Avyakt murli for Tuesday 31 December 2019
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> 31-12-19 ओम् शान्ति ''दिनचर्या'' मधुबन
प्राणप्यारे अव्यक्तमूर्त मात-पिता बापदादा के अति लाडले, सदा परिवर्तन शक्ति द्वारा हर निगेटिव को पॉज़िटिव में परिवर्तन करने वाले, बाप समान ब्रह्मण सो फरिश्ता स्वरूप में स्थित रहने वाली निमित्त टीचर्स बहिनें तथा देश विदेश के सर्व ब्रह्मण कुल भूषण भाई बहिनें,
ईश्वरीय स्नेह सम्पन्न मधुर याद के साथ-साथ नये वर्ष की, नये युग के आगमन की बहुत-बहुत बधाईयां स्वीकार हो।
बाद समाचार - कल नया वर्ष 2020 प्रारम्भ हो रहा है। प्यारा बाबा कहते बच्चे, नये वर्ष में कुछ ऐसी नवींनता सम्पन्न सेवा करो जो सहज बाप की प्रत्यक्षता हो जाए। एक ओर जयजयकार, दूसरी ओर हाहाकार… अभी तो ऐसा ही समय समीप दिखाई दे रहा है। अव्यक्त मास में तो चारों ओर विशेष तपस्या की बहुत अच्छी लहर है। सब तरफ योग तपस्या की भिùयां चल रही हैं। हर एक बाप समान बनने के पुरुषार्थ को लक्ष्य में रख डबल लाइट रह उड़ती कला में उड़ रहे हैं। मधुबन से जो विशेष पुरुषार्थ की प्वाइंटस भेजी गई हैं उसी अनुसार सभी अच्छी रेस कर रहे हैं। अब तो बाबा यही चाहते हैं कि बच्चे हर सेकण्ड, हर श्वांस, हर खजाने को सफल कर सफलता मूर्त बनें। अचानक के पाठ को सदा स्मृति में रखते हुए एवररेडी रहें। सभी खजानों से भरपूर बन सम्पर्क-सम्बन्ध में आने वाली आत्माओंको दान करते, दानी और वरदानी बनें। सदा मुस्कराते हुए सबको कोई न कोई गिफ्ट देते रहें।
बोलो, ऐसा ही लक्ष्य रख तीव्र पुरुषार्थ चल रहा है ना! इस नये वर्ष में हर एक को कोई न कोई नवीनता सम्पन्न पुरुषार्थ और सेवायें करनी ही हैं।
इस सीज़न में बापदादा की इस वरदान भूमि में आकर, उनकी आकारी और निराकारी रूप की पालना के बहुत अच्छे-अच्छे अनुभव सभी कर रहे हैं। अभी तो पंजाब ज़ोन की सेवाओंका टर्न है और भी देश विदेश के कई ग्रुप नया वर्ष मनाने के लिए मधुबन में पहुंचे हुए हैं। करीब 20 हजार भाई बहिनों का संगठन है। डबल विदेशी बाबा के बच्चों की तो सदा ही रिमझिम रहती है। देखो, हम सबकी अति मीठी, सबको अपने स्नेह की पालना देने वाली दादी जानकी जी का 104 वां जन्म दिन भी कल पहली जनवरी को हम सब खूब धूमधाम से मनायेंगे, दादी जी को हम सभी यही दुआयें देते कि जब तक संगमयुग है तब तक दादी जी हम सबके साथ रहकर सदा ऐसे ही गुणदान, ज्ञान दान करते सबकी पालना करती रहें। सदा स्वस्थ रहें। इस समय हमारी मुख्य 4 दादियां हमारे इस पूरे ब्रह्मण परिवार का श्रंगार हैं। हमारी मीठी गुल्जार दादी तो सदा ही दादी जानकी जी के साथ-साथ हर ब्रह्मण आत्मा के दिल में बसती हैं। फिर हैं हमारी मीठी दादी रतनमोहनी जी और ईशू दादी जी, जो समय प्रति समय सभी को ज्ञान रत्नों से सजाते, अपनी वरदानी मूर्त से सबको स्नेह सम्पन्न पालना दे रही हैं। सभी दादियों की ओर से, बड़े भाईयों की ओर से सबको नये वर्ष की उमंग-उत्साह भरी बहुत-बहुत बधाईयां स्वीकार हों। अच्छा - सभी को बहुत-बहुत याद… ओम् शान्ति।
31-12-19 ओम् शान्ति “अव्यक्त बापदादा” वीडियो 31-12-08 मधुबन
“इस नये वर्ष में परिवर्तन शक्ति के वरदान द्वारा निगेटिव को पॉजिटव में परिवर्तन कर, संकल्प, श्वांस समय को सफल करो, सफलतामूर्त बनो”
आज नव जीवन देने वाले बाप अपने चारों ओर के नव जीवन धारण करने वाले बच्चों को देख हर्षित हो रहे हैं। यह नव जीवन है ही नव युग बनाने के लिए। लोग नव वर्ष मनाते हैं और आप सभी नव जीवन वाले बच्चे सभी आत्माओं को बधाईयां भी देते हो और साथ में यही खुशखबरी देते हो कि नव युग आया कि आया। आप सभी बच्चों को तो बाप ने वर्से के रूप में गोल्डन दुनिया की गिफ्ट दे दी है। जिस गोल्डन दुनिया में अनेक गोल्डन सौगातें है ही हैं। आप सभी को यही नशा है ना कि यह गोल्डन दुनिया की सौगात तो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है। आज की दुनिया में कोई किसको कितनी भी बड़े ते बड़ी सौगात दे, तो बड़े ते बड़ा क्या देंगे! ताज वा तख्त। लेकिन आपके गोल्डन दुनिया की गिफ्ट के आगे वह क्या चीज़ है? कोई बड़ी चीज़ है! आपके दिल में खुशी है कि हमारे बाप ने हमें सबसे ऊंचे ते ऊंची नव युग की गिफ्ट दे दी है। निश्चय है और निश्चित है। यह भावी कोई टाल नहीं सकता। यह अटल निश्चय सदा स्मृति में रहता है! सदा रहता है वा कभी-कभी कम हो जाता है? जन्म सिद्ध अधिकार है तो जन्म सिद्ध अधिकार कभी टल नहीं सकता।
आज आप सभी अलग-अलग स्थानों से नया वर्ष मनाने आये हो। तो इस नये वर्ष का लक्ष्य क्या रखा है? इस नये वर्ष में क्या विशेष करना है? इस नये वर्ष की विशेषता है कि बाप समान सम्पन्न और सम्पूर्ण बनना ही है। कुछ भी पुरुषार्थ करना पड़े लेकिन निश्चित है कि बाप समान बनना ही है। बोलो, सबके मन में यही पक्का संकल्प है ना! है? कांध हिलाओ। बाप भी यही चाहते हैं कि हर एक बच्चा बाप समान बने। बाप तो बाप है लेकिन बच्चे बाप से भी ऊंचे हैं। तो बाप समान बनने के लक्ष्य को पूरा करने के लिए बाप को फालो करना पड़े। सोचो, बाप, ब्रह्मा बाप सम्पूर्ण कैसे बना? उनकी क्या विशेषता रही? सम्पूर्णता का विशेष आधार क्या रहा? ब्रह्मा बाप ने अपना हर समय सफल किया। श्वांस-श्वांस, सेकण्ड-सेकण्ड सफल किया। तो बाप समान बनने के लिए इस वर्ष का लक्ष्य क्या रखेंगे? सफल करना है और सफलतामूर्त बनना ही है। सफलता हमारे गले का हार है। सफलता हमारे बाप का वर्सा है। तो इस लक्ष्य से चेक करना - हर दिन अपने आपको चेक करना है कि सफलतामूर्त बन समय, श्वांस, खजाने, शक्तियां, गुण सब सफल किया? क्योंकि अभी की सफलता से भविष्य भी जमा होता है। अभी जो भी सफल किया, उसका फल 21 जन्म के लिए जमा होता है। जानते हो ना! पहले भी सुनाया है कि अगर आप समय सफल करते हो तो भविष्य में भी आपको राज्य भाग्य का फुल समय, राज्य भाग्य की प्राप्ति होती है। श्वांस सफल करते हो तो 21 जन्म स्वस्थ रहेंगे। कभी भी कोई भी स्वास्थ्य में कमी नहीं रहेगी और साथ में जो खजाने जमा करते हो, सबसे बड़ा खजाना है ज्ञान का, ज्ञान का अर्थ है समझ। तो ज्ञान का खजाना सफल करने से भविष्य में आप ऐसे समझदार बन जाते हैं जो आपको कोई वजीरों की राय नहीं लेनी पड़ती है। स्वयं ही अखण्ड, अटल राज्य चलाते हो और आपके राज्य में कोई विघ्न नहीं। निर्विघ्न अखण्ड, अटल है। यह है ज्ञान का खजाना जमा करने का फल। एक जन्म सफल किया और अनेक जन्म सफलता का फल खाते हो। ऐसे ही शक्तियां जो प्राप्त हैं उनको स्व प्रति वा दूसरों के प्रति सफल करते हो तो भविष्य में आपके राज्य में सर्व शक्तियां हैं, कभी शक्ति कम नहीं होती। कोई भी शक्ति की कमी नहीं है। ऐसे ही अगर गुण दान करते हो तो आपके अन्तिम 84 वें जन्म तक भी जो जड़ चित्र बनाते हैं उसमें लास्ट तक आपकी महिमा क्या करते हैं? सर्वगुण सम्पन्न। तो एक-एक सफलता की प्राप्ति के अनेक जन्म के अधिकारी बन जाते हो। तो इस वर्ष क्या करना है? लक्ष्य रखना है एक श्वांस, एक सेकण्ड भी असफल नहीं हो। जमा करना है। जमा का समय एक छोटा सा जन्म और फल का समय 21 जन्म, तो इस वर्ष में बाप समान बनने का लक्ष्य है? सभी को लक्ष्य है कि बाप समान बनना ही है? बनना नहीं है, बनना ही है। बनना ही है अण्डरलाइन। अच्छा।
तो इस वर्ष का लक्ष्य भी रखा और साथ में बाप को फालो करने का मत्र, सफल कर सफलता मूर्त बनना है। इसके लिए बापदादा बच्चों को ज्यादा मेहनत करने की तकलीफ भी नहीं देते हैं, बहुत सहज विधि बताते हैं, सहज विधि क्या है? जो भी संकल्प करो, पहले चेक करो बाप का यह संकल्प रहा! बोल बोलते हो चेक करो, बाप समान बनना है ना! तो संकल्प, बोल और कर्म, सम्बन्ध-सम्पर्क पहले सोचो, चेक करो बाप का यह रहा? और ऐसा ही स्वरूप बनो। ब्रह्मा बाप को फालो करो। फालो फादर तो गाया हुआ है ना! कई बच्चे बहुत अच्छे अच्छे खेल दिखाते हैं। पता है कौन से खेल दिखाते हैं? फालो नहीं करते लेकिन क्या कहते हैं? चाहता तो नहीं था, हो गया। पहले सोच के, सिर्फ सोचो नहीं स्वरूप बनो। अगर स्वरूप बन जायेंगे तो यह नहीं कहेंगे सोचा नहीं था लेकिन हो गया। करने वाले, सोचने वाले आप श्रेष्ठ आत्मायें हो, मालिक हो। हो गया का अर्थ है कर्मेन्द्रियों के ऊपर कन्ट्रोल नहीं।
तो इस वर्ष में यही स्लोगन याद रखना - बाप समान करना ही है, बनना ही है। मुश्किल तो नहीं है ना? जैसे बाप ने किया वैसे करना है। कापी करना तो सहज है ना, सोचने की जरूरत ही नहीं है। और निश्चित है कि आप सभी को जैसे बाप, ब्रह्मा बाप फरिश्ता बना तो निश्चित है फरिश्ता सो देवता बनना ही है। तो आपको भी फरिश्ता सो देवता बनना ही है। कई बच्चे कहते हैं कि चलते-चलते आपोजीशन बहुत होती है, तो आपोजीशन के कारण पोजीशन से नीचे आ जाते हैं। लेकिन याद करो बाप समान बनना है तो स्थापना के आदि में ब्रह्मा बाप ने कितने आपोजीशन को पोजीशन में परिवर्तन किया? हर बात नई, चैलेन्ज थी। अभी तो बहुत जमाना बदल गया है लेकिन अकेला ब्रह्मा बाप कितना स्वमान की सीट पर बैठ पोजीशन द्वारा आपोजीशन का सामना किया। जहाँ पोजीशन है वहाँ आपोजीशन कुछ नहीं कर सकती। पहले क्या कहते थे? धमाल कर रहे हैं और अभी क्या कहते हैं? कमाल कर रहे हैं। इतना फर्क हो गया। कारण क्या? ब्रह्मा बाप ने स्वयं स्वमान की सीट और दृढ़ निश्चय के शस्त्रों द्वारा आपोजीशन को समाप्त किया। तो आप इस वर्ष में क्या करेंगे? समान बनना है ना! तो अगर आपोजीशन होती भी है तो आप स्वमान की सीट पर बैठ जाओ, तो आपोजीशन, पोजीशन में बदल जाये। है हिम्मत? ब्रह्मा बाप समान बनना ही है, उसमें तो हाथ उठाया, लेकिन इतनी हिम्मत है? पहले स्व के परिवर्तन का, फिर है अनेक सम्बन्ध-सम्पर्क वाली आत्मायें और फिर विश्व की आत्मायें। इन सबको अपने मन्सा शुभ भावना, शुभ कामना द्वारा, दृढ़ संकल्प द्वारा परिवर्तन करना।
तो इस वर्ष में बापदादा विशेष एक शक्ति का वरदान भी दे रहे हैं। मेरा बाबा दिल से कहेंगे तो शक्ति हाज़िर, ऐसे ही मेरा बाबा नहीं, दिल से कहा, अधिकार रखा, मेरा बाबा और शक्ति आपके आगे हाज़िर हो जायेगी। वह कौन सी शक्ति? परिवर्तन की शक्ति। परिवर्तन की शक्ति में विशेष निगेटिव को पॉजिटिव में चेंज करो। निगेटिव संकल्प, निगेटिव चलन को देखते हुए पॉजिटिव में चेंज करो। पॉजिटिव देखना, बोलना, करना, सिर्फ शुभ भावना और शुभ कामना द्वारा सहज हो जायेगा क्योंकि यह आपोजीशन आयेगी, लेकिन आपके परिवर्तन की शक्ति आपको सहज सफलता दिलायेगी। तो समझा इस वर्ष का विशेष वरदान परिवर्तन शक्ति को दृढ़ संकल्प से कार्य में लगाना। कर सकते हो ना परिवर्तन? चैलेन्ज है आपकी, याद है ना! विश्व परिवर्तक हो ना! जब टाइटिल ही विश्व परिवर्तक का है तो क्या स्व को परिवर्तन करना मुश्किल है क्या! दिल में कोई भी मुश्किल बात आये, वैसे मुश्किल बात नहीं होती लेकिन आप बना देते हो। मास्टर सर्वशक्तिवान उसके आगे मुश्किल क्या है? लेकिन आप एक गलती करते हो और मुश्किल बना देते हो। जैसे देखो अचानक यहाँ अंधकार हो जाता है तो अगर कोई गलती से अंधकार को भगाने लगे तो अंधकार भागेगा? सही विधि है आप रोशनी का स्विच ऑन करो तो अंधकार सेकण्ड में भाग जायेगा। तो आप भी यह गलती करते हो जो बात हो गई ना, उसके क्यूं, क्या, कब कैसे… इस क्यू क्यू में चले जाते हो। छोटी सी बात बड़ी कर देते हो और बड़ी बात तो मुश्किल होती है। छोटी बात कर लो तो सहज हो जाये। बाप ने कोई भी शक्ति को कार्य में लगाने की विधि बहुत सहज बताई है - “मैं मास्टर सर्वशक्तिवान हूँ'', अपने इस स्मृति की सीट पर बैठ जाओ, अगर इस सीट पर बैठेंगे तो अपसेट नहीं होंगे। बिना सीट के अपसेट होते हैं, सीट है तो अपसेट नहीं होंगे। 63 जन्म के संस्कार इमर्ज हो जाते हैं। 63 जन्म क्या रहा? अभी अभी सेट, अभी अभी अपसेट। तो सदा स्वमान की सीट पर सेट रहो। और इस वर्ष में क्या करेंगे? नये वर्ष में गिफ्ट तो सबको देंगे ना। तो कौन सी गिफ्ट देंगे? बधाई भी देंगे और साथ में गिफ्ट क्या देंगे? गिफ्ट तो आपके पास बहुत है। जितना देने चाहो उतना दे सकते हो। स्थूल गिफ्ट तो अल्पकाल के लिए चलेगी लेकिन आप अविनाशी बाप समान बनने वाले अविनाशी गिफ्ट दो। मन्सा द्वारा शक्तियों की गिफ्ट दो, वाचा द्वारा ज्ञान की गिफ्ट दो और कर्मणा द्वारा गुणों की गिफ्ट दो। है ना सबके पास? है तो कांध हिलाओ। खजाने बहुत हैं ना, कम तो नहीं हैं ना। कोई से भी कार्य में आओ, कार्य में तो आना पड़ेगा ना। उसको खूब इस वर्ष में सौगातें दो। लेकिन अविनाशी सौगात। सुनाया ना कोई को भी खाली जाने नहीं दो, चाहे मन्सा की सौगात दो, चाहे वाणी की, चाहे कर्म की। इसके लिए आपको सदा एक अटेन्शन रखना पड़ेगा, हर समय मन्सा में शक्तियों का स्टाक इमर्ज रखना पड़ेगा, कितनी शक्तियां हैं? लिस्ट तो है ना! वाचा के कारण सदा मन में मनन शक्ति, ज्ञान को मनन करने की शक्ति, स्मृति में रखनी पड़ेगी। चलन में, चेहरे में, कर्म में, गुणों का स्वरूप बनना पड़ेगा। सदा अपने को गुणमूर्त, ज्ञान मूर्त, शक्ति स्वरूप इमर्ज रखना पड़ेगा। ऐसे नहीं शक्तियां तो हैं ही, ज्ञान तो है ही... लेकिन स्वरूप बनना पड़ेगा। हर एक को ईश्वरीय परिवार की दृष्टि वृत्ति से देखना पड़ेगा। इस वर्ष जब समान बनना ही है, उसमें हाथ उठा लिया है, बापदादा के वतन में सबका हाथ दिखाई देगा। वहाँ यह छोटी टी.वी. नहीं है, बहुत बड़ी है। एक सेकण्ड में सर्व सेन्टर्स की रिजल्ट को देख सकते हैं। तो बापदादा आपका जो उमंग है, बाप समान बनना ही है, इसके लिए खुश है। खुशनसीब हो, खुश चेहरे वाले हो, कभी रोब का चेहरा नहीं बनाना। कोई भी आपको देखे तो सदा खुश देखे, चाहे जितना भी काम में बिजी हो, गलती को ठीक कर रहे हो, समझा रहे हो लेकिन रोब का चेहरा, बोल नहीं हो। इस वर्ष में यह परिवर्तन करके दिखाओ। प्राइज़ देंगे। सारे वर्ष में जो सदा मुस्कराता रहेगा, कोई भी बात आये, कई भाई बहिनें कहते हैं, रूहरिहान तो करते हैं ना सभी, तो कहते हैं अगर रोब से नहीं कहेंगे ना तो समझेगा नहीं। बदलेगा ही नहीं। पहले ही आपने भावना रख दी कि यह बदलेगा ही नहीं तो उसको आपका वायब्रेशन पहले ही पहुंच गया इसलिए इस वर्ष में क्रोध या बाल-बच्चा इसको विदाई देनी है। हो सकता है? रोब भी नहीं। बाप पूछता है जो भी समय प्रति समय क्रोध करते हैं, काम बनाने के लिए, सुधारने के लिए, लेकिन वह सुधरता है? क्रोध करने से कोई सुधरा है? वह लिस्ट बताओ। और ही चिढ़ जाता है, सुधरता नहीं है। आपोजीशन करता है मन में। अगर बड़ा है तो मन में आपोजीशन करता है, बोल तो सकता नहीं और छोटा है तो रोने लग जाता है। तो इस वर्ष क्या-क्या करना है, वह सारा सुना रहे हैं। पसन्द है? करना है?
अभी हाथ उठाओ। करना है? टी.वी. वाले यह फोटो निकालो। हाथ उठाओ, थोड़ा खड़ा रखो। टी.वी. वाले निकाल रहे हैं। तो बापदादा ने जो भी बातें सुनाई वह हर एक को इस वर्ष करनी है। अच्छा।
बहुत काम दे दिया है ना लेकिन बापदादा आपका साथी है, जहाँ भी मुश्किल आवे ना, बस दिल से कहना, बाबा, मेरा बाबा, मेरा साथी आ जाओ, मदद करो। तो बाबा भी बंधा हुआ है। सिर्फ दिल से कहना क्योंकि समय और स्वयं दोनों को देखना है। समय चैलेन्ज कर रहा है और आप माया को चैलेन्ज करो, क्या करेगी।
तो समय के प्रमाण बापदादा देख रहे थे कि समय की रफ्तार इस समय तीव्र है। तो समय को सामना कौन करेगा? आप ही तो करेंगे। बापदादा ने देखा कि दुःखियों की पुकार, भक्तों की पुकार, समय की पुकार इतना सुनते कम हैं। बिचारे हिम्मतहीन हैं, उन्हों को पंख लगाओ तो उड़ तो सकें। हिम्मत के पंख, उमंग-उत्साह के पंख लगाओ। अच्छा।
सेवा का टर्न पंजाब ज़ोन का है:- बापदादा का भी पंजाब से प्यार है, क्यों प्यार है? जम्मू कश्मीर उसको भी अपना बनाया है लेकिन थोड़ा और, जम्मू कश्मीर का नाम मशहूर है, चाहे पाकिस्तान में, चाहे अमेरिका में... सबकी नज़र जम्मू कश्मीर पर है। तो वहाँ कोई जलवा निकालो। ऐसे नहीं कि वहाँ की बहिनें करें, आप सहयोग देकर उसमें कुछ ऐसा वन्डरफुल बात करके दिखाओ। थोड़ा अटेन्शन दो नाम बाला हो जायेगा। जिस पर झगड़ा है वहाँ शान्ति का झण्डा फहराओ। ठीक है। संख्या बहुत है, एक निर्विघ्न बनो और दूसरा सेवा में शान्ति का झण्डा लहराओ। सबको दिखाई दे झण्डा कि हाँ अशान्ति के स्थान में शान्ति का झण्डा लहर रहा है। ठीक है। अच्छा।
डबल विदेशी:- डबल तीव्र पुरुषार्थी। अभी डबल फारेनर नहीं, डबल तीव्र पुरुषार्थी। डबल फारेनर्स की विशेषता है वह हाथ में हाथ देके ज्यादा चलते हैं। तो आप सभी ने, बापदादा को पक्का हाथ में हाथ दिया है ना! हाथ में हाथ देना अर्थात् साथी बनाना, फ्रैण्ड बनाना, लवली फ्रैण्ड, तो फ्रैण्ड बनाया है? फ्रैण्ड का नाता जल्दी याद आता है, कोई भी मुश्किल आती है ना तो बाप को नहीं बतायेंगे, फ्रैण्ड को बतायेंगे। तो आपने खुदा को दोस्त बनाया है ना! खुदा दोस्त है! अच्छा है, बापदादा को फारेनर्स को देख खुशी होती है, क्यों कारण क्या है? बाप का एक नाम फारेन वालों ने सिद्ध किया, विश्व पिता, विश्व कल्याणकारी। पहले भारत कल्याणकारी थे लेकिन विदेश ने बाप का विश्व कल्याणकारी नाम प्रत्यक्ष किया है। पहले विश्व की सेवा सिर्फ मन्सा द्वारा करते थे, अभी निमित्त बने हैं विश्व की सब तरह से सेवा करने के। और देखो कोने-कोने में बिछुड़े हुए बच्चे कितने वाह वाह! बच्चे निकल आये। और आपको नशा होगा तो हम हर कल्प के साथी हैं। थे भी, हैं भी और होंगे भी। है ना! नशा है ना! देखो, आपको कोने कोने में होते भी बाप की नज़र ने पहचान लिया, बाप ने भी पहचाना, आपने भी पहचाना। लोग बिचारे आयेगा, आयेगा, आयेगा करते और आप क्या कहते? आ गये। गीत गाते हो ना, मेरा बाबा आ गया। तो बहुत अच्छा, सबको बाप दिल का दुलार, यादप्यार और दिल की दुआयें विशेष दे रहे हैं।
चारों ओर के बच्चे अब बापदादा के होमवर्क को प्रैक्टिकल में करके सबूत देने वाले सपूत बच्चे का अपना प्रभाव दिखायेंगे। तो चारों ओर के बच्चों को बहुत-बहुत दिल का दुलार और दिल की पदमगुणा यादप्यार स्वीकार हो। और ऐसे लायक बच्चे श्रेष्ठ बच्चों को बापदादा का नमस्ते।
दादी जानकी:- वन्डरफुल बाबा, मेरा बाबा, मीठा बाबा, प्यारा बाबा, शुक्रिया बाबा। कल नया साल शुरू हो जायेगा। नये साल में क्या करने का है! पुरानी बातें समाप्त। मैं यही चाहती हूँ कि हम सब सदा ही खुश रहें, आबाद रहें, पुरानी बातें भूल जायें। आज जो बाबा ने इतना अच्छा होमवर्क दिया है, हम यही चाहते हैं कि वह सब करके दिखायें। तो आने वाले नये वर्ष की सबको बहुत-बहुत मुबारक। ओम् शान्ति।