Daily Murli for Sunday 17 May 2026
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17-05-26 प्रातःमुरली ओम् शान्ति ''अव्यक्त-बापदादा'' रिवाइजः 11-02-10 मधुबन
शिव के जन्म दिन पर क्रोध रूपी अक का फूल बापदादा को अर्पण कर दर्पण बनो, पवित्र प्रवृत्ति के प्रत्यक्ष प्रमाण द्वारा प्रत्यक्षता को समीप लाओ
आज सभी बच्चे सम्मुख बैठे हुए और देश विदेश में बैठे हुए चारों ओर के बच्चे बहुत खुशी से बाप का और अपना जन्म दिन मनाने की अनेकानेक बधाईयां, मुबारकें दे रहे हैं। आप सम्मुख बैठे हो और दूर-दूर से साइंस के साधनों द्वारा सभी बच्चे खुशी-खुशी से दिल की मुबारकें दे रहे हैं। आप सभी जो भी यहाँ आये हैं वह बाप का जन्म दिन मनाने आये हैं वा अपना भी मनाने आये हैं? क्योंकि यह जयन्ती विचित्र जयन्ती है, क्यों विचित्र है? बाप और बच्चों की साथ-साथ है। सारे कल्प में ऐसी जयन्ती होती ही नहीं है। सारे कल्प में चक्र लगाके आओ। विचित्र जयन्ती है। तो बापदादा सभी बच्चों से पूछ रहे हैं कि आप सभी बाप को बधाईयां देने आये हो वा बाप से बधाईयां लेने आये हो? बापदादा अकेला कुछ नहीं करता क्योंकि जन्म लेते यज्ञ रचा तो यज्ञ में ब्राह्मण चाहिए। तो आपका भी जन्म बाप के साथ हुआ। इसका यादगार भक्ति में भी शिवरात्रि मनाते हैं तो साथ में शालिग्रामों की भी पूजा होती है। अनेकानेक शालिग्रामों को पूजते हैं। तो यह जयन्ती वन्डरफुल जयन्ती है इसलिए इस जयन्ती को हीरे तुल्य जयन्ती कहा जाता है। तो बापदादा सभी साथी बच्चों को पदम पदमगुणा बांहों के हार के बीच पदम पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं। यह भी बाप और बच्चों की अति दिल के प्यार की निशानी है। बापदादा का बच्चों से वायदा है कि साथ रहेंगे, साथ चलेंगे। तो बोलो बच्चों का भी बाप से वायदा है ना! कि संगम पर साथ है, साथ-साथ रहना भी है, विश्व सेवा भी साथ में है। रहना भी है साथ में, उड़ना भी है तो साथ में। तो बोलो, आपका भी वायदा है ना कि साथ रहेंगे, साथ चलेंगे और ब्रह्मा बाप के साथ विश्व पर राज्य करेंगे। वायदा है? पक्का वायदा है? यही विशेषता इस शिव जयन्ती की है।
बापदादा ने अमृतवेले से देखा कि भिन्न-भिन्न स्थान के बच्चे बहुत ही खुशी से मुबारक, बधाईयां भेज रहे थे। आप तो अभी सम्मुख बधाईयां दे भी रहे हो और ले भी रहे हो। देना और लेना साथ में है। कितने भाग्यवान भगवान के बच्चे हैं जो सम्मुख बर्थ डे मना रहे हैं। सभी के चेहरे खुशनुमः खुशी में उड़ते हुए दिखाई दे रहे हैं। एक तरफ बापदादा बच्चों के भाग्य को देख रहे हैं और दूसरे तरफ भक्तों को भी देख रहे हैं। वह अभी तक पुकार रहे हैं आओ और आप साथ में मना रहे हो। बापदादा ने देखा भक्तों की अनुभूति भी कोई कम नहीं है। जो प्रैक्टिकल में आप कर रहे हो उसका यादगार रूप में कितनी अच्छी विधि से यादगार बनाया है। आपने व्रत लिया तो उन्होंने भी व्रत का यादगार बनाया है। वह एक दिन या थोड़े समय के लिए व्रत रखते हैं लेकिन आपने कौन सा व्रत रखा है? सभी ने बाप के आगे व्रत रखने का वचन लिया है ना! आपने बाप से खुशी-खुशी व्रत लिया है कि बाबा हम इस पूरे जन्म के लिए, ब्राह्मण जन्म के लिए व्रत धारण करेंगे, व्रत धारण किया है ना! कौन सा? पवित्रता का। एक जन्म का व्रत लिया है लेकिन एक जन्म पवित्रता का व्रत 21 जन्म चलेगा। वह थोड़े समय के लिए खाने पीने का व्रत लेते और जागरण का कार्य करते हैं। लेकिन अभी आपके एक जन्म के जागरण से सभी अंधकार से रोशनी में आ गये और यह जागरण भी आपका 21 जन्म चलेगा। अभी आपने ऐसा जागरण किया है जो सारी विश्व आपके जागरण से जागती ज्योति रहेगी। कोई भी दुःख अशान्ति का अंधकार नहीं रहेगा। तो बोलो, आपने सारे विश्व को अंधकार से रोशनी में लाया है, यह बेहद का व्रत अच्छा लगता है? मेहनत तो नहीं लगती? सहज है वा मुश्किल है? सहज लगता है! जिसको सहज लगता है वह हाथ उठाओ। कभी-कभी मुश्किल नहीं लगता? कभी लगता है? नहीं क्योंकि आप जानते हो कि पवित्रता हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है इसलिए पवित्रता सिर्फ ब्रह्मचर्य नहीं लेकिन मन-वाणी-कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क में भी पवित्रता। पवित्रता के संस्कार सहज धारण करने वाले हो। तो पवित्रता का तो संकल्प किया है लेकिन अभी समय अनुसार बापदादा समय की वार्निंग तो दे रहे हैं। तो जैसे पवित्रता का व्रत हिम्मत रख अपना स्वधर्म समझ धारण किया है वैसे जो दूसरा भूत है क्रोध, तो आज बापदादा यह पूछते हैं कि एक महाभूत को तो व्रत लेकर वृत्ति बदली लेकिन दूसरा जो भूत है क्रोध का, क्या क्रोध के भूत पर विजय प्राप्त करना, यह भी संकल्प किया है या दूसरा विकार है इसीलिए छूट है? क्योंकि क्रोध सबके कनेक्शन में आता है। तो आज के दिन, जब भी जन्म दिन मनाते हैं तो एक-दो को गिफ्ट भी देते हैं तो आज बापदादा यह चाहते हैं कि जैसे हिम्मत और बाप की मदद से पहले नम्बर पर मैजारिटी जीत प्राप्त कर चल रहे हैं, क्या ऐसे ही क्रोध पर भी जीत हो सकती है? क्योंकि कोई भी भूत परेशान तो करते हैं और क्रोध का भूत दूसरों के कनेक्शन में आता है, सम्पर्क में आता है। अपने मन में भी जब क्रोध आता है तो खुद भी क्रोध से लाचार होते हैं। तो बाप का बर्थ डे मनाने आये हो, तो आज बापदादा चाहे भारत वा फॉरेन वाले सभी बच्चों से क्रोध की गिफ्ट लेने चाहते हैं। हो सकता है? हो सकता है? जो समझते हैं कि आज के दिन बाप को गिफ्ट में दे सकते हैं, मन में भी नहीं, स्वप्न में भी नहीं, ऐसा अपने को संकल्प रख हिम्मत से आगे बढ़ने की शक्ति है? है? तो बाप के सम्मुख हिम्मत से संकल्प कर सकते हैं? करेंगे और बाप से गिफ्ट लेंगे? गिफ्ट में दो और गिफ्ट लो। अगर क्रोध पर जीत हो गई तो औरों पर (दूसरे विकारों पर) भी जीत प्राप्त करने की हिम्मत आयेगी। तो कौन समझता है कि हम यह गिफ्ट देकर और बाप से गिफ्ट लेंगे? वह हाथ उठाओ। अच्छा, झण्डा हिला रहे हैं। कुमारियां भी! देखना।
बापदादा को बच्चों की हिम्मत देख बहुत अच्छा लग रहा है। आप सीन देख रहे हो ना! फोटो निकालो फिर हाथ उठाओ। हाँ सभी का फोटो निकालो। बापदादा इस हिम्मत पर आपको रोज़ अमृतवेले जब मिलन मनाते हो उस समय विशेष सहज अनुभवी आत्मा बनने की बधाई देंगे क्योंकि इतने सब अपने-अपने स्थान पर रहते भी जब लोग देखेंगे कि यह इतने रहते हैं, इकट्ठे रहते हैं, प्रवृत्ति सम्भालते हैं, घरबार छोड़के नहीं गये हैं, लेकिन पवित्र प्रवृत्ति बनाई है तो क्या हो जायेगा? जो आप सबके अन्दर शुभ भावना है कि आत्माओं की क्यु लग जाए वह क्यु आपको दिखाई देगी क्योंकि क्रोध प्रत्यक्ष दिखाई देता है। जब प्रैक्टिकल देखेंगे कि यह तो सिर्फ पवित्रता कहते नहीं लेकिन पवित्र रह करके दिखाते हैं, प्रत्यक्षता चाहते हो तो यह प्रत्यक्ष प्रमाण है इससे सभी आकर्षित होके स्वतः ही आयेंगे। लेकिन सुनायें? आगे सुनायें? क्रोध आने का कारण मैजारिटी देखा गया है कि कहाँ न कहाँ ईर्ष्या और साथ में कुछ भी देख करके चलते हुए वेस्ट थॉट्स का बीज भी क्रोध को लाता है क्योंकि वेस्ट थॉट्स है बीज, इस बीज से क्रोध भी उत्पन्न होता है और इसका एक शब्द निमित्त बनता है, उस एक शब्द के बीज को अगर खत्म किया तो सहज हो जायेगा। वह एक शब्द है ‘क्यों', यह क्यों? यह क्यों हुआ? यह क्यों किया? यह क्यों करते हैं? इस ‘क्यों' शब्द की बड़ी क्यू है। और देखो क्यू अक्षर इंगलिश में लिखो तो कितना मुश्किल लिखा जाता है और ‘ए' लिखो, कितना सहज है। तो बापदादा आज यही चाहते हैं कि इस क्यों शब्द का क्यु खत्म करो। तो जो आप सबकी आश है कि अभी जल्दी-जल्दी बाप की प्रत्यक्षता हो, हर एक की दिल में बाप के स्नेह का फ्लैग (झण्डा) लहरावे और दिल गीत गाये, दिल में गीत गाये हमारा बाबा आ गया। मीठा बाबा आ गया। यही चाहते हो ना! कि जल्दी-जल्दी प्रत्यक्षता का झण्डा सबके दिल में लहराये। तो इसके लिए क्यों, क्या, कैसे होगा, यह कै-कै की भाषा खत्म करके कै बोलना है तो कमाल बोलो। कै-कै नहीं करो। जब बापदादा ने बच्चों का बोर्डिंग खोला, पाकिस्तान की बात है, आदि में तो जगत अम्बा बच्चों को यही कहती थी तो कै-कै की भाषा नहीं करो। कै-कै ज्यादा कौन करता है? वह अच्छा लगता है? तो अभी क्यों क्यों की क्यु नहीं लगाओ। हाँ जी, अच्छा जी, बहुत अच्छा, हम मिलके करेंगे, उड़ेंगे ऐसे बोल बोलो। भाषा का परिवर्तन हो सकता है? कै-कै नहीं, यह क्यु छोड़ दो तो वह क्यु लगेगी।
देखो, शिव के ऊपर अक के फूल ही चढ़ते हैं, तो आज शिवरात्रि मना रहे हो, शिव का जन्म दिन मना रहे हो तो सभी यह क्रोध रूपी अक का फूल बापदादा को अर्पण कर दो तो आप दर्पण बन जायेंगे। पसन्द है ना! पसन्द है? अच्छा। तो अभी होली पर बापदादा आयेंगे, उसमें रिजल्ट लेंगे। थक नहीं जाना। हुआ नहीं, निश्चयबुद्धि होके करो, करना ही है। और हाथ उठाया, हाथ उठाना अर्थात् बाप को दे दिया। दिया ना! फिर हाथ उठाओ। देख रही हैं दादियां, देख रही हो? ताली बजाओ। हिम्मत कभी भी नहीं हारना। अगर थोड़ा भी कम हुआ तो आगे के लिए हिम्मत रखके छोड़ नहीं देना। बढ़ते रहना। बापदादा कम्बाइण्ड है, कहते हो ना साथ है, कम्बाइण्ड है। तो ऐसे समय पर अगर कुछ भी हो तो बापदादा कम्बाइण्ड है उसको सामने लाके फिर अर्पण कर दो। लेकिन बापदादा चाहता है कि सभी बच्चे नम्बरवन हो, दी हुई चीज़ अमानत हो गई। हाथ उठाया अर्थात् दिया तो अभी आपका नहीं हुआ। अमानत है। तो अगर संकल्प में भी आये तो समझना अमानत में ख्यानत, यह बुरा माना जाता है। दी हुई चीज़ कभी वापिस नहीं ली जाती क्योंकि मेरी नहीं।
आज बापदादा चारों ओर के जो स्क्रीन में भी देख रहे हैं, वहाँ बैठे सब खुशी-खुशी से देख रहे हैं और संकल्प भी कर रहे हैं, तो मधुबन या सभी सेन्टर क्या बन जायेंगे? क्या बन जायेंगे? सभी सेन्टर्स निर्विघ्न भव के वरदानी बन जायेंगे। पसन्द है ना! पसन्द है? क्योंकि अभी अचानक सरकमस्टांश दुःख और अशान्ति के कारण ऐसे बनेंगे जो आप सबको आत्माओं पर रहम आयेगा, क्योंकि आप पूर्वज हो, पूज्य भी हो और पूर्वज भी हो। तो पूर्वज कोई भी आत्मा का दुःख या डिस्ट्रबेन्श देख नहीं सकते, जिससे प्यार होता है, रहम होता है उसका दुःख देख नहीं सकते। तो बाप समझते हैं कि समय आपको परिवर्तन करे, इससे पहले आप पुरुषार्थ के प्राप्ति की प्रालब्ध अभी से अनुभव करो क्योंकि आपको सिखाने वाला समय नहीं है, समय आपका टीचर नहीं है। तो बापदादा चाहते हैं कि होली पर हर एक अपनी रिजल्ट लिखे, ज्यादा लम्बा नहीं लिखना, पढ़ने की भी फुर्सत नहीं होती। लेकिन बापदादा ने पहले भी सुनाया कि जैसे आपको वरदान की चिटकी मिलती है ना, कितनी छोटी होती है, उसमें ओ.के. लिखो। ओ.के. शब्द लिखना। अगर आपमें पुरुषार्थ करते कुछ भी हुआ हो तो ओ.के. के बीच में लाइन लगाना। इज़ी है ना! इतना कागज वेस्ट नहीं करना। अगर ज्यादा बार हो, एक बार, दो बार, तीन बार तो लाइन लगाते जाना और होली के पहले मधुबन में भेज देना। भले इकट्ठे करके भेजो, टीचर भेजे। तो बापदादा के पास रिजल्ट पहुंच जायेगी, इसमें नम्बरवन कौन? फिर बापदादा आपको पदम पदमगुणा दिल के स्नेह की सौगात देंगे। अच्छा।
डबल फारेनर्स है ना! हाथ उठाओ। नम्बर लेंगे ना! देखेंगे फॉरेन वाले नम्बर लेते हैं या भारत वाले। अच्छा है। बाप-दादा तो सभी को उम्मींदवार नहीं देखते लेकिन बाप के आशाओं को पूर्ण करने वाले बाप के आशाओं के दीपक के रूप में देखने चाहते हैं। अच्छा - मधुबन क्या करेगा? मधुबन वाले हाथ उठाओ। नीचे ऊपर सब मधुबन। ऊपर वाले भी हाथ लम्बा उठाओ, हिलाओ। अच्छा। मधुबन को नम्बर तो लेना चाहिए। लेना चाहिए ना! लेना चाहिए क्योंकि मधुबन को सभी बहुत जल्दी कापी करते हैं। अच्छा।
चारों ओर के कम्बाइण्ड रहने वाले देख भी रहे हैं, सुन भी रहे हैं लेकिन सभी जो नहीं भी सुन रहे हैं, वह मुरली द्वारा तो सुनेंगे ही। तो चारों ओर के बाप के स्नेही सहयोगी मीठे-मीठे, प्यारे-प्यारे बच्चों को बापदादा पदम पदमगुणा बधाईयां भी दे रहे हैं, मुबारक भी दे रहे हैं और साथ-साथ प्रत्यक्षता का झण्डा जल्दी से जल्दी लहराने का संकल्प भी दे रहे हैं। समय पर नहीं रहो, समय को टीचर नहीं बनाना, जब बाप; बाप, शिक्षक और सतगुरू है तो जैसे आपकी जगत अम्बा ने किया, दो शब्द में नम्बर ले लिया। बाप का कहना और जगत अम्बा का करना - ऐसे तीव्र पुरुषार्थ किया और नम्बर लिया। आप सब भी मानते हो ना, तो आप भी फालो मदर जगत अम्बा। अच्छा। सबको यादप्यार और बहुत-बहुत दिल की दुआयें स्वीकार हो। साथ-साथ बाप बच्चों को मालिकपन में देख नमस्ते कर रहे हैं।
बापदादा ने सभी ज़ोन को कहा है कि वारिस और माइक निकालो, प्रभावशाली माइक जिनका अनुभव सुन प्रेरणा आ जाए कि हम भी बनें, किसी को भी सैटिस्फाय कर सकें। तो सभी ज़ोन लिस्ट भेजना। आज बापदादा ने देखा कि देहली वालों ने लिस्ट भेजी है। बापदादा मुबारक दे रहे हैं। तो जब सभी ज़ोन भेजेंगे तो आपको भी रिजल्ट सुनायेंगे कितने वारिस तैयार हुए हैं। चेकिंग करायेंगे, ऐसे नहीं लिस्ट आई तो मान जायेंगे। गुप्त चेकिंग करायेंगे। अच्छा, आदि में भी मुबारक और बधाईयां मिली, अभी भी बापदादा एक-एक बच्चे का दिल में नाम ले पदम पदमगुणा मुबारक दे रहे हैं। बाप के पास तो सभी बच्चों का चित्र वतन में इमर्ज है। तो बापदादा ने बच्चों का बर्थ डे मनाया और बच्चों ने बाप का बर्थ डे मनाया, दोनों को मुबारक। अच्छा।
वरदान:- सबको रिगार्ड देते हुए अपना रिकार्ड ठीक रखने वाले सर्व के स्नेही भव
जितना जो सभी को रिगार्ड देता है उतना ही अपने रिकार्ड को ठीक रख सकता है। दूसरों का रिगार्ड रखना अपना रिकार्ड बनाना है। जैसे यज्ञ के मददगार बनना ही मदद लेना है, वैसे रिगार्ड देना ही रिगार्ड लेना है। एक बार देना और अनेक बार लेने के हकदार बन जाना। वैसे कहते हैं छोटों को प्यार और बड़ों को रिगार्ड दो लेकिन जो सभी को बड़ा समझकर रिगार्ड देते हैं वह सबके स्नेही बन जाते हैं। इसके लिए हर बात में “पहले आप'' का पाठ पक्का करो।
स्लोगन:- बापदादा की मिली हुई शिक्षायें समय पर याद आना ही तीव्र पुरुषार्थ है।
ये अव्यक्त इशारे - सदा अचल, अडोल, एकरस स्थिति का अनुभव करो
जो आलराउण्ड सर्विस करने वाले हैं उन्हें विशेष इस बात का ध्यान रखना है कि कैसी भी परिस्थिति में अपनी स्थिति एकरस रहे तब सफलता मिलेगी। श्रीमत में जब मनमत, देह-अभिमानपने की मत, शूद्र पने की मत मिक्स करते हो तब स्थिति एकरस नहीं रहती। मन भिन्न-भिन्न रसों में है तो स्थिति भी भिन्न-भिन्न है। एक ही रस में रहे तो स्थिति एकरस रहेगी।