Avyakt murli for Monday 18 February 1985
Saving in progress..
You can now read this murli without Internet.
You can read this murli without Internet.
in order to be able to read it without internet.
Warning : Sentence alignment between two languages is based on the number of characters. It is therefore not perfectly reliable.
You can correct the sentence alignment yourself on part or all of the murli.
0>
118-02-85ओम शान्ति अव्यक्त बापदादामधुबन
2संगमयुग तन-मन-धन और समय सफल करने का युग
3विश्व कल्याणकारी बापदादा सफलतामूर्त बच्चों प्रति बोले 4आज विश्व-कल्याणकारी बाप अपने सहयोगी बच्चों को देख रहे हैं। 5हर एक बच्चे की दिल में बाप को प्रत्यक्ष करने की लगन लगी हुई है। 6सभी का एक ही श्रेष्ठ संकल्प है और सभी इसी कार्य में उमंग-उत्साह से लगे हुए हैं।
0> > 18-02-85 Om Shanti Avyakt Bapdada Madhuban
7एक बाप से लगन होने कारण सेवा से भी लगन लगी हुई है।
8दिन-रात साकार कर्म में वा स्वप्न में भी बाप और सेवा यही दिखाई देता है। 9बाप का सेवा से प्यार है इसलिए स्नेही सहयोगी बच्चों का भी प्यार सेवा से अच्छा है। 10यह स्नेह का सबूत है अर्थात् प्रमाण है। 11ऐसे सहयोगी बच्चों को देख बापदादा भी हर्षित होते हैं।
1The Confluence Age is the age for receiving muti-million return for one.
12अपना तन-मन-धन, समय कितना प्यार से सफल कर रहे हैं। 13पाप के खाते से बदल पुण्य के खाते में वर्तमान भी श्रेष्ठ और भविष्य में भी जमा कर रहे हैं। 14संगमयुग है ही एक का पद्मगुणा जमा करने का युग। 15तन सेवा में लगाओ और 21जन्मों के लिए सम्पूर्ण निरोगी तन प्राप्त करो।
2Use your body in service and receive a totally healthy body for 21 births.
16कैसा भी कमज़ोर तन हो, रोगी हो लेकिन वाचा-कर्मणा नहीं तो मंसा सेवा अन्तिम घड़ी तक भी कर सकते हो। 17अपने अतीन्द्रिय सुख-शान्ति की शक्ति चेहरे से,नयनों से दिखा सकते हो। 18जो सम्पर्क वाले देखकर यही कहें कि यह तो वण्डरफुल पेशेन्ट है। 19डाक्टर्स भी पेशेन्ट को देख हर्षित हो जाएँ।
3No matter how sick or weak your body may be, even if you are not able to do service through speech, yo can do service through your mind, even to your last breath and last moment.
20वैसे तो डाक्टर्स पेशेन्ट को खुशी देते हैं,दिलाते हैं लेकिन यह देने के बजाए लेने का अनुभव करें। 21कैसे भी बीमार हो अगर दिव्य-बुद्धि सालिम है तो अन्त घड़ी तक भी सेवा कर सकते हैं। 22क्योंकि यह जानते हो कि इस तन की सेवा का फल 21 जन्म खाते रहेंगे। 23ऐसे तन से, मन से-स्वयं सदा मन के शान्ति स्वरूप बन, सदा हर संकल्प में शक्तिशाली बन,शुभ भावना शुभ कामना द्वारा, दाता बन सुख-शान्ति के शक्ति की किरणें वायुमण्डल में फैलाते रहो।
4You can reflect the power of supersensuous joy through your face and eyes, so that people say “this is a wonderful patient”.
24जब आपकी रचना सूर्य चारों ओर प्रकाश की किरणें फैलाते रहते हैं तो आप मास्टर रचता, मास्टर सर्वशक्तिवान,विधाता,वरदाता,भाग्यवान,प्राप्ति की किरणें नहीं फैला सकते हो? 25संकल्प शक्ति अर्थात् मन द्वारा एक स्थान पर होते हुए भी चारों ओर वायब्रेशन द्वारा वायुमण्डल बना सकते हो। 26थोड़े से समय की इस जन्म में मन द्वारा सेवा करने से 21 जन्म मन सदा सुख-शान्ति की मौज में होगा। 27लेकिन आधाकल्प भक्ति द्वारा,चित्रों द्वारा मन की शान्ति देने के निमित्त बनेंगे।
5Even the doctor is cheered on seeing the patient.
28चित्र भी इतना शान्ति का, शक्ति का देने वाला बनेगा। 29तो एक जन्म के मन की सेवा सारा कल्प चैतन्य स्वरूप से वा चित्र से शान्ति का स्वरूप बनेगा। 30ऐसे धन द्वारा सेवा के निमित्त बनने वाले 21 जन्म अनगिनत धन के मालिक बन जाते हैं। 31साथ-साथ द्वापर से अब तक भी ऐसे आत्मा कभी धन की भिखारी नहीं बनेंगी।
6Usually the doctor has to cheer up the patient, but here instead of giving happiness they receive it.
3221जन्म राज्य भाग्य पायेंगे।
33जो धन मिट्टी के समान होगा।
34अर्थात् इतना सहज और अकीचार होगा। 35आपकी प्रजा की भी प्रजा अर्थात् प्रजा के सेवाधारी भी अनगिनत धन के मालिक होंगे। 36लेकिन63 जन्मों में किसी जन्म में भी धन के भिखारी नहीं बनेंगे। 37मजे से दाल-रोटी खाने वाले होंगे।
7With your constantly powerful mind, become the bestower of peaceful vibrations, through powerful and benevolent thoughts.
38कभी रोटी के भिखारी नहीं होंगे।
39तो एक जन्म दाता के प्रति धन लगाने से,दाता भी क्या करेगा?
40सेवा में लगायेगा।
41आप तो बाप के भण्डारी में डालते हो ना और बाप फिर सेवा में लगाते हैं।
42तो सेवा अर्थ वा दाता के अर्थ धन लगाना अर्थात् पूरा कल्प भिखारी पन से बचना। 43जितना लगाओ उतना द्वापर से कलियुग तक भी आराम से खाते रहेंगे। 44तो तन-मन-धन और समय सफल करना है। 45समय लगाने वाले, एक तो सृष्टि चक्र के सबसे श्रेष्ठ समय - सतयुग में आते हैं।
8You can spread rays in the atmosphere.
46सतोप्रधान युग में आते हैं।
47जिस समय का भक्त लोग अब भी गायन करते रहते हैं।
48स्वर्ग का गायन करते हैं ना।
49तो सतोप्रधान में भी वन-वन-वन ऐसे समय पर अर्थात् सतयुग के पहले जन्म में, ऐसे श्रेष्ठ समय का अधिकार पाने वाले, पहले नम्बर वाली आत्मा के साथ-साथ जीवन का समय बिताने वाले होंगे। 50उनके साथ पढ़ने वाले,खेलने वाले,घूमने वाले होंगे। 51तो जो संगम पर अपना समय सफल करते हैं उसका श्रेष्ठ फल सम्पूर्ण सुनहरे, श्रेष्ठ समय का अधिकार प्राप्त होता है। 52अगर समय लगाने में अलबेले रहे तो पहले नम्बर वाली आत्मा अर्थात् श्रीकृष्ण स्वरूप में स्वर्ग के पहले वर्ष में न आकर पीछे-पीछे नम्बरवार आयेंगे।
9Your creation, the sun, spreads rays of light, so can’t you, the master creator, spread rays of peace?
53यह है समय देने का महत्व।
54देते क्या हो और लेते क्या हो?
55इसलिए चारों ही बातों को सदा चेक करो तन-मन-धन,समय चारों ही जितना लगा सकते हैं उतना लगाते हैं?
56ऐसे तो नहीं जितना लगा सकते उतना नहीं लगाते?
57यथाशक्ति लगाने से प्राप्ति भी यथाशक्ति होगी।
58सम्पूर्ण नहीं होगी।
59आप ब्राह्मण आत्मायें सभी को सन्देश में क्या कहती हो?
60सम्पूर्ण सुख-शान्ति आपका जन्म सिद्ध अधिकार है।
61यह तो नहीं कहते हो यथा शक्ति आपका अधिकार है।
62सम्पूर्ण कहते हो ना।
63जब सम्पूर्ण अधिकार है तो सम्पूर्ण प्राप्ति करना ही ब्राह्मण जीवन है।
64अधूरा है तो क्षत्रिय है।
65चन्द्रवंशी आधे में आते हैं ना।
66तो यथा शक्ति अर्थात् अधूरापन और ब्राह्मण जीवन अर्थात् हर बात में सम्पूर्ण।
67तो समझा, बापदादा बच्चों के सहयोग देने का चार्ट देख रहे थे।
68हैं सब सहयोगी।
69जब सहयोगी बने हैं तब सहज योगी बने हैं।
70सभी सहयोगी, सहजयोगी,श्रेष्ठ आत्मायें हों।
71बापदादा हर एक बच्चे को सम्पूर्ण अधिकारी आत्मा बनाते हैं।
72फिर यथाशक्ति क्यों बनते हो?
73वा यह सोचते हो - कोई तो बनेगा!
74ऐसे बनने वाले बहुत हैं।
75आप नहीं हो।
76अभी भी सम्पूर्ण अधिकार पाने का समय है।
77सुनाया था ना - अभी टूलेट का बोर्ड नहीं लगा।
78लेट अर्थात् पीछे आने वाले आगे बढ़ सकते हैं।
79इसलिए अभी भी गोल्डन चांस है।
80जब टूलेट का बोर्ड लग जायेगा फिर गोल्डन चांस के बजाए सिल्वर चांस हो जायेगा।
81तो क्या करना चाहिए?
82गोल्डन चांस लेने वाले हो ना।
83गोल्डन एज में न आये तो ब्राह्मण बन करके क्या किया?
84इसलिए बापदादा स्नेही बच्चों को फिर भी स्मृति दिला रहे हैं,अभी बाप के स्नेह कारण एक का पद्मगुणा मिलने का चांस है।
85अभी जितना और उतना नहीं है।
86एक का पद्मगुणा है।
87फिर हिसाब-किताब जितना और उतने का रहेगा।
88लेकिन अभी भोलेनाथ के भरपूर भण्डार खुले हुए हैं।
89जितने चाहो,जितना चाहो ले सकते हो।
90फिर कहेंगे अभी सतयुग के नम्बरवन की सीट खाली नहीं।
91इसलिए बाप समान सम्पूर्ण बनो।
92महत्व को जान महान बनो।
93डबल विदेशी गोल्डन चांस वाले हो ना!
94जब इतनी लगन से बढ़ रहे हो, स्नेही हो, सहयोगी हो तो हर बात में सम्पूर्ण लक्ष्य द्वारा सम्पूर्णता के लक्षण धारण करो।
95लगन न होती तो यहाँ कैसे पहुँचते!
96जैसे उड़ते-उड़ते पहुँच गये हो ऐसे ही सदा उड़ती कला में उड़ते रहो।
97शरीर से भी उड़ने के अभ्यासी हों।
98आत्मा भी सदा उड़ती रहे।
99यही बापदादा का स्नेह है।
100अच्छा
101सदा सफलता स्वरूप बन संकल्प, समय को सफल करने वाले, हर कर्म में सेवा का उमंग-उत्साह रखने वाले, सदा स्वयं को सम्पन्न बनाए सम्पूर्ण अधिकार पाने वाले, मिले हुए गोल्डन चांस को सदा लेने वाले, ऐसे फॉलो फादर करने वाले सपूत बच्चों को, नम्बरवन बच्चों को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते।
102
103काठमाण्डू तथा विदेशी भाई-बहिनों के ग्रुप से बापदादा की पर्सनल मुलाकात - (1) सभी सदा अपने को विशेष आत्मायें अनुभव करते हो?
104सारे विश्व में ऐसी विशेष आत्मायें कितनी होंगी?
105जो कोटों में कोई गायन है, वह कौन हैं?
106आप हो ना!
107तो सदा अपने को कोटों में कोई, कोई में भी कोई ऐसी श्रेष्ठ आत्मायें समझते हो? 108कभी स्वप्न में भी ऐसा नहीं सोचा होगा कि इतनी श्रेष्ठ आत्मा बनेंगे लेकिन साकार रूप में अनुभव कर रहे हो। 109तो सदा अपना यह श्रेष्ठ भाग्य स्मृति में रहता है? 110वाह मेरा श्रेष्ठ भाग्य।
10Service done in this life, for just a short time, brings the reward for 21 births.
111जो भगवान ने खुद आपका भाग्य बनाया है।
112डायरेक्ट भगवान ने भाग्य की लकीर खींची, ऐसा श्रेष्ठ भाग्य है। 113जब यह श्रेष्ठ भाग्य स्मृति में रहता है तो खुशी में बुद्धि रूपी पाँव इस पृथ्वी पर नहीं रहते। 114ऐसे समझते हो ना। 115वैसे भी फरिश्तों के पाँव धरनी पर नहीं होते।
11You will remain ever happy and peaceful.
116सदा ऊपर।
117तो आपके बुद्धि रूपी पाँव कहाँ रहते हैं?
118नीचे धरनी पर नहीं।
119देह- अभिमान भी धरनी है।
120देह-अभिमान की धरनी से ऊपर रहने वाले।
121इसको ही कहा जाता है - फरिश्ता।
122तो कितने टाइटिल हैं - भाग्यवान हैं,फरिश्ते हैं, सिकीलधे हैं - जो भी श्रेष्ठ टाइटिल हैं वह सब आपके हैं।
123तो इसी खुशी में नाचते रहो।
124सिकीलधे धरती पर पाँव नहीं रखते, सदा झूले में रहते।
125क्योंकि नीचे धरनी पर रहने के अभ्यासी तो 63 जन्म रहे।
126उसका अनुभव करके देख लिया।
127धरनी में मिट्टी में रहने से मैले हो गये।
128और अभी सिकीलधे बने तो सदा धरनी से ऊपर रहना।
129मैले नहीं, सदा स्वच्छ।
130सच्ची दिल, साफ दिल वाले बच्चे सदा बाप के साथ रहते हैं।
131क्योंकि बाप भी सदा स्वच्छ है ना।
132तो बाप के साथ रहने वाले भी सदा स्वच्छ हैं।
133बहुत अच्छा, मिलन मेले में पहुँच गये।
134लगन ने मिलन मनाने के लिए पहुँचा ही दिया। 135बापदादा बच्चों को देख खुश होते हैं क्योंकि बच्चे नहीं तो बाप भी अकेला क्या करेगा? 136भले पधारे अपने घर में। 137भक्त लोग यात्रा पर निकलते तो कितना कठिन रास्ते क्रास करते हैं।
12And then, for the rest of the kalpa, you will become instruments to give peace of mind, through your statues.
138आप तो काठमाण्डू से बस में आये हो।
139मौज मनाते हुए पहुँच गये।
140अच्छा
141लण्डन ग्रुप - सभी स्नेह के सूत्र में बंधे हुए बाप के माला के मणके हो ना!
142माला का इतना महत्व क्यों बना है? 143क्योंकि स्नेह का सूत्र सबसे श्रेष्ठ सूत्र है। 144तो स्नेह के सूत्र में सब एक बाप के बने हैं, इसका यादगार माला है। 145जिसका एक बाप दूसरा न कोई है वही एक ही स्नेह के सूत्र में माला के मणके बन पिरोये जाते हैं।
13And neither you nor your subjects will never become beggars for wealth.
146सूत्र एक है और दाने अनेक हैं।
147तो यह एक बाप के स्नेह की निशानी है।
148तो ऐसे अपने को माला के मणके समझते हो ना।
149यह समझते हो 108 में तो बहुत थोड़े आयेंगे।
150क्या समझते हो?
151यह तो 108का नम्बर निमित्त मात्र है।
152जो भी बाप के स्नेह में समाये हुए हैं वह गले की माला के मोती हैं ही।
153जो ऐसे एक ही लगन में मगन रहने वाले हैं तो मगन अवस्था निर्विघ्न बनाती है और निर्विघ्न आत्माओं का ही गायन और पूजन होता है।
154सबसे ज्यादा गायन कौन करता है?
155बाप करता है ना!
156आप सभी एक बाप का गायन करते और बाप कितनों का करता?
157तो सबसे ज्यादा कौन करता?
158अगर एक बच्चे का भी गायन न करे तो बच्चा रूठ जायेगा।
159इसलिए बाबा हरेक बच्चे का गायन करते हैं।
160क्योंकि हरेक बच्चा अपना अधिकार समझता है।
161अधिकार के कारण हरेक अपना हक समझता है। 162बाप की गति इतनी फास्ट है जो और कोई इतनी फास्ट स्पीड वाला है ही नहीं। 163एक ही सेकण्ड में अनेकों को राजी कर सकता है। 164तो बाप बच्चों से बिजी रहते और बच्चे बाप में बिजी रहते।
14Those who make best use of their time at the Confluence Age will come into the Golden Age with the soul who becomes number one, Sri Krishna, and spend their time then with him.
165बाप को बिजनेस ही बच्चों का है।
166अविनाशी रत्न बने हो -इसकी मुबारक हो।
16710 साल या 15 साल से माया से जीते रहे हो - इसकी मुबारक हो।
168आगे संगमयुग पूरा ही जीते रहो।
169सभी पक्के हो।
170इसलिए बापदादा ऐसे पक्के अचल बच्चों को देख खुश हैं। 171हरेक बच्चे की विशेषता ने बाप का बनाया है, ऐसा कोई बच्चा नहीं जिसमें विशेषता न हो। 172इसलिए बापदादा हरेक बच्चे की विशेषता देख सदा खुश होते हैं। 173नहीं तो कोटों में कोई,कोई में कोई,आप ही क्यों बनें!
15You study with him, play with him, and go on tour with him.
174जरूर कोई विशेषता है।
175कोई कौन सा रत्न है,कोई कौन सा?
176भिन्न-भिन्न विशेषताओं के9 रत्न गाये हुए हैं।
177हरेक रत्न विशेष विघ्न-विनाशक होता है।
178तो आप सभी भी विघ्न-विनाशक हो।
179विदेशी भाई-बहिनों के याद प्यार तथा पत्रों का रेसपाण्ड देते हुए 180सभी स्नेही बच्चों का स्नेह पाया। 181सभी के दिल के उमंग और उत्साह बाप के पास पहुँचते हैं और जैसे उमंग उत्साह से आगे बढ़ रहे हैं - सदा आगे बढ़ने वाले बच्चों के ऊपर बापदादा और परिवार की विशेष ब्लेसिंग है। 182इसी ब्लेसिंग द्वारा आगे बढ़ते रहेंगे और दूसरों को भी आगे बढ़ाते रहेंगे।
16Brahmin life means to claim all rights.
183अच्छी सेवा में रेस कर रहे हो।
184जैसे उमंग-उत्साह में रेस कर रहे हो ऐसे अविनाशी उन्नति को पाते रहना। 185तो अच्छा नम्बर आगे ले लेंगे। 186सभी अपने नाम, विशेषता से याद स्वीकार करना। 187अभी भी सभी बच्चे अपनी-अपनी विशेषता से बापदादा के सम्मुख हैं।
17If you claim incomplete rights, you are warriors, of the Moon Dynasty, who come half way through heaven.
188इसलिए पद्मगुणा यादप्यार।
189दादी चन्द्रमणि जी ने पंजाब जाने की छुट्टी ली -सभी बच्चों को यादप्यार भी देना और विशेष सन्देश देना कि उड़ती कला में जाएं। 190औरों को उड़ाने के लिए समर्थ स्वरूप धारण करो। 191कैसे भी वातावरण में उड़ती कला द्वारा अनेक आत्माओं को उड़ाने का अनुभव करा सकते हो। 192इसलिए सभी को, याद और सेवा सदा साथ-साथ चलती रहे, यह विशेष स्मृति दिलाना।
18It is not too late yet to claim your complete rights.
193बाकी तो सभी सिकिलधे हैं।
194अच्छी विशेषता वाली आत्मायें हैं।
195सभी को अपनी-अपनी विशेषता से याद प्यार स्वीकार हो।
196अच्छा है डबल पार्ट बजा रही हो।
197बेहद के आत्माओं की यही निशानी है - जिस समय जहाँ आवश्यकता है,वहाँ पहुँचना।
198अच्छा-
199युगलों के साथ - अव्यक्त बापदादा की मुलाकात (1) प्रवृत्ति में रहते सर्व बंधनों से न्यारे और बाप के प्यारे हो ना?
200फंसे हुए तो नहीं हो?
201पिंजड़े के पंछी तो नहीं,उड़ते पंछी हो ना!
202जरा भी बंधन फँसा लेता है।
203बंधनमुक्त हैं तो सदा उड़ते रहेंगे।
204तो किसी भी प्रकार का बंधन नहीं।
205न देह का, न संबंध का, न प्रवृत्ति का,न पदार्थ का।
206कोई भी बंधन न हो इसको कहा जाता है - न्यारा और प्यारा। 207स्वतन्त्र सदा उड़ती कला में होंगे और परतन्त्र थोड़ा उड़ेंगे भी फिर बंधन उसको खींच कर नीचे ले आयेगा। 208तो कभी नीचे, कभी ऊपर, टाइम चला जायेगा। 209सदा एकरस उड़ती कला की अवस्था और कभी नीचे,कभी ऊपर यह अवस्था, दोनों में रात-दिन का अन्तर है।
19When the “too late” board is put up, then instead of a golden chance you will have only a silver chance.
210आप कौन-सी अवस्था वाले हो?
211सदा निर्बन्धन,सदा स्वतन्त्र पंछी?
212सदा बाप के साथ रहने वाले?
213किसी भी आकर्षण में आकर्षित होने वाले नहीं।
214वही जीवन प्यारी है।
215जो बाप के प्यारे बनते उनकी जीवन सदा प्यारी बनती।
216खिट-खिट वाली जीवन नहीं।
217आज यह हुआ, कल यह हुआ, नहीं।
218लेकिन सदा बाप के साथ रहने वाले,एकरस स्थिति में रहने वाले।
219वह है मौज की जीवन।
220मौज में नहीं होंगे तो मूँझेंगे जरूर।
221आज यह प्राब्लम आ गई,कल दूसरी आ गई, यह दुःखधाम की बातें दुःखधाम में तो आयेंगी ही लेकिन हम संगमयुगी ब्राह्मण हैं तो दुःख नीचे रह जायेगा।
222दुःखधाम से किनारा कर लिया तो दुःख दिखाई देते भी आपको स्पर्श नहीं करेगा। 223कलियुग को छोड़ दिया, किनारा छोड़ चुके, अब संगमयुग पर पहुँचे तो संगम सदा ऊँचा दिखाते हैं। 224संगमयुगी आत्मायें भी सदा ऊँची, नीचे वाली नहीं। 225जब बाप उड़ाने के लिए आये हैं तो उड़ती कला से नीचे आयें ही क्यों!
20All of you are the ones who will take the golden chance.
226नीचे आना माना फँसना।
227अब पंख मिले हैं तो उड़ते रहो, नीचे आओ ही नहीं।
228अच्छा!
229अधरकुमारों से - सभी एक ही लगन में मगन रहने वाले हो ना?
230एक बाप दूसरे हम, तीसरा न कोई।
231इसको कहा जाता है लगन में मगन रहने वाले।
232मैं और मेरा बाबा।
233इसके सिवाए और भी कोई मेरा है?
234मेरा बच्चा,मेरा पोत्रा…ऐसे तो नहीं।
235मेरेमें ममता रहती है।
236मेरा-पन समाप्त होना अर्थात् ममता समाप्त होना।
237तो सारी ममता यानी मोह बाप में हो गया।
238तो बदल गया, शुद्ध मोह हो गया।
239बाप सदा शुद्ध है तो मोह बदलकर प्यार हो गया।
240एक मेरा बाबा, इस एक मेरे से सब समाप्त हो जाता और एक की याद सहज हो जाती।
241इसलिए सदा सहजयोगी।
242मैं श्रेष्ठ आत्मा और मेरा बाबा बस!
243श्रेष्ठ आत्मा समझने से श्रेष्ठ कर्म स्वतः होंगे,श्रेष्ठ आत्मा के आगे माया आ नहीं सकती। 244माताओं से - मातायें सदा बाप के साथ खुशी के झूले में झूलने वाली हैं ना! 245गोप गोपियाँ सदा खुशी में नाचते या झूले में झूलते। 246तो सदा बाप के साथ रहने वाले खुशी में नाचते हैं।
21Let the soul keep flying all the time.
247बाप साथ है तो सर्वशक्तियाँ भी साथ हैं।
248बाप का साथ शक्तिशाली बना देता।
249बाप के साथ वाले सदा निर्मोही होते, उन्हें किसी का मोह सतायेगा नहीं।
250तो नष्टोमोहा हो?
251कैसी भी परिस्थिति आवे लेकिन हर परिस्थिति में नष्टोमोहा। 252जितना नष्टमोहा होंगी उतना याद और सेवा में आगे बढ़ती रहेंगी। 253मधुबन में आये हुए सेवाधारियों से - सेवा का खाता जमा हो गया ना। 254अभी भी मधुबन के वातावरण में शक्तिशाली स्थिति बनाने का चांस मिला और आगे के लिए भी जमा किया।
22Achcha.
255तो डबल प्राप्ति हो गई।
256यज्ञ सेवा अर्थात् श्रेष्ठ सेवा, श्रेष्ठ स्थिति में रहकर करने से पद्मगुणा फल बन जाता है। 257कोई भी सेवा करो, पहले यह देखो कि शक्तिशाली स्थिति में स्थित हो सेवाधारी बन सेवा कर रहे हैं? 258साधारण सेवाधारी नहीं, रूहानी सेवाधारी। 259रूहानी सेवाधारी की रूहानी झलक,रूहानी फलक सदा इमर्ज रूप में होनी चाहिए।
23To those who are the embodiments of zeal, and who make their time and thoughts successful; those who make themselves complete and become worthy to claim all rights; those who take the golden opportunities, the souls who follow the father and become number one; love, namaste, and yaad pyar from BapDada to such worthy children.
260रोटी बेलते भी स्वदर्शन चक्र चलता रहे।
261लौकिक निमित्त स्थूल कार्य लेकिन स्थूल सूक्ष्म दोनों साथ-साथ,हाथ से स्थूल काम करो और बुद्धि से मंसा सेवा करो तो डबल हो जायेगा। 262हाथ द्वारा कर्म करते हुए भी याद की शक्ति से एक स्थान पर रहते भी,बहुत सेवा कर सकते हो। 263मधुबन तो वैसे भी लाइट हाउस है, लाइट हाउस एक स्थान पर स्थित हो,चारों ओर सेवा करता है। 264ऐसे सेवाधारी अपनी और दूसरों की बहुत श्रेष्ठ प्रालब्ध बना सकते हैं।
24* * * O M S H A N T I* * *
265अच्छा ओम शान्ति।