Avyakt murli for Friday 18 February 1983
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18-02-83 ओम शान्ति अव्यक्त बापदादा मधुबन
सदा उमंग-उत्साह में रहने की युक्तियाँ
सदा सेवा की लगन में मगन बनाने वाले बापदादा बोले:-
आज सर्व बच्चों के दिलाराम बाप, बच्चों के दिल की आवाज़,दिल की मीठी-मीठी बातों का रेसपांड देने के लिए बच्चों के बीच आए हैं। अमृतवेले से लेकर बापदादा चारों ओर के बच्चों के भिन्न-भिन्न राज़ भरे हुए साज सुनते रहते हैं। सारे दिन में कितने बच्चों के और कितने प्रकार के साज सुनते होंगे। हरेक बच्चे के भी समय-समय भिन्न-भिन्न साज होते हैं। सबसे पहले ज्यादा नैचरल साज कौन सुनता है?नैचरल वस्तु सदा प्रिय लगती है। तो सब बच्चों के भिन्नभिन्न साज सुनते हुए बापदादा बच्चों के सार में मुख्य बातें सुनाते हैं।
सभी बच्चे यथाशक्ति लगन में मगन अवस्था में स्थित होने के लिए वा मगन स्वरूप के अनुभवी मूर्त बनने के लिए अटेन्शन बहुत अच्छा रखते चल रहे हैं। सबकी दिल का एक ही उमंग उत्साह है कि मैं बाप समान समीप रतन बन सदा सपूत बच्चे का सबूत दूँ । यह उमंग उत्साह सर्व के उड़ती कला का आधार है। यह उमंग कई प्रकार के आने वाले विघ्नों को समाप्त कर सम्पन्न बनने में बहुत सहयोग देता है। यह उमंग का शुद्ध और दृढ़ संकल्प विजयी बनाने में विशेष शक्तिशाली शस्त्र बन जाता है। इसलिए सदा दिल में उमंग उत्साह को वा इस उड़ती कला के साधन को कायम रखना। कभी भी उमंग- उत्साह को कम नहीं करना। उमंग है - मुझे बाप समान सर्व शक्तियों, सर्व गुणों, सर्व ज्ञान के खज़ानों से सम्पन्न होना ही है - क्योंकि कल्प पहले भी मैं श्रेष्ठ आत्मा बना था। एक कल्प की तकदीर नहीं लेकिन अनेक बार के तकदीर की लकीर भाग्य विधाता द्वारा खींची हुई है। इसी उमंग के आधार पर उत्साह स्वतः ही उत्पन्न होता है। उत्साह क्या होता? वाह मेरा भाग्य। जो भी बाप दादा ने भिन्न-भिन्न टाइटिल दिये हैं। उसी स्मृति स्वरूप में रहने से उत्साह अर्थात् खुशी स्वतः ही और सदा ही रहती है। सबसे बड़े ते बड़े उत्साह की बात है कि अनेक जन्म आपने बाप को ढूँढा लेकिन इस समय बापदादा ने आप लोगों को ढूँढा। भिन्न-भिन्न पर्दों के अन्दर छिपे हुए थे। उन पर्दों के अन्दर से भी ढूँढ लिया ना?बिछुड़कर कितने दूर चले गये! भारत देश को छोड़कर कहाँ चले गये! धर्म,कर्म, देश,रीति-रसम,कितने पर्दों के अन्दर आ गये। तो सदा इसीउत्साह और खुशी में रहते हो ना! बाप ने अपना बनाया या आपने बाप को अपना बनाया! पहले मैसेज तो बाप ने भेजा ना। चाहे पहचानने में कोई ने कितना समय,कोई ने कितना समय लगाया। तो सदा उमंग और उत्साह में रहने वाली आत्माओं को,एक बल एक भरोसे में रहने वाले बच्चों को, हिम्मते बच्चे मददे बाप का सदा ही अनुभव होता रहता है। होना ही है यह है हिम्मत। इसी हिम्ते से मदद के पात्र स्वतः ही बन जाते हैं। और इसी हिम्मत के संकल्प के आगे माया हिम्मतहीन बन जाती है। पता नहीं, होगा या नहीं होगा,मैं कर सकूंगा या नहीं, - यह संकल्प करना , माया का आह्वान करना है। जब आह्वान किया तो माया क्यों नहीं आयेगी?यह संकल्प आना अर्थात् माया को रास्ता देना। जब आप रास्ता ही खोल देते हो तो क्यों नहीं आयेगी?आधाकल्प की प्रीत रखने वाली रास्ता मिलते कैसे नहीं आयेगी? इसलिए सदा उमंग उत्साह में रहने वाली हिम्मतवान आत्मा बनो। विधाता और वरदाता बाप के सम्बन्ध से बालक सो मालिक बन गए। सर्व खज़ानों के मालिक, जिस खज़ाने में अप्राप्त कोई वस्तु नहीं। ऐसे मालिक उमंग उत्साह में न रहेंगे तो कौन रहेगा! यह सलोगन सदा मस्तक में स्मृति रूप में रहे - हम ही थे, हम ही हैं और हम ही रहेंगे।याद है ना! इसी स्मृति ने यहाँ तक लाया है। सदा इसी स्मृति भव। अच्छा
आज तो डबल विदेशी, सबसे ज्यादा में ज्यादा दूरदेशवासी,दूर से आने वाले बच्चों से विशेष मिलने के लिए आये हैं। वैसे तो भारत के बच्चे भी सदा अधिकारी हैं ही। फिर भी चान्सलर बन चान्स देते हैं इसलिए भारत में महादानी बनने की रीति-रसम अब तक भी चलती है। सबने अपने-अपने रूप से विश्व सेवा के महायज्ञ में सहयोग दिया। हरेक ने बहुत लगन से अच्छे ते अच्छा पार्ट बजाया। सर्व के एक संकल्प द्वारा विश्व की अनेक आत्माओं को बाप के समीप आने वा सन्देश मिला। अभी इसी सन्देश द्वारा जगी हुई ज्योति अनेको को जगाती रहेगी। डबल विदेशी बच्चों ने अपने दृढ़ संकल्प को साकार में लाया। भारतवासी बच्चों ने भी अनेक नाम फैलाने वाले,सन्देश पहुँचाने वाले विशेष आत्माओं को समीप लाया। कलमधारियों को भी स्नेह ओर सम्पर्क में समीप लाया। कलम की शक्ति और मुख की शक्ति दोनों ही मिलकर सन्देश की ज्योति जगाते रहेंगे। इसके लिए डबल विदेशी बच्चों को और देश में समीप रहने वाले बच्चों को, दोनों को बधाई। डबल विदेशी बच्चों ने पावरफुल आवाज़ फैलाने के निमित्त बनी हुई विशेष आत्माओं को लाया उसके लिए भी विशेष बधाई हो। बाप तो सदा बच्चों के सेवाधारी हैं। पहले बच्चे। बाप तो बैकबोन है ना! सामने मैदान पर तो बच्चे ही आते हैं। मेहनत बच्चों की मुहब्बत बाप की। अच्छा
ऐसे सदा उमंग उत्साह में रहने वाले, सदा बाप दादा की मदद के पात्र,हिम्मतवान बच्चे, सदा सेवा की लगन में मगन रहने वाले, सदा स्वंय को प्राप्त हुई शक्तियों द्वारा सर्व आत्माओं को शक्तियों की प्राप्ति कराने वाले- ऐसे बाप के सदा अधिकारी वा बालक सो मालिक बच्चों को बापदादा का विशेष स्नेह सम्पन्न यादप्यार और नमस्ते।
जानकी दादी से :- बाप समान भव की वरदानी हो ना! डबल सेवा करती हो। बच्ची की मंसा सेवा की सफलता बहुत अच्छी दिखाई दे रही है। सफलता स्वरूप का प्रत्यक्ष सबूत हो। सभी, बाप के साथ-साथ बच्ची के भी गुण गाते हैं। बाप साथ-साथ चक्कर लगाते हैं ना! चक्रवर्ती राजा हो। प्रकृतिजीत का अच्छा ही प्रत्यक्ष पार्ट बजा रही हो। अब तो संकल्प द्वारा भी सेवा का पार्ट अच्छा चल रहा है। प्रैक्टिकल सबूत अच्छा है। अभी तो बहुत बड़े बड़े आयेंगे। विदेश का आवाज़ देश वालों तक पहुँचेगा। सभी विदेशी बच्चों ने सर्विस के उमंग उत्साह का अच्छा ही प्रैक्टिकल सबूत दिखाया है। इसीलिए सभी के तरफ से आपको बहुत-बहुत बधाई हो। अच्छा माइक लाया, याद का स्वरूप बनकर सेवा की है। इसलिए सफलता है। अच्छा बगीचा तैयार किया है। अल्लाह अपने बगीचे को देख रहे हैं।
जयन्ती बहन से :- जन्म से लकी और लवली तो हो ही। जन्म ही लक से हुआ है। जहाँ भी जायेंगी वह स्थान भी लकी हो जायेगा। देखो, लण्डन की धरती लकी हो गई ना। जहाँ भी चक्कर लगाती हो तो क्या सौगात देकर आती हो। जो भाग्य विधाता द्वारा भाग्य मिला है वह भाग्य बाँटकर आती हो! सभी आपको किस नजर से देखते हैं,मालूम है?भाग्य का सितारा हो। जहाँ सितारा चमकता है वहाँ जगमग हो जाता है। ऐसे अनुभव करती हो ना! कदम बच्ची का और मदद बाप की। फालो फादर तो हो ही लेकिन फालो साथी(जानकी दादी को) भी ठीक किया है। यह भी समान बनने की रेस अच्छी कर रही है। अच्छा
(न्यूयार्क से सिंगर शैली ने बापदादा को यादप्यार भेजी है।) इसी मधुबन के यादप्यार ने ही उन्हें नया जन्म दिया है। उनके ओरीजनल नये जन्म की भूमि मधुबन है। तो बर्थ प्लेस उन्हें कैसे भूलेगा! जितनी शक्ति ली है उस शक्ति के हिसाब से बहुत ही अच्छा सर्विस का सबूत दिया है। अपने साथियों को अच्छा ही सन्देश देकर समीप लाया है। शेयर होल्डर है। क्योंकि जितनों को भी मैसेज मिलता है, इसके निमित्त उन सबका शेयर इसको मिलता रहता है।
(गायत्री बहन न्यूयार्क से):-गायत्री भी कम नहीं, बहुत अच्छा सर्विस का साधन अपनाया है। जो भी निमित्त बन करके आत्मायें मधुबन तक पहुँचाई, तो निमित्त बनने वालों को भी बाप दादा और परिवार की शुभ स्नेह के पुष्प की वर्षा होती रहती है। जितना ही शैली अच्छी आत्मा है, उतना ही यह जो बच्चा आया (राबर्ट मूलर) यह भी बहुत अच्छा सेवा के क्षेत्र में सहयोगी आत्मा है। सच्ची दिल पर साहिब राजी। साफ दिल वाला है। इसलिए बाप के स्नेह को, बाप की शक्ति को सहज कैच कर सका। उमंग-उत्साह और संकल्प बहुत अच्छा है। सेवा में अच्छा जम्प लगायेगा। बाप दादा भी निमित्त बने हुए बच्चों को देख हर्षित होते हैं। उनको कहना कि सेवा में उड़ती कला वाले फरिश्ता स्वरूप हो और ऐसे ही अनुभव करते रहना। सर्विस में उड़ती कला वाला बच्चा है। सर्विस करने का उमंग अच्छा है। अच्छा - सभी के सहयोग से सफलता मधुबन तक दिखाई दे रही है। नाम किसका भी नहीं ले रहे हैं। लकिन सब समझना कि हमें बाबा कह रहे हैं। कोई भी कम नहीं है। समझो पहले हम सेवा में आगे हैं। छोटे बड़े सभी ने तन-मन-धन-समय,संकल्प सब कुछ सेवा में लगाया है।
मुरली भाई और रजनी बहन से :- बाप दादा के स्नेह की डोर ने खींच लाया ना। सदा अभी क्या याद रहता है? श्वासों श्वासं सेकण्ड-सेकण्ड क्या याद रहता?सदा दिल से बाबा ही निकलता है ना! मन की खुशी,याद के अनुभव द्वारा अनुभव की! अभी एकाग्र हो जो सोचेंगे वह सब आगे बढ़ने का साधन हो जायेगा। सिर्फ एक बल एक भरोसे से एकाग्र हो कर के सोचो। निश्चय में एक बल और एक भरोसा,तो जो कुछ होगा वह अच्छा ही होगा। बापदादा सदा साथ हैं और सदा रहेंगे। बहादुर हो ना! बाप दादा बच्चे की हिम्मत और निश्चय को देख के निश्चय और हिम्मत पर बधाई दे रहे हैं। बेफिकर बादशाह के बच्चे बादशाह हो ना! ड्रामा की भावी ने समीप रत्न तो बना ही दिया है। साथ भी बहुत अच्छा मिला है। साकार का साथ भी शक्तिशाली है। आत्मा का साथ तो है ही बाप। डबल लिफ्ट है। इसलिए बेफिकर बादशाह। समय पर पुण्यात्मा बन पुण्य का कार्य किया है। इसलिए बाप दादा के सहयोग के सदा पात्र हो। कितने पुण्य के अधिकारी बने। पुण्य-स्थान के निमित्त बने। किसी भी रीति से बच्चे का भाग्य बना ही दिया ना। पुण्य की पूँजी इकट्ठी है। मुरलीधर का मुरली, मास्टर मुरली है। बाप का हाथ सदा हाथ में है। सदा याद करते और शक्ति लेते रहो।
बाप का खज़ाना सो आपका, अधिकारी समझकर चलो। बाप दादा तो घर का बालक सो घर का मालिक समझते हैं। परमार्थ और व्यवहार दोनों साथ-साथ हों। व्यवहार में भी साथ रहे। अच्छा।
यू.के. ग्रुप से :- सभी अपने को स्वराज्य अधिकारी सो विश्व राज्य अधिकारी समझते हो? वैसे भी लण्डन राजधानी है ना! तो राजधानी में रहते हुए अपना राज्य सदा याद रहता है ना! रानी का महल देखते हुए अपने महल याद आते हैं? आपके महल कितने सुन्दर होंगे,जानते हो ना! ऐसा आपका राज्य है जो अब तक कोई ऐसा राज्य न हुआ ह। न होगा। ऐसा नशा है?भल अभी तो सब विनाश हो जायेगा। लेकिन आप तो भारत में आ जायेंगे ना। यह तो पक्का है ना! जहाँ भी ब्राहमण आत्माओं ने इतनी सेवा की है वह पिकनिक स्थान जरूर रहेंगे। आदमशुमारी कम होगी, इतने विस्तार की आवश्यकता नहीं होगी। अच्छा - अपना घर, अपना राज्य, अपना बाप, अपना कर्त्तव्य सब याद रहे।
प्रश्न:- सदा आगे बढ़ने का साधन क्या है?
उत्तर:-नालेज और सेवा। जो बच्चे नालेज को अच्छी रीति धारण करते हैं और सेवा की सदा रूचि बनी रहती है वह आगे बढ़ते रहते हैं। हजार भुजा वाला बाप आपके साथ है, इसलिए साथी को सदा साथ रखते आगे बढ़ते रहो।
प्रश्न:- प्रवृत्ति में जो सदा समर्पित होकर रहते हैं - उनके द्वारा कौन सी सेवा स्वतः हो जाती है?
उत्तर:-ऐसी आत्माओं के श्रेष्ठ सहयोग से सेवा का वृक्ष फलीभूत हो जाता है। सबका सहयोग ही वृक्ष का पानी बन जाता है। जैसे वृक्ष को पानी मिले तो वृक्ष से फल कितना अच्छा निकलता है, ऐसे श्रेष्ठ सहयोगी आत्माओं के सहयोग से वृक्ष फलीभूत हो जाता है। तो ऐसे बाप दादा के दिलतख्तनशीन,सेवा की धुन में सदा रहने वाले, प्रवृत्ति में भी समर्पित रहने वाले बच्चे हो ना। अच्छा।
ओम् शान्ति।