Avyakt murli for Wednesday 24 April 1974
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24-04-74 ओम शान्ति अव्यक्त बापदादामधुबन
अब त्रिमूर्ति लाइट के साक्षात्कार-मूर्त बनने की डेट फिक्स करो
एक सेकेण्ड में जन्म-सिद्ध ईश्वरीय अधिकार देने वाले, ना-उम्मीदवार को उम्मीदवार बनाने वाले,और सर्व आत्माओं को ब्लिस देने वाले त्रिमूर्ति शिव बाबा बोले:-
आज इस संगठन की कौन-सी विशेषता बाप-दादा देख रहे हैं? क्या हरेक अपनी विशेषता को जानते हैं? त्रिमूर्ति बाप से त्रिमूर्ति वंशावली हरेक में आज तीन लाइट देख रही हैं कि तीनों ही लाइट अपनी तरफ आकर्षित करने वाली हैं वा नम्बरवार हैं?जब तीनों ही लाइट जगमगाती हुई दिखाई दें तब ही सबको साक्षात्कार करा सकेंगे। प्योरिटी की लाइट, सतोप्रधान दिव्य- दृष्टि की लाइट और मस्तक मणि की लाइट यह तीनों ही सम्पूर्ण बनाने की मुख्य बातें हैं। तो अपने आप से पूछो कि सदा सतोप्रधान आत्मिक दृष्टि, सदा हर संकल्प, हर बोल व कर्म में प्योरिटी की झलक कहाँ तक आयी है? क्या सदा स्मृति स्वरूप बने हो?अगर आप में एक बात की भी कमी है तो त्रिमूर्ति लाइट का साक्षात्कार नहीं करा सकोगे। यही प्योरिटी सबसे श्रेष्ठ और सहज पब्लिसिटी है और यही अन्तिम पब्लिसिटी का रूप है। जो अन्य कोई भी आत्माएं कर नहीं सकतीं। विश्व परिवर्तन के कार्य में सबसे पॉवरफुल पब्लिसिटी का साधन आप विशेष आत्माओं का यही है। तो क्या ऐसी पब्लिसिटी कर रहे हो या कोई ऐसा प्लान बनाया है या ऐसी कोई विचित्र फिल्म बनाई है?जैसे स्थूल फिल्म देखने से आज के लोग प्रभावित होते हैं, वैसे ही आप सबके मस्तक और नयन ऐसे विचित्र अनुभव कराने की फिल्म दिखावें,तो लोग क्या परिवर्तन में नहीं आवेंगे?जैसे पर्दे के सामने बैठने से भिन्न-भिन्न दृश्य पर्दे पर दिखाई देते हैं वैसे ही आपके सामने आने से अनेक प्रकार की दिव्य-दृष्टि दिखाई देगी। क्या ऐसी रील तैयार कर रहे हो? इसी पुरूषार्थ में लगे हुए हो या अब तक स्वयं को ही सीट पर सेट करने में लगे हुए हो?
दुनिया की आत्माओं को आजकल कोई नई बात चाहिये जो कि कभी किसी के संकल्प में भी न हो। ऐसा कर्त्तव्य दिखाने के कौन निमित्त बनेंगे?-महारथी। हरेक अपने को महारथी तो समझते हो ना?जबकि भविष्य में सदा श्रीलक्ष्मी श्रीनारायण बनने की हिम्मत रखते हैं और चन्द्रवंशी में कोई भी हाथ नहीं उठाते, तो सूर्यवंशी बनने वाले महारथी हुए ना? जब सब महारथी ऐसा महान् कार्य करने लग जायें,तो विश्व-परिवर्तन कितने समय में होगा? महारथियों का संगठन समय-प्रति-समय होता ही रहता है। अब के संगठन में भी क्या बीते हुए संगठन प्रमाण ही प्लैन बनावेंगे या प्रैक्टिकल प्रभाव की डेट फिक्स भी करेंगे? जैसे अन्य सब बातों का प्लैन और डेट फिक्स करते हो वैसे ही सम्पूर्ण सफलता त्रिमूर्ति लाइट के साक्षात्कार-मूर्त बनने का प्लैन और डेट इस बार फिक्स करेंगे या इसके लिए कोई और मीटिंग होगी? साइंस वाले टाइम-बम बनाते हैं तो क्या आप टाइम-बम्स नहीं बनाते?आप सिर्फ बाम्स ही बनाते हो क्या?या सोचते हो कि अभी धरनी नहीं बनी है जो कि प्रत्यक्ष फल निकल आये?
आजकल के जमाने में धरनी को परिवर्तन करना कोई मुश्किल बात नहीं है। कैसी भी धरनी में आजकल साइंस फल पैदा कर देती है ना? न-उम्मीदवार को भी उम्मीदवार बना देती है ना? तो आप मास्टर सर्वशक्तिमान्,ताज, तख्त और तिलकधारी क्या न-उम्मीदवार को उम्मीदवार नहीं बना सकते?असम्भव को सम्भव करना यह चैलेन्ज आप ब्राह्मणों का स्वधर्म है अर्थात् धारणा है तो स्वधर्म में स्थित होना सहज है या कठिन है? बोर्ड जो लगाते हो उसमे क्या लिखते हो? एक सेकेण्ड में जन्म-सिद्ध अधिकार प्राप्त करो। तो ज़रूर एक सेकेण्ड में प्राप्त करने का प्लैन प्रैक्टिकल में है, तब तो लिखते हो ना? तो यही असम्भव को सम्भव होने का चैलेन्ज करते हो ना? तो ऐसा फास्ट कर्त्तव्य कब से शुरू करेंगे? लेकिन बोर्ड के नीचे और भी शब्द लिखते हो-अभी नहीं तो कभी नहीं। फिर तो अब से ही होना चाहिये ना? तो इस वर्ष में कोई ऐसा अनोखा प्लैन बनाओ। पहले क्या साक्षात्कार-मूर्त तैयार हो? क्योंकि भक्ति में भी नियम है कि जरा भी खण्डित मूर्ति पूज्य या मन्दिर के योग्य नहीं बन सकती, और न दर्शनीय-मूर्त्त ही बन सकती है। ड्रामा का पर्दा खुल जाए और मूर्ति सम्पन्न नहीं हो, तो क्या यह शोभेगा? जैसे श्रृंगार में सोलह श्रृंगार प्रसिद्ध हैं,तो क्या ऐसे ही सम्पूर्ण सोलह कला सम्पन्न बने हो?या समय पर जिस कला की आवश्यकता हो,क्या उस समय वह कला स्वरूप में नहीं ला सकते? यदि स्मृति में आता है लेकिन स्वरूप में नहीं आ पाता हो तो आपको सफलता कैसे होगी? यदि युद्ध स्थल में समय पर शस्त्र उपयोग में न ला सको, तो क्या विजय होगी? पहले स्वयं को सम्पन्न बनाने के प्रैक्टिकल प्लैन बनाओ, तो सहज सफलता आपके सम्मुख आ जायेगी।
अब तक रिज़ल्ट क्या देखी है? स्वयं की और अन्य आत्माओं की दोनों की सेवा साथ-साथ और सदा रही। दोनों का बैलेन्स समान रहे यह दिखाई देता है? दोनों का बैलेन्स विश्व की सर्व-आत्माओं को ब्लिस दिलाने के निमित्त बनेगी। यूँ तो सर्व कार्य बाप का है लेकिन जैसे अन्य कार्य में निमित बने हुए हो, तो इसमें क्यों भूल जाते हो?जैसे भक्त लोगों को जब कोई कार्य मुश्किल लगता है, तो भगवान् के ऊपर रख देते हैं ना?सहज में स्वयं और मुश्किल में भगवान् अब तो बाप ने सर्व-शक्तियों का और सर्व-कर्त्तव्यों का आपको निमित्त बना दिया है ना?क्योंकि बाप ने स्वयं को वानप्रस्थी बनाकर आप सबको तख्तनशीन और ताजधारी बना दिया है। जो बाप की ज़िम्मेवारियाँ रही हुई हैं वह अब तुम बच्चों की हैं। हाँ, मददगार बाप अवश्य है। लेकिन साकार स्वरूप में,और नाम बाला करने में सन शोज़ फादर (Son Shows Father) है। इसलिये आप सभी जिम्मेवार आत्मायें हो, परन्तु साधारण आत्मायें नहीं हो। आप ज्ञानी तू आत्मायें और विजय रत्न हो,समझा!-यह है महारथियों का कार्य।
प्रत्यक्ष फल के प्रैक्टिकल प्लैन बनाने वाले, सदा विजय हमारा जन्म-सिद्ध अधिकार है, ऐसे अधिकार प्राप्त करने वाले, चैलेन्ज को प्रैक्टिकल में लाने वाले,सदा सम्पन्न, साक्षात्कार-मूर्त त्रिमूर्ति लाइट धारण करने वाले त्रिमूर्तिवंशी,एक सेकेण्ड में तीनों शक्तियों द्वारा साथ-साथ काम करने वाले और बाप-दादा के सदा साथी, ऐसे महावीरों को बाप-दादा का याद-प्यार और गुडनाइट। अच्छा।
मुरली का सार
स्वयं में यह देखते रहो कि सदा स्मृति स्वरूप, सदा सतोप्रधान आत्मिक दृष्टि, सदा हर संकल्प, बोल और कर्म में प्योरिटी की झलक कहाँ तक आयी है तभी त्रिमूर्ति लाईट का साक्षात्कार करा सकेंगे।