Avyakt murli for Thursday 3 June 1971
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03-06-71 ओम शान्ति अव्यक्त बापदादा मधुबन
निरन्तर योगयुक्त बनने के लिए कमल पुष्प का आसन
आज का दिन कौनसा है? भट्ठी का दिन है।भट्ठीके दिन को कौनसा दिवस कहते हैं? भट्ठीके आरम्भ का दिन अर्थात् जीवन के फैसले का दिन है। भट्ठीमें किस लिए आती हो? जीवन का सदाकाल के लिए फैसला करने। सभी इस लक्ष्य से आई हो? क्योंकि भट्ठीमें आने से बापदादा द्वारा वा अनन्य बच्चों द्वारा एक गिफ्ट मिलती है। वह कौनसी? जो चीज़ मिलती है, सुनाना भी सहज होता है। (दो-चार ने अपना-अपना विचार सुनाया) जो भी बातें सुनाई हैं उन सभी बातों की प्राप्ति का आधार कौनसी गिफ्ट है? वह है बुद्धि का परिवर्तन। रजोगुणी वा व्यक्त भाव की बुद्धि से बदल सतोगुणी, अव्यक्तभाव की दिव्य बुद्धि। जिस दिव्य बुद्धि की प्राप्ति से ही अव्यक्त स्थिति वा योगयुक्त स्थिति को प्राप्त कर सकते हैं। तो गिफ्ट कौनसी हुई? दिव्य सतोगुणी बुद्धि। बुद्धि के परिवर्तन से ही जीवन का परिवर्तन होता है। तो दिव्य बुद्धि की गिफ्ट विशेष भट्ठी में प्राप्त होती है। अब उस गिफ्ट को यूज करना वा सदाकाल के लिए कायम रखना - यह अपने हाथ में है। लेकिन गिफ्ट सभी को प्राप्त होती है। जो भीभट्ठीमें आये हैं दिव्य सतोगुणी बुद्धि की गिफ्ट द्वारा अपने को बहुत सहज और बहुत जल्दी परिवर्तन में ला सकते हैं। तो आज का दिन जीवन-परिवर्तन का दिन है। तो आज के दिन जो गिफ्ट प्राप्त होती है उसको धारण करते रहना। ज्ञान तो सुनती ही रही हो, लेकिन भट्ठी में क्या करने आती हो? ज्ञान-स्वरूप बनने के लिए आती हो। योग की नॉलेजवा योग का अभ्यास भी करती आई हो, लेकिन भट्ठीमें आती हो -सदा योगयुक्त होकर रहने का पाठ पक्का करने के लिए। निरन्तर योगयुक्त बनने के लिए कौनसी सहज युक्ति भट्ठीद्वारा प्राप्त करनी है? हठयोगी जो हठ या तपस्या करते हैं, तो तपस्या के समय आसन पर बैठते हैं। भिन्न-भिन्न आसन होते हैं। तो आप लोगों के लिए सदा योगयुक्त बनने के लिए कौनसा आसन है? निरन्तर योगयुक्त अवस्था सहज रहे, इसके लिए बापदादा सहज आसन बता रहे हैं। वह है कमल पुष्प का आसन। कमल- आसन कहती हो ना। देवताओं के जो चित्र बनाते हैं, तो उसमें किस पर खड़ा हुआ वा बैठा हुआ दिखाते हैं? कमल के ऊपर। तो निरन्तर कर्म करते हुए भी सहज योगयुक्त बनने के लिए सदैव कमल-आसन अर्थात् अपनी स्थिति कमल पुष्प के समान रखेंगे तो निरन्तर योगयुक्त बन जायेंगे। लेकिन कमल का पुष्प बन इस आसन पर इस स्थिति में रहने के लिए क्या करना पड़े? अपने को लाइट बनाना पड़े। हल्का भी और प्रकाश-स्वरूप भी। कमल का पुष्प कितना ज्ञानयुक्त है। कमल पुष्प को देख ज्ञान की स्मृति आती है ना। तो कमल-आसन पर विराजमान रहने से सदा योगयुक्त बन सकती हो। आसन कभी भी नहीं छोड़ो। यह कमल पुष्प समान स्थिति का आसन सदा कायम रखना अर्थात् इस पर सदा स्थित रहना है। तब भविष्य में भी राज्य-सिंहासन इतना ही समय कायम रहेगा। अगर इस आसन पर नहीं बैठ सकती हो अर्थात् इस स्थिति में स्थित नहीं हो सकती तो सिंहासन को भी प्राप्त नहीं कर सकेंगी। तो राज-सिंहासन प्राप्त करने के लिए पहले कमल-आसन पर स्थित रहने का अभ्यास करना पड़े। भट्ठीमें आये हो अपने को सभी प्रकार के बन्धन से मुक्त कर हल्का बनाने के लिए वा सदा कमल पुष्प की स्थिति में स्थित होने के आसन पर विराजमान रहने का अभ्यास सीखने के लिए। तो जो भी बोझ हो वह सभी प्रकार का बोझ भट्ठी में खत्म करके जाना। चाहे मन के संकल्पों का बोझ हो, चाहे संस्कारों का बोझ हो, चाहे दुनिया की कोई भी विनाशी चीजों प्रति आकर्षितहोने का बोझ हो, चाहे लौकिक सम्बन्धी की ममता का बोझ है, सभी प्रकार के बोझ कहो वा बन्धन कहो, उन्हों को खत्म करने के लिएभट्ठीमें आये हो। अभी अपने जीवन की उन्नति का गोल्डन चान्स यह भट्ठी है। इस चान्स में जो जितना चान्स लेते हैं उतना ही सदाकाल के लिए अपने जीवन को आगे बढ़ा सकेंगे। भट्ठीमें कौनसा लक्ष्य रखकर आई हो? संस्कारों को परिवर्तन में लाकर फिर क्या बनने का लक्ष्यरखा है? यह ग्रुप विशेष किस बात में सभी ग्रुप से अच्छा है, यह मालूम है? इस ग्रुप की एक बहुत अच्छी विशेषता है। गोल्ड में जब खाद डाली जाती है, तो उसके बाद गोल्ड को मोल्ड नहीं कर सकते हैं। ओरीजनल गोल्ड होता है तो उसको मोल्ड कर सकते हैं। तो ऐसे समझें कि यह सच्चा सोना है, इनमें कोई खाद नहीं है। आप लोग अपनी विशेषता को जानती हो? इस ग्रुप को देखकर ऐसे लगता है जैसे जब वृक्ष नया लगाया जाता है तो पहले बहुत कोमल, सुन्दर छोटे-छोटे पत्ते निकलते हैं, जो बहुत प्रिय लगते हैं। तो यह ग्रुप भी नये पत्ते हैं लेकिन कोमल हैं। कोमल और सख्त चीज़ें होती हैं ना। कोमल अर्थात् संस्कारों की हड्डियॉं इतनी सख्त नहीं हैं जो चेंज नहीं हो सकें। छोटे बच्चे की हड्डियां पहले कोमल होती हैं, फिर जैसे-जैसे बड़े होते हैं तो सख्त होती जाती हैं। यह ग्रुप भी कोमल संस्कारों वाला है। इन संस्कारों को परिवर्तन करना सहज हो जायेगा। कड़े संस्कारों वाले तो नहीं हो ना।
(दादी जी दो दिन के लिए मद्राससर्विसपर जाने लिए बापदादा से छुट्टी ले रही हैं)
जो विश्व के राजे बनने वाले हैं उन्हों की विशेषता यह है - सर्व आत्माओं को राज़ी रखना। महारथियों के कदम-कदम में पद्मों की कमाई रहती है। (सीता माता भी छुट्टी ले रही है) अपने को समर्थ आत्मा समझ इस शरीर को देख रही हो? साक्षी अवस्था की स्थिति में स्थित होने से शक्ति मिलती है। जैसे कोई कमजोर होता है तो उनको शक्ति भरने के लिए ग्लूकोज़ चढ़ाते हैं। तो जब अपने को शरीर से परे अशरीरी आत्मा समझते हैं तो यह साक्षीपन की अवस्था शक्ति भरने का काम करती है। और जितना समय साक्षी अवस्था की स्थिति रहती है उतना ही बाप साथी भी याद रहता है अर्थात् साथ रहता है। तो साथ भी है और साक्षी भी है। एक साक्षीपन की शक्ति, दूसरा बाप के साथी बनने की खुशी की खुराक। तो बताओ फिर क्या बन जायेंगी? निरोगी। शक्ति रूप न्यारी और प्यारी। इस समय ऐसी न्यारी और प्यारी स्थिति में स्थित हो? यह स्थिति इतनी पावरफुल है - जैसे डॉक्टर लोग बिजली की रेजेज देते हैं कीटाणु मारने के लिए। तो यह स्थिति भी ऐसी पावरफुल है जो एक सेकेण्ड में अनेक विकर्मों रूपी कीटाणु भस्म हो जाते हैं। विकर्म भस्म हो गये तो फिर अपने को हल्का और शक्तिशाली अनुभव करेंगे। सदैव प्रवृत्ति को भीसर्विसभूमि समझना चाहिए। अपने को बापदादा के अति प्रिय समझती हो। क्यों? ऐसी क्या विशेषता है जो अति प्रिय हो। एक बाप दूसरा न कोई। ऐसे एक के ही लगन में रहने वाले बाप को अति प्रिय हैं। समझा? अच्छा।