी नही जानते । यह पढ़ाई है इसमें बहुत बहुत बहुत अथाह कमाई है। ऐसे भी है पढ़ाई से मनुष्य बहुत कमाते हैं। परंतू फिर एक जन्म होता है फिर पढ़ना पढ़े दुसरे जन्म के लिए। यहाँ तो बच्चो को जनमजन्मांतर के लिए पढ़ाई का फल मिल जाता है। इस पढाई को एक तो तुम पढाई एक सेकंड में भी पढ़ते हो। सिर्फ यह याद करते हो सृष्टि के चक्र को वा झाड को। अभी झाड को जानने में कितना टाईम लगता है। तुम कोई भी बीज हाथ में लो तो सारा झाड का झाड होगा। तो यह भी एक बार झाड का ज्ञान सुना तो पक्का पड़ जाना चाहिए। पक्का नही पड़ता । इसमें खुबी है एक । कौनसी खुबी है जो बुष्दि से भूल जाती है घडी घडी। अब भूलने के कारनही अपने से कोई न कोई भूल होती है फिर। बाबा को भूलते है तो कुछ न कुछ जरुर भूल हो ही पड़ती है। यह अवस्था अभी नहीं आती है अवस्था आती है पिछाडी में। क्योंकी सारा इस विनाश का इस पढ़ाई से ताल्लुक है। जब तुम पढ़कर के पूरी करो ज्ञान पूरा हो ड्रामा प्लेंन अनुसार तब विनाश हो। सारा फिर ज्ञान के उपर मदार है। क्योंकी ज्ञान भी तो है नी शुरू से लेकर अंत तक पढ़ाई होती है तो जब पूरा होता है दर्जा तो पढाई पूरी हुई। फिर होता है उपर का दर्जा। पढ़ाई पूरी हुई कि दुसरा दर्जा । यहा एक ही दर्जा है दुसरा कोई दर्जा है ही नही। एक ही दर्जा जो इतना बडा टाईम लेता है पढाई में। क्योंकी पढ़ते पढ़ते जब तुम बाबा को याद करते करते जब तुम्हारे में से नंबरवार माला बन जाती है तब तक दुसरों का भी इम्तहान पूरा हो जाता है। तब यह लडाई लगती है। तुम्हारा भी मदार लडाई के उपर और लडाई का भी मदार तुम्हारे उपर । बाप का ज्ञान पूरा हुआ तब लडाई शुरु हो जाएंगी। तुम्हारी पढाई पूरी हुई जरुर लडाई लग जाएंगी। बाकी यह ड्रामा की बात है। बाप बैठ कर सब बाते समझाते है नही तो दुनिया में एक भी मनुष्य नहीं जिनको कुछ न कुछ पता है। सभी कुछ कहते है तो बाबा जैसे कहते है कुछ है उसमें भी कुछ राज नही। कहते है सच है भगवानुवाच है। भगवान किसको कहते है उनको पता नहीं। सच कहते है भगवानूवाच है मै तूम बच्चों को राजयोग सिखलाता हूँ। अभी राजयोग ऐसे तो ठिक पर राजयोग सिखलाता हूँ। कैसे सिखलाते है किसीको मालूम नही। बहुत दिखलाया है लडाई झगडा और कुछ कुछ | कुछ भी पता ही नही है कि गीता किसने सुनाई? ज्ञान किसने सुनाया? राजयोग कैसे सुनाया? रिंचक भी नही है। नई बात है न बच्ची एकदम । शास्त्रो में है सब पर सब है झुठी बाते। मेहनत लगती है उसमें भी बच्चो को। उसमें भी सबसे जास्ती मेहनत लगती है बाप की याद में रहने की। ऐसे भी नही की सतयुग कोई आत्मा समझकर और दुसरे को भी आत्मा समझते है। नही । ऐसा समझो की आत्म अभिमानी, देह अभिमानी नही है। वहा भी देह अभिमान होते है। अब देही अभिमानी होते है क्योकी देहीअभिमानी बगैर यह जो कारोबार चल नही सके। इससमय सिर्फ देही अभिमानी बनते हो क्योंकी बाप को याद करना है। अपने को आत्मा समझ बाप को याद करना है। तुमको स्मृती आयी है और कोई कहनेवाला भी नहीं तुमको की आत्मा समझो और बाप को याद करो। कभी भी कोई नही कहेंगा क्योंकी अभी बाप कहते है फिर कोई भी नही कहेंगा तुमको । न देवताए सुनते यह अक्षर न शुद्र सुनते । सिर्फ तुम ब्राह्मण सुनते हो। क्यो ये समझाते है क्योंकी आत्मा को परमात्मा की याद से पाप कटने है। कोई कोई समझेंगा बात तो ठीक शरीर कुछ ना करेंगा ना। शिवबाबा को याद करने बिगर पाप नही कटेंगे। क्रिष्ण को याद करने से किसके पाप नही कटते है। ना। मूल बात यह की विष्न कहा आते है सिर्फ याद में। माया लिंक तोड डालती है। जिसको लिंक भी कहते है योग भी कहते है। याद की यात्रा भी कहते उसमें विघ्न डालती है। क्यों विष्न डालती? टाईम चाहिए ना जब तक तुम पक्के बन जाओ हुशार बन जाओ नंबरवार पुरुषार्थ अनुसार कल्प पहले माफिक। देखो बाप समझाकर कहते है। कल्प पहले माफिक 5000 साल पहले माफिक यह पुरुषार्थ कर नंबरवार पुरुषार्थ अनुसार वही नंबर भविष्य नई दुनिया में पद मिलेंगा, कैसे उपर से यहा आने के लिए। बाप समझाते है भारत के लिए है। बाप ने यह भी समझाया है कि यह जो नाटक है यह है ही भारत के उपर। भारत की हार जीत उत्थान पतन। बाकी कोई दुसरे के लिए नही है। दुसरे बीच में आते है। … न समझे तो हर्जा नही पर लोग तो समझने तो चाहता है नी। उसके लिए ज्ञान वा चक्र देखो तुम लोग आते हो तो समझना चाहता है। क्राईस्ट आएंगे क्राईस्ट यह प्रदर्शनी नही देखते है वह कैसे देखेंग यह झाड भी नही देखते है। … वह पढाई नही देखते है। कुछ भी नही देखते है। तुम कहेंगे बच्चे तुम्हारा बाप नही देखता तो वह कैसे देखेंगा। तुम्हारा बाप ही नही देखते तो बच्चे क्या देखेंगे। बच्चो के लिए ही है क्योंकी बाप खुद स्थापन करते है। बाप बच्चों को समझाते है। क्योंकी तुम बेहद की सर्विस करते हो। बेहद का पार्ट बजाते हो, आत्मा। कौन पार्ट बजाती है? आत्मा। इतनी पिचकडी आत्मा पार्ट बजाती है। यह पिचकडी याद नहीं आती तो भलेही समझो पर शिवबाबा को याद करेंगे ना। यह जो ज्ञान दिया जाता है पर याद तो शिवबाबा को याद करेंगे ना। भला छोटा याद नहीं आता पर भकक्ती में तो याद आता है बडा आता है ना पर कुछ हर्जा नही। याद शिव को करना है। तो पाप कटेंगे। ज्ञान तो मिलता सचमुच मिलता है की वह बिंदू है छोटी है। परंतू भल बडा तो चलो बडा ही सही परंतू शिव कोही याद करते है। दुसरे सब चित्र भी बडे है उन सबको भूल जाओ। पर भलेही शिव को याद करो। न वह ध्यान में आए बिंदी है कैसे याद करु फलाना पर वह तो सहज है ना । उसमे मुंझने की दरकार नही है। बडा भी याद किया अभी और किसीको याद नही किया तो भी तुम्हारे पाप कट जायेंगे। …बाप को तरस भी तो पड़ता है कोई हर्जा नही । वह कहते आऊंगा उसी दिन कहते है ना घडी घड़ी छोटा बडा यह कोई ने तुमको सुनाया नहीं बताया नही है। नही भी याद आए तो हर्जा नही। तुम यह तो जानते हो ना उनको शरीरी तो नही है ना ये तो ख्याल में रखेंगा ना। उसको भी याद किया तो भी तुम्हारा पाप कट जायेंगा। और फिर स्वदर्शन चक्रधारी तो सभी बने हो । चक्र कैसा फिरता है जैसे … बाबा में आया है शिव समझो। जहाँ भी हो जानते हो। झाड समझा है ना। देवता बनते हो फिर क्षत्रिय बनते हो वैश्य बनते हो फिर शुद्र बनते हो फिर अभी ब्राह्मण बनते हो। इसमें भी कोई तकलिफ तो नही है ना। … पर याद करो। दुसरा बुध्दि मे आना नही चाहिए। वह पिछाडी जो भी में सेवा के सिवाए पिछाडी में कोई बुध्दि में आना नही चाहिए। बडा उंच नं. ले जायेंगे। पवित्रता तो धारण करनाही है। अच्छा। … शुभ कार्य जो है फट से। शुभ कार्य को देरी नही करनी चाहिए। आज और कल में मौत सामने खडा है। जानते है सब ऐसे होता भी है। कोई ऐसा भी होता है बीमार हुआ, हार्ट अटेंक हुआ खलास हो गया। कितना घाटा पड़ गया। कौड़ी कौडी का हिसाब मिलता है। कितना नुकसान जाता है। है शुभ कार्य फट से कर देना चाहिए। सभी जल्दी जल्दी करेंगे बच्चे कल्प कल्प करतेही आए है, अभी करेंगे जरुर। शुभ कार्य फट से करेंगे देरी करेंगे कोई मर जाएंगे। बाबा किसको कहते है शरीर छोड़ने को मरा नही कहते है। बाबा का बन कर फिर माया का बनते उसको बाबा कहते मरा। माया अपने तरफ खिंच लेती है और किसीका शरीर छुट जाता है। गरीब नवाज बाबा कहकर बुलाते है कुछ तो है। मनुष्य कहते तो है भगवानुवाच मै गरीब निवाज हूँ। पुकारते भी है मनुष्य गरीब निवाज। उनको भी तो समझने का है ना बच्चे । तुम समझते हो सब गरीब है। तुम समझते हो गरीब है। साहुकार जो है वह नहीं समझते हम गरीब है। वह तो समझते है हम करोडपती है। ड्रामा देखते है तो खुशी होती है। लडाई होती है बंदुके चलती है उनको कुछ दुःख होता है कया नही। खेल होता है यह भी साक्षी होकर खेल देखने का है। यह मत समझो बाबा खेल में किसीकी निंदा करेंगे ना। हा खेल अनादी बना हुआ है। निंदा नही करते। बाबा समझाते है बच्चो को की खेल सारा ऐसा चलता है। गधे जैसे मनुष्य हो जाते है। यह तो बताते है खेल कैसा बना हुआ है यह बताते है। जैसे खेल बना हुआ है। बाकी किसकी ग्लानी नहीं करते है। समझाते है। बेहद का बाप किसीकी भी ग्लानी नही कर सकते है। क्यों की जानते है ना बरोबर आसूरी दुनिया भी चलती है देवताओ की दुनिया चलती है फिर बाप बैठ करके समझाते है सब बात। अच्छा टोली दो। रुहानी बाप और दादा दिल व जान और सिक और प्रेम से पुरुषार्थ अनुसार याद प्यार और गुडनाईट। रुहानी बच्चो की रुहानी बाप प्रती याद प्यार ।