Avyakt murli du jeudi 27 février 1986
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27-02-86ओम शान्ति अव्यक्त बापदादामधुबन
रूहानी सेना कल्प-कल्प की विजयी
अव्यक्त बापदादा अफ्रिकन ग्रुप प्रति बोले
सभी रूहानी शक्ति सेना, पाण्डव सेना, रूहानी सेना सदा विजय के निश्चय और नशे में रहते हैं न, और कोई भी सेना जब लड़ाई करती है तो विजय की गैरन्टी नहीं होती है। निश्चय नहीं होता कि - विजय निश्चित ही है। लेकिन आप रूहानी सेना,शक्ति सेना सदा इस निश्चय के नशे में रहते कि न सिर्फ अब के विजयी है लेकिन कल्प-कल्प के विजयी हैं। अपने कल्प पहले के विजय की कथायें भी भक्ति मार्ग में सुनते आये हो। पाण्डवों की विजय की यादगार कथा अभी भी सुन रहे हो। अपने विजय के चित्र अब भी देख रहे हो। भक्ति में सिर्फ अहिंसक के बजाए हिंसक दिखा दिया है। रूहानी सेना को जिस्मानी साधारण सेना दिखा दिया है। अपना विजय का गायन अभी भी भक्तों द्वारा सुन हर्षित होते हो। गायन भी है - प्रभु-प्रीत बुद्धि विजयन्ति।विपरीत बुद्धि विनशन्ति। तो कल्प पहले का आपका गायन कितना प्रसिद्ध है! विजय निश्चित होने के कारण निश्चयबुद्धि विजयी हो। इसलिए माला को भी विजय माला कहते हैं। तो निश्चय और नशा दोनों हैं ना! कोई भी अगर पूछे तो निश्चय से कहेंगे कि विजय तो हुई पड़ी है। स्वप्न में भी यह संकल्प नही उठ सकता कि पता नहीं विजय होगी वा नहीं,हुई पड़ी है। पास्ट कल्प और भविष्य को भी जानते हो। त्रिकालदर्शी बन उसी नशे से कहते हो। सभी पक्के हो ना! अगर कोई कहे भी कि सोचो,देखो तो क्या कहेंगे?अनेक बार देख चुके हैं। कोई नई बात हो तो सोचें भी और देखें भी। यह तो अनेक बार की बात अब रिपीट कर रहे हैं। तो ऐसे निश्चय बुद्धि ज्ञानी तू आत्मायें योगी तू आत्मायें हो ना!
आज अफ्रीका के ग्रुप का टर्न है। ऐसे तो सभी अब मधुबन निवासी हो। परमानेंट एड्रेस तो मधुबन है ना। वह तो सेवास्थान है। सेवा-स्थान हो गया दफ्तर, लेकिन घर तो मधुबन है ना। सेवा के अर्थ अफ्रीका, यू.के. आदि चारों तरफ गये हुए हो। चाहे धर्म बदली किया, चाहे देश बदली किया लेकिन सेवा के लिए ही गये हो। याद कौन-सा घर आता है? मधुबन या परमधाम। सेवा स्थान पर सेवा करते भी सदा ही मधुबन और मुरली यही याद रहता है ना। अफ्रीका में भी सेवा अर्थ गये हो ना। सेवा ने ज्ञान गंगा बना लिया। ज्ञान गंगाओं में ज्ञान स्नान कर आज कितने पावन बन गये! बच्चों को भिन्न-भिन्न स्थानों पर सेवा करते हुए देख बापदादा सोचते हैं कि कैसे-कैसे स्थानों पर सेवा के लिए निर्भय बन बहुत लगन से रहे हुए हैं। अफ्रिकन लोगों का वायुमण्डल,उन्हों का आहार व्यवहार कैसा है, फिर भी सेवा के कारण रहे हुए हो। सेवा का बल मिलता रहता। सेवा का प्रत्यक्ष फल मिलता है, वह बल निर्भय बना देता है। कभी घबराते तो नहीं हो न। और ऑफीशियल निमंत्रण पहले यहाँ से ही मिला। विदेश सेवा का निमंत्रण मिलने से ऐसे-ऐसे देशों में पहुँच गये। निमंत्रण की सेवा का फाउण्डेशन यहाँ से ही शुरू हुआ। सेवा के उमंग उत्साह का प्रत्यक्ष फल यहाँ के बच्चे ने दिखाया। बलिहारी उस एक निमित्त बनने वाले की जो कितने अच्छे- अच्छे छिपे हुए रत्न निकल आये। अभी तो बहुत वृद्धि हो गई है। वह छिप गया और आप प्रत्यक्ष हो गये। निमंत्रण के कारण नम्बर आगे हो गया। तो अफ्रीका वालों को बापदादा आफरीन लेने वाले कहते हैं। आफरीन लेने का स्थान है क्योंकि वातावरण अशुद्ध है। अशुद्ध वातावरण के बीच वृद्धि हो रही है। इसके लिए आफरीन कहते हैं।
शक्ति सेना और पाण्डव सेना दोनों ही शक्तिशाली हैं। मैजारिटी इन्डियन्स हैं। लेकिन इन्डिया से दूर हो गये तो दूर होते भी अपना हक तो नहीं छोड़ सकते। वहाँ भी बाप का परिचय मिल गया। बाप के बन गये। नैरोबी में मेहनत नहीं लगी। सहज ही बिछुड़े हुए पहुँच गये और गुजरातियों के यह विशेष संस्कार हैं। जैसे उन्हों की यह रीति है। सभी मिलकर गर्बा रास करते हैं। अकेले नहीं करते। छोटा हो चाहे मोटा हो सब मिलकर गर्बा डान्स जरूर करते हैं। यह संगठन की निशानी है। सेवा में भी देखा गया है गुजराती संगठन वाले होते। एक आता तो 10 को जरूर लाता। यह संगठन की रीति अच्छी है उन्हों में। इसलिए वृद्धि जल्दी हो जाती है। सेवा की वृद्धि और विस्तार भी हो रहा है। ऐसे-ऐसे स्थानों पर शान्ति की शक्ति देना,भय के बदले खुशी दिलाना - यही श्रेष्ठ सेवा है। ऐसे स्थानों पर आवश्यकता है। विश्व कल्याणकारी हो तो विश्व के चारों ओर सेवा बढ़ती है। और निमित्त बनना ही है। कोई भी कोना अगर रह गया तो उल्हना देंगे। अच्छा है - हिम्मते बच्चे मदद दे बाप। हैण्डस भी वहाँ से ही निकल और सेवा कर रहे हैं। यह भी सहयोग हो गया ना। स्वयं जगे हो तो बहुत अच्छा लेकिन जगकर फिर जगाने के भी निमित्त बनें यह डबल फायदा हो गया। बहुत करके हैण्डस भी वहाँ के ही हैं। यह विशेषता अच्छी है। विदेश सेवा में मैजारिटी सब वहाँ से निकल वहाँ ही सेवा के निमित्त बन जाते। विदेश ने भारत को हैण्डस नहीं दिया है। भारत ने विदेश को दिये हैं। भारत भी बहुत बड़ा है। अलग-अलग जोन हैं। स्वर्ग तो भारत को ही बनाना है। विदेश तो पिकनिक स्थान बन जायेगा। तो सभी एवररेडी हो ना! आज किसको कहाँ भेजें तो एवररेडी हो ना! जब हिम्मत रखते हैं तो मदद भी मिलती है। एवररेडी जरूर रहना चाहिए। और जब समय ऐसा आयेगा तो फिर आर्डर तो करना ही होगा। बाप द्वारा आर्डर होना ही हैं। कब करेंगे वह डेट नहीं बतायेंगे। डेट बतावें फिर तो सब नम्बर वन पास हो जाएँ। यहाँ डेट का ही अचानकएक ही क्वेश्चन आयेगा! एवररेडी हो ना। कहें यहाँ ही बैठ जाओ तो बाल-बच्चे घर आदि याद आयेगा?सुख के साधन तो वहाँ हैं लेकिन स्वर्ग तो यहाँ बनना है। तो सदा एवररेडी रहनाश्। यह हैं ब्राह्मण जीवन की विशेषता। अपनी बुद्धि की लाइन क्लीयर हो। सेवा के लिए निमित्त मात्र स्थान बाप ने दिया है। तो निमित्त बनकर सेवा में उपस्थित हुए हो। फिर बाप का इशारा मिला तो कुछ भी सोचने की जरूरत ही नहीं है। डायरेक्शन प्रमाण सेवा अच्छी कर रहे हो। इसलिए न्यारे और बाप के प्यारे हो। अफ्रीका ने भी वृद्धि अच्छी की है। वी.आई.पी. की सेवा अच्छी हो रही है। गवर्मेन्ट के भी कनेक्शन अच्छे हैं। यह विशेषता है जो सर्व प्रकार वाले वर्ग की आत्माओं का सम्पर्क भी कोई न कोई समय समीप ले ही आता है। आज सम्पर्क वाले,कल सम्बन्ध वाले हो जायेंगे। उन्हों को जगाते रहना चाहिए। नहीं तो थोड़ी आँख खोल फिर सो जाते हैं। कुम्भकरण तो हैं ही। नींद का नशा होता है तो कुछ भी खा-पी भी लेते तो भूल जाते। कुम्भकरण भी ऐसे हैं। कहेंगे हाँ, फिर आयेंगे, यह करेंगे। लेकिन फिर पूछो तो कहेंगे याद नहीं रहा। इसलिए बार-बार जगाना पड़ता है। गुजरातियों ने बाप का बनने में, तनमन- धन से स्वयं को सेवा में लगाने में नम्बर अच्छा लिया है। सहज ही सहयोगी बन जाते हैं। यह भी भाग्य है। संख्या गुजरातियों की अच्छी है। बाप का बनने की लाटरी कोई कम नहीं है।
हर स्थान पर कोई न कोई बाप के बिछुड़े हुए रत्न हैं ही। जहाँ भी पाँव रखते हैं तो कोई न कोई निकल ही आते। बेपरवाह निर्भय हो करके सेवा में लगन से आगे बढ़ते हैं तो पद्म गुणा मदद भी मिलती है। आफिशियल निमन्त्रण तो फिर भी यहाँ से ही आरम्भ हुआ। फिर भी सेवा का जमा तो हुआ ना। वह जमा का खाता समय पर खींचेगा जरूर। तो सभी नम्बरवन तीव्र पुरुषार्थी आफरीन लेने वाले हो ना। नम्बरवन सम्बन्ध निभाने वाले, नम्बरवन सेवा में सबूत दिखाने वाले,सब में नम्बरवन होना ही हैं। तब तो आफरीन लेंगे ना। आफरीन ते आफरीन लेते ही रहना है। सभी की हिम्मत देख बापदादा खुश होते हैं। अनेक आत्माओं को बाप का सहारा दिलाने के लिए निमित्त बने हुए हो। अच्छे ही परिवार के परिवार हैं। परिवार को बाबा गुलदस्ताकहते हैं। यह भी विशेषता अच्छी है। वैसे तो सभी ब्राह्मणों के स्थान हैं। अगर कोई नैरोबी जायेंगे वा कहाँ भी जायेंगे तो कहेंगे हमारा सेन्टर, बाबा का सेन्टर है। हमारा परिवार है। तो कितने लकी हो गये! बापदादा हर एक रत्न को देख खुश होते। चाहे कोई भी स्थान के हैं लेकिन बाप के हैं और बाप बच्चों का है। इसलिए ब्राह्मण आत्मा अति प्रिय है। विशेष है। एक दो से जास्ती प्यारे लगते हैं। अच्छा