Avyakt murli for Monday 23 March 1970

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0> 23-03-70ओम शान्ति […/…/…/jpg/Ray2.jpg]अव्यक्त बापदादा मधुबन 1सच्ची होली मनाना अर्थात् बीती को बीती करना – २३-०३-१९७० 2बापदादा क्या देखते हैं और आप सब क्या देखते हो ? 3देख तो आप भी रहे हो और बापदादा भी देख रहे हैं | लेकिन आप क्या देखते हो और बापदादा क्या देखते हैं ?

0> > Avyakt BapDada 23rd March 1970

4फर्क है वा एक ही है | रूहानी बच्चों को देखते आज विशेष क्या बात देख रहे हैं ?

1How did you celebrate Holi today? 2To celebrate Holi means that as from today you make firm the lesson of “past is past”.

5हर चलन की विशेषता होती है ना | तो आज मुलाक़ात में विशेष कौन सी बात देख रहे हैं ?

3Let whatever is past be absolutely finished, as though it is a matter of some past birth.

6आज तो विशेष बात देख रहे हैं उसको देख हर्षित हो रहे हैं | बापदादा हरे क के पुरुषार्थ की स्पीड और स्थिति की स्पिरिट देख रहे हैं | जितनी जितनी स्पिरिट होगी उतनी स्पीड भी होगी | तो यह देखकर हर्षा रहे हैं | स्पीड तेज़ होने से सर्विस की सफलता तेज़ होगी | आज होली कैसे मनायी ?

4The main thing that slows your effort is thinking about things of your own past or that of others, and keeping them in your heart. 5It should not be in your heart, nor should you be thinking about it, let alone speaking about it. 6Today you have called BapDada to celebrate Holi: to make this colour fast means to celebrate Holi. 7On Holi they throw colours.

7(सूक्ष्मवतन में मनायी) वतन में भी कैसे मनायी ?

8On the first day they burn something, and on the second day they celebrate.

8सिर्फ वतन में मनायी या यहाँ भी मनाई ?

9They have to celebrate after burning, and after celebrating they eat sweets.

9सिर्फ अव्यक्त रूप से ही मनाई ?

10You have been told what colour you have to be coloured with.

10होली मनाना अर्थात् सदा के लिए आज के दिन बीती सो बीती का पाठ पक्का करना, यही होली मनाना है | आप लोग भी अर्थ सुनाते हो ना | होली अर्थात् जो बात हो गयी, बीत गयी उसको बिलकुल ख़त्म कर देना | बीती को बीती कर आगे बढ़ना यह है होली मनाना अर्थात् होली के अर्थ को जीवन में लाना | हर दिवस पर पुरुषार्थ को बदल देने लिए कोई न कोई बात ऐसे महसूस हो जैसे बहुत पुरानी कोई जन्म की बात है | ऐसी बीती हुयी महसूस हो | जब ऐसी स्थिति हो जाती है तब पुरुषार्थ की स्पीड तेज़ होती है | पुरुषार्थ की स्पीड को ढीला करने वाली मुख्य बात यह होती है – बीती हुई बात को चिंतन में लाना | अपनी बीती हुयी बातें या दूसरों की बीती हुयी बातों को चिंतन में लाना और चित्त में भी रखना | एक होता है चित्त में रखना दूसरा होता है चिंतन में लाना | जो चित्त में भी न हो | चिंतन में भी न आये | तीसरी होता है वर्णन करना | तो आज के दिन बापदादा होली मनाने के लिए आये हैं | होली मनाने लिए बुलाया है ना | तो इस रंग को पक्का लगाना यही होली मनाना है | होली के दिन एक तो रंग लगाते हैं और दूसरा क्या करते हैं ? 11एक दिन पहले जलाते हैं दुसरे दिन मनाते हैं | जलाने के बाद मनाना है और मनाने में मिठाई खाते हैं | यहाँ आप कौन सी मिठाई खायेंगे ? 12रंग तो बताया कौन सा लगाना है | अब मिठाई क्यों खाते हैं ? 13जब यह रंग लग जाता है तो फिर मधुरता का गुण स्वतः ही आ जाता है | अपने वा दुसरे की बीती को न देखने से सरल चित्त हो जाते हैं और जो सरलचित्त बनता है उसका प्रत्यक्ष रूप में गुण क्या देखने में आता है ?

11What sweet do you eat?

14मधुरता | उनके नयनों से मधुरता मुख से मधुरता, और चलन से मधुरता प्रत्यक्ष रूप में देखने में आती है | तो इस रंग से मधुरता आती है इसलिए मिठाई का नियम है | होली पर और क्या करते हैं ?

12When the colour is applied, the virtue of sweetness is automatically imbibed. 13By not seeing the past of your own self or of others, you become very simple and easy-natured. 14Those who are easy-natured have sweetness in their eyes, on their face, and in their activity in a visible form.

15(मंगल-मिलन) मंगल मिलन का अर्थ क्या हुआ ? 16यहाँ मंगल मिलन कैसे मनाएंगे ?

15So sweetness comes through this colour, and therefore there is the system of eating sweets.

17मधुरता आने के बाद मंगल मिलन क्या होता है ?

16At Holi they also celebrate an auspicious meeting.

18संस्कारों का मिलन होता है | भिन्न-भिन्न संस्कारों के कारण ही एक दो से दूर होते हैं, तो जब यह रंग लग जाता है, मधुरता आ जाती है तो फिर कौन सा मिलन होता है ?

17This bhatti has been created by BapDada for harmonising sanskars. 18BapDada has a meeting with the children, but the greatest meeting amongst yourselves is the meeting of the sanskars. 19When your sanskars are harmonised, there will be cries of victory.

19आप लोग सम्मेलन करके आये हो ना | बापदादा ने यह जो भट्ठी बनाई है वह फिर संस्कार मिलन की बनाई है | जब संस्कार मिलन हो, यह सम्मेलनहो तब उस सम्मेलन की प्रत्यक्षता देखने में आएगी | आप लोगों ने सम्मेलन किया और बापदादा संस्कारों का मिलन कर रहे हैं | तो इस मिलन का यादगार यह मंगल मिलन है | बापदादा का बच्चों से मिलन तो है ही लेकिन आपस में सभी से बड़े ते बड़ा मिलाना है संस्कारों का मिलना | जब यह संस्कार मिलन हो जायेगा तब जयजयकार होगी | देवियों का गायन है ना कि वह सभी को सिद्धि प्राप्त कराती हैं | कोई को भी रिद्धि सिद्धि प्राप्त करनी होती है तो कीन्हों से प्राप्त करते हैं ? 20रिद्धि सिद्धि प्राप्त कराने वाली कौन हैं ? 21देवियाँ | जब पुरुषार्थ की विधि सम्पूर्ण हो जाती है तब यह सिद्धि भी प्राप्त होती है | कभी भी सिद्धि को प्राप्त करने के लिए बापदादा के पाद नहीं आयेंगे | देवियों के पास जायेंगे | 22देवियाँ स्वयं सिद्धि प्राप्त की हुई हैं | तब दूसरों को रिद्धि सिद्धि दे सकती हैं | तुम्हारे पुरुषार्थ की सिद्धि तब होगी जब संस्कारों का मिलन होगा | सबसे जास्ती भक्तों की क्यू बड़ी कहाँ लगती हैं ?

20The praise of the goddesses is that they enable everyone to attain success.

23(देवियों के पास) जैसे हनुमान के मंदिर में व् देवियों के मंदिर में ज्यादा भीड़ लगती है | इससे क्या सिद्ध होता है ?

21People don’t go to BapDada to attain success, they go to the goddesses. 22The goddesses have attained supernatural powers, and so they can give others the power to attain success.

24साकार रूप में भी क्यू कौन देखेगा ?

23You will attain success when there is the harmony of sanskars.

25प्रत्यक्षता के बाद जो क्यू लगेगी वह कौन देखेंगे ?

24The longest queue of bhagats is in front of the goddesses in the temples.

26बच्चे ही देखेंगे | बापदादा गुप्त है प्रत्यक्ष रूप में बच्चे ही देखेंगे | तो उसका यादगार प्रत्यक्ष रूप में बड़ी ते बड़ी क्यू भक्तों की, बच्चों के यादगार रूप पर ही लगती है | लेकिन यह क्यू लगेगी कब ? 27जब संस्कार न मिलने का एक शब्द निकल जायेगा तब वह क्यू भी लगेगी | इस भट्ठी में और पढाई नहीं करनी है लेकिन अंतिम सिद्धि का स्वरुप बनकर दिखाना है | यह संगठन संस्कारों को मिलाने के लिए है | कोई भी चीज़ को जब मिलाया जाता है तो क्या करना होता है ? 28संस्कारों को मिलाने के लिए दिलों का मिलन करना पड़ेगा | दिल के मिलन से संस्कार भी मिलेंगे तो संस्कारों को मिलाने के लिए भुलाना, मिटाना और समाना यह तीनों ही बातें करनी पड़ेंगी | कुछ मिटाना पड़ेगा, कुछ भुलाना पड़ेगा, कुछ समाना पाएगा – तब यह संस्कार मिल ही जायेंगे | यह है अंतिम सिद्धि का स्वरुप बनना | अब अंतिम स्थिति को समीप लाना है | एक दो की बातों को स्वीकार करना और सत्कार देना | अगर स्वीकार करना और सत्कार देना यह दोनों ही बातें आ जाती हैं तो फिर सम्पूर्णता और सफलता दोनों ही समीप आ जाती हैं | सिर्फ इन दो बातों को ध्यान देना, दोनों ही बातों को समीप लाना है | एक दो को सत्कार देना ही भविष्य का अधिकार लेना है | यह कीन्हों की भट्ठी है, मालूम हैं ?

25What does this signify?

29इस भट्ठी का नाम क्या है ?

26Who will the queue see in the corporeal form?

30आप लोगों को तिलक के बजाय और चीज़ देते हैं | औरों को तिलक लगाया | इस भट्ठी को लगानी है चिन्दी | तिलक छोटा होता है, चिन्दी बड़ी होती है | बडेपन की निशानी चिन्दी है | तिलक तो छोटे भी लगाते हैं लेकिन चिन्दी बड़े लगाते हैं | जब से जिम्मेवारी अपने ऊपर रखने की हिम्मत रखते हैं तब से चिन्दी को धारण करते हैं | तो तिलक अच्छा वा चिन्दी अच्छी ? 31आप सभी सर्व के शुभ चिन्तक हो, सर्विसेबुल अर्थात् शुभ चिन्तक | तो इस शुभ चिन्तक की निशानी चिन्दी है और नाम है शुभ चिन्तक ग्रुप | 32आपके शुभ चिन्तक बन्ने से सभी की चिंताएं मिटती हैं | आप सभी की चिंताओं को मिटानेवाली शुभ चिन्तक हो | और स्लोगन कौन सा है ?

27Who will the queue that forms after the revelation see?

33जैसे वो लोग कहते हैं आत्मा सो परमात्मा वैसे इस ग्रुप का स्लोगन कौन सा है ?

28Only the children will be seen. 29BapDada is incognito. 30Only the children will be seen in a revealed form.

34बालक सो मालिक | यह स्लोगन विशेष इस ग्रुप का है | अब नाम भी मिला, स्लोगन भी मिला, काम भी मिला और इस भट्ठी में क्या करना है ?

31So the memorial of that in a visible form is the longest queue of the bhagats queuing up in front of the memorial of the children. 32But when will this queue be formed?

35भाषण भी यह करना है कि संस्कार मिलन कैसे हो | इस भट्ठी में कमाल यही करनी है जो एक अनेकों को संस्कारों में आप समान बना सके | सम्पूर्ण संस्कार, अपने संस्कार नहीं | एक अनेकों को सम्पूर्ण संस्कार वाली बना ले तो क्या होगा ? 36समाप्ति | समाप्ति करनेवाला यह ग्रुप है | और फिर स्थापना करने वाला भी यह ग्रुप है | समाप्ति क्या करनी है ? 37पालना क्या करनी है और स्थापना क्या करनी है ? 38यह तीनों ही टॉपिक्स इस भट्ठी में स्पष्ट करनी है | इसलिए त्रिमूर्ति चिन्दी लगा रहे हैं | स्थापना, पलना, समाप्ति अर्थात् विनाश |

33When the sanskars harmonise.

39क्या-क्या करना है इसको स्पष्ट और सरल रीति जो कि प्रैक्टिकल में आ सके, वर्णन तक नहीं | प्रैक्टिकल में आ सके औरों को भी करा सकें – ऐसी बातें स्पष्ट करनी हैं | लेकिन बिंदी रूप बनकर के ही यह तीनों कर्त्तव्य सफल कर सकेंगे | इसलिए आपके इस कर्त्तव्य के यादगार में चिन्दी दे रहे हैं स्मृति भी, स्थिति भी और कर्त्तव्य भी तीनों ही इस यादगार में समाये हुए हैं | विशेष ग्रुप की विशेष बातें होती हैं | आप सभी होली मनाने आये हैं वा इस ग्रुप की सेरेमनी (celebration) देखने ? 40यह भी सौभाग्य समझो की ऐसी श्रेष्ठ आत्माओं के समीप बनने का ड्रामा में पार्ट है | सेरेमनी (celebration) देखना अर्थात् अपने को ऐसा श्रेष्ठ बनाना | यह है सेरेमनी (celebration) ऐसा अपने को बनाओ जो इस ग्रुप के जैसे साकार में समीप आये हो ना, वैसे ही सम्बन्ध में भी समीप हो | देखने वाले भी कम नहीं | देखने वाली आत्माएं भी श्रेष्ठ और समीप है | बापदादा के दिल पसंद रत्न हैं | पहले कौन आएगा ? 41बापदादा तो सभी को एक ही स्पीड में देख रहे हैं | इसलिए वन टू नहीं कह सकते | इस समय सभी वन की याद में नंबर वन ही है | 42आप लोग भी जब स्पिरिट में और स्पीड में इस ग्रुप के समीप आयेंगे तब फिर आप की भी सेरेमनी (फिर हरेक बड़ी बहनों को बापदादा चिन्दी लगाये रूहरिहान करते गए)

34Only then will the queue be formed.

43(दीदी) – बालक मालिक है इसलिए समान बिठाते हैं तख़्त पर (सन्दली पर) | व्यक्त रूप में तो यह सेरेमनी कर रहे हैं लेकिन अव्यक्त रूप में यह सेरेमनी होती है ? 44बालक को मालिक बनाया अब से तख़्तनशीन बनाते हैं | साकार में थी दिल तख़्त नशीन, अब हैं सर्विस की तख़्त नशीन और भविष्य में होंगी राज्य तख़्त नशीन | संगम पर तख़्त नशीन अभी बनते हैं | ड्रामा में जो पार्ट नूँधा हुआ है वह कितना रहस्ययुक्त है | इसको दिन प्रति दिन स्पष्ट समझते जायेंगे | स्नेह से भी कर्त्तव्य कहाँ बंधन में बांधता है | जैसे स्नेह का बंधन है वैसे कर्त्तव्य का भी बंधन है | तो यह है कर्त्तव्य का बंधन | कर्त्तव्य के बंधन में अव्यक्त रूप में हैं | स्नेह के बंधन में साकार रूप में थे | 45(कुमारका दादी) – स्वप्न में भी कब यह सोचा था कि अव्यक्त रूप में तख़्त नशीन बनायेंगे | तख़्त नशीन कौन बनता है ? 46जो सदैव नशे में है और निशाना बिलकुल एक्यूरेट रहता है | नशा और निशाना, योग और ज्ञान | ऐसे बच्चे ही तीनों तख़्त के अधिकारी बनते हैं | त्रिमूर्ति तख़्त भी है | अगर एक तख़्त नशीन बने तो तीनों तख़्त के बनेंगे | बाप तख़्त नशीन बच्चों को देखते हैं तो क्या होता है ?

35This gathering is for harmonising your sanskars.

47बापदादा को भी नशा होता है कि ऐसे लायक बच्चे हैं | 48(जानकी दादी)– अब तक वाणीमूर्त बने हो फिर बनेंगे साक्षात्कार मूर्त | अभी वाणी से औरों को साक्षात्कार होता है लेकिन फिर होगा साइलेंस से साक्षात्कार | जब बनेंगे तो सभी के मुख से क्या निकलेगा ? 49यह जो गायन है ना कि सभी परमात्मा के रूप हैं, यह गायन संगम पर ही प्रैक्टिकल में होता है | भक्तिमार्ग में जो भी बातें कही हैं वह संगम की बातों को मिक्स किया है | तुम्हारी अंत में यह स्थिति आती है, जो सभी में साक्षात् बापदादा की मूर्त महसूस होगी | सभी के मुख से यही आवाज़ निकलेगा यह तो साक्षात् बापदादा के मूर्त हैं | साक्षात् रूप बनने से साक्षात्कार होगा तो जो यह अंत का रूप सभी में साक्षात् रूप देखते हैं इसको मिक्स करके कह देते हैं – सभी परमात्मा के रूप हैं | बाप के समान को परमात्मा का रूप कह देते | यह सभी बातें यहाँ से ही चली हैं तो साक्षात्कार मूर्त बन्ने के लिए साक्षात् बापदादा समान बनना है | अब चेकिंग क्या करनी है ? 50समानता की चेकिंग करनी है, वह चेकिंग नहीं | वह तो बचपन की थी | अब यह चेकिंग करनी है | जितनी समानता उतना स्वमान मिलेगा | समानता से अपने स्वमान का पता लगा सकते हैं | समानता कहा तक आई है और कहाँ तक समानता लानी है यही चेकिंग करना और कराना है | यह भी टॉपिक है जितनी जिसमे समानता देखो उतना समीप समझो | समीप रत्न की परख समानता है |

36To bring things closer together you have to bring them under control.

51(चंद्रमणि दादी) - आप सूर्यमणि हो या चन्द्रमणि हो ? 52चन्द्रमणियाँ जो होते हैं उनका निवास स्थान कहाँ और सूर्यमणियाँ जो होते हैं उनका निवास स्थान कहाँ होता है ?

37To harmonise sanskars there has to be a meeting of the hearts, and you have to forget , finish, and merge the sanskars within yourself. 38Some things you will have to finish, some things you will have to forget, and some things you will have to merge within yourself.

53आप कौन सी मणि हो ?

39Then your sanskars will be harmonised.

54(दोनों हैं) शक्ति रूप भी हैं और शीतल रूप भी हैं | इसलिए कहती हैं सूर्यमणि भी हूँ और चन्द्रमणि भी हूँ | अभी नॉलेज तो आ गयी है लेकिन स्थिति तो नहीं है ना | नॉलेज से लाइट आई है | अभी माईट नहीं आई है | जब लाइट और माईट दोनों में एकरस होंगे तब नंबर आउट होंगे | अभी औरों को भी नॉलेज की लाइट दे सकती हो, माईट नहीं दे सकती हो | इसलिए सफलता भी उसी अनुसार होती है | सभी को लाइट अर्थात् रौशनी आ रही है कि इन्हों की नॉलेज क्या है, लेकिन लाइट का प्रभाव कम है, आधा कार्य अभी रहा हुआ है | माईट देने में नंबर वन यह बनेंगी | कोई-कोई का लाइट देने में नंबर आगे है, कोई का माईट देने में नंबर आगे है | कोई दोनों में है | तीन क्वालिटी है | (जब बापदादा चिंदी पहनाते थे तो सभी तालियाँ बजा रहे थे) सतयुग में बजेंगी शहनाइयाँ | अभी बजती हैं तालियाँ | 55(निर्मलशान्ता दादी) - तन के रोग पर विजय प्राप्त कर रही हो | संगम पर ताज, तिलक, तख़्त और सुहाग-भाग सभी मिलते हैं | एक ही समय पर सर्व प्राप्तियां बापदादा कराते हैं | जो एक जन्म की दें अनेक जन्म चलती है | वैसे बच्चों को फिर अनेक जन्मों के हिसाब-किताब एक जन्म में चुक्तु करने हैं | यह एक जन्म का अनेक जन्म चलता है | वह अनेक जन्मों का एक जन्म में ख़त्म होता है तो अनेक जनों का हिसाब-किताब एक जन्म में ख़त्म करने के कारण कभी-कभी वह फ़ोर्स से रूप ले आता है | बापदादा यह युद्ध देखते रहते हैं आप भी देखती हो अपनी वा दूसरों की ? 56जब साक्षी हो देखने लग पड़ते तो यह व्याधि बदलकर खेल रूप में हो जाती है | बापदादा साक्षी हो देखते भी हैं और उनका साहस देखकर हर्षित भी होते हैं | और साथ-साथ सहयोगी भी बनते हैं | थकती तो नहीं हो ना | (नहीं) अथक बाप के बच्चे अथक और अविनाशी हो | मालुम है अब क्या करना है ? 57अब अंत में साक्षात्कार मूर्त्त बनना है जितना साक्षी अवस्था ज्यादा रहेगी उतना समझो कि साक्षात्कार मूर्त्त बनने वाले हैं | अब अंतिम पुरुषार्थ यह रह गया है | साक्षात्कार मूर्त्त बन बापदादा का साक्षात्कार और अपना साक्षात्कार कराना है |

40You have to accept and give regard to what others say.

58(शान्तामणि दादी) - श्रेष्ठता लाने के लिए मुख्य गुण कौन सा है ?

41You are those who have pure and positive thoughts, and who finish the worries of everyone.

59जितनी स्पष्टता होती उतनी श्रेष्ठता आती है | जो स्पष्ट होता है वाही सरल और श्रेष्ठ होता है | स्पष्टता श्रेष्ठता के नजदीक है और जितनी स्पष्टता होती है उतनी सफलता भी होती है | सफलता फिर इतनी समीपता में लाती है | समीप रत्नों की निशानी किससे मालूम पड़ेगी ? 60समानता से | बापदादा के संस्कारों की समानता से समीपता का मालूम पड़ता है | तो समानता समीपता की निशानी है | आदि रतन हो | आदि सो अनादि | जो आदि रतन हैं वह अनादि गायन योग्य बनते हैं | क्योंकि आदि देव के साथ मददगार हैं | आदि रतन ही सृष्टि के कर्त्तव्य के आधार है | 61(रत्न मोहिनी दादी)– स्नेही हो वा सहयोगी हो ? 62(दोनों) स्नेही और सहयोगी दोनों समान हैं, जितना जो स्नेही उतना सहयोगी बनता है | स्नेही सहयोग के सिवाए रह नहीं सकता | जितना स्नेही है उतना सहयोगी है | उतना ही शक्तिरूप भी है | जब स्नेह, सहयोग और शक्ति तीनों की समानता होती है तब समाप्ति होती है | इस समय डबल ताजधारी हो कि भविष्य में बनेंगे ?

42Each of you has to perform the wonder of making many others equal to yourself in your sanskars: sanskars of perfection, not your own sanskars.

63संगम पर डबल ताजधारी हो ?

43This is the group that brings about completion.

64कौन सा डबल ताज है ?

44And this is also the group that carries out the establishment and the sustenance.

65एक है स्नेह का दूसरा है सर्विस का | सर्विस का ताज है जिम्मेवारी का ताज | वह स्थूल और वह सूक्ष्म है ना | स्नेह का ताज सूक्ष्म है | जो जहाँ डबल ताजधारी बनते हैं, वह वहां भी डबल ताजधारी बनते हैं | बापदादा डबल ताज देते हैं | नुम्बेर्वार ताज तो होते हैं ना | यहाँ भी नंबरवार पुरुषार्थ अनुसार ताजधारी देखने में आएंगे | 66(मनोहर दादी) – जैसे साकार में जब अव्यक्त प्रोग्राम चलते थे तो श्रृंगार कर बैठते थे | आज वाही श्रृंगार किये हुए चित्र देखते हैं | हरेक की विशेषता अपनी-अपनी है जो विशेषता समीप लाती है | आपकी विशेषता क्या है ? 67सर्व से स्नेही और सर्व के सहयोगी बनना – यह विशेषता है | जो सर्व के स्नेही बनते हैं सर्व से स्नेह भी उनको प्राप्त होता है | सर्व स्नेही भी कौन बनते हैं ? 68जो सर्व त्यागी होते हैं | जो सर्व त्यागी होते हैं, वाही सर्व के स्नेही और सहयोगी बनते हैं | ऐसे श्रेष्ठ संकल्प वाले श्रेष्ठ पद के अधिकारी बनते हैं | संकल्प में भी सर्व के कल्याण की भावना हो | सिर्फ अपनी नहीं | ऐसे ही सर्व प्राप्तियों के अधिकारी बनते हैं | ऐसे को बापदादा तथा सभी से सत्कार मिलता है | सत्कार का अधिकार लें यह भी बहुत बड़ी बात है | अच्छा –

45* * * O M S H A N T I * * *