Daily Murli for Friday 21 April 2017
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021/04/17 प्रातःमुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन
1मुरली सार:- “मीठे बच्चे - बाप आये हैं तुम्हारा ज्ञान-योग से श्रृंगार करने, उस श्रृंगार को कायम रखने के लिए माया से कभी हार नहीं खाना''
2प्रश्न:- कौन सी एक छोटी बात निश्चयबुद्धि बच्चों के निश्चय को तोड़ संशयबुद्धि बना देती है?
3उत्तर:- निश्चयबुद्धि बच्चे अगर चलते-चलते किसी छोटी भी भूल के भ्रम में फँस जाते हैं तो निश्चय टूट जाता है।
4श्रीमत में भ्रम पैदा हुआ तो माया संशयबुद्धि बना देगी।
5जो संशयबुद्धि बनते हैं वह सर्विस भी नहीं कर सकते और उनसे विकारों को जीतने की मेहनत भी नहीं होती।
6ऐसे कमजोर बच्चों को भी रहमदिल बाप राय देते हैं बच्चे, अगर तुम्हें विकार सताते हैं, सर्विस भी नहीं करते तो बाप को तो याद करो।
7गीत:- तुम्हीं हो माता पिता…
8ओम् शान्ति।
9यह किसकी महिमा है?
10मात-पिता की।
11तुम उस मात-पिता के बच्चे हो।
12उनको कहा जाता है बेहद का रचयिता।
13कितने ब्रह्माकुमार कुमारियाँ हैं।
14जगत अम्बा और जगत पिता, ब्रह्मा के भी चित्र हैं।
15सिर्फ भिन्न चित्र बना दिये हैं।
16तुम जानते हो विश्व के आदि अर्थात् सतयुग में अथाह सुख थे।
17अभी फिर से बेहद के बाप से बेहद के सुख का वर्सा ले रहे हैं।
18यह महिमा लौकिक माँ बाप की नहीं हो सकती।
19यह है बेहद के माँ बाप की बात।
20परमपिता परमात्मा को ही मात-पिता कहा जाता है।
21परन्तु वह है निराकार।
22यह तो बहुत बार समझाया है कि नई रचना, नये धर्म के लिए यह नया ज्ञान है।
23देवी देवता धर्म अभी है नहीं।
24कोई भी नहीं कहेंगे कि हमारा देवी देवता धर्म है, क्योंकि वह तो सम्पूर्ण निर्विकारी थे।
25अभी हैं सब विकारी और धर्म प्रायः लोप भी जरूर होने चाहिए, तब तो फिर से उस धर्म की स्थापना करने के लिए बाप को आना पड़े।
26अभी तुम बच्चों को बाप और वर्से को याद करना है।
27वर्से के लिए माँ के पेट से जन्म ले फिर बाप को याद करते हैं।
28जन्म तो लिया परन्तु थ्रू किसके?
29माँ से जन्म लेते हैं।
30यह भी ऐसे है - थ्रू माँ के तुम बच्चे बने हो।
31याद करते हो शिवबाबा को वर्सा लेने के लिए वाया माँ।
32परन्तु कोई को निश्चय है, कोई को नहीं है।
33ऐसे नहीं कि सभी को निश्चय है, माया घुटका दिलाती रहती है।
34कहाँ न कहाँ फँस पड़ते हैं।
35श्रीमत पर न चलने वाले अपनी ही भूलों के भ्रम में फँसते हैं, निश्चय है तो फिर और सब बातें छोड़ देते हैं।
36सुनना है और सुनाना है।
37कोई कहते हैं हम सर्विस नहीं कर सकते।
38प्रजा नहीं बनायेंगे तो राजा भी नहीं बनेंगे।
39अच्छा और कुछ नहीं करते हो तो सिर्फ शिवबाबा को याद करो।
40स्वर्ग में आ जायेंगे।
41अच्छा विकारों को जीतने की मेहनत नहीं पहुँचती फिर भी बाप को याद करो तो स्वर्ग में आ जायेंगे, परन्तु पद कम मिलेगा।
42बाप समझाते हैं - भक्ति का पार्ट अब खत्म होना है।
43भक्ति का फल देने बाप आये हैं।
44तुम ही नम्बरवार पूरी भक्ति करते हो।
45पहले-पहले करते हो शिवबाबा की फिर ब्रह्मा विष्णु शंकर की।
46अभी तो देखो गली-गली में कितने मन्दिर बना दिये हैं, कितने सतसंग होते हैं।
47जहाँ यह सब चीजें बहुत हैं, वहाँ फिर यह कुछ भी नहीं रहेगा।
48एक भी मन्दिर नहीं रहेगा।
49अभी तो भक्ति की कितनी सामग्री है।
50द्वापर, कलियुग है भक्ति मार्ग का युग, तमोप्रधान बनने का युग।
51अब बाप इन सब झंझटों से छुड़ा देते हैं।
52कहते हैं हियर नो ईविल, सी नो ईविल... देह सहित इन सबसे ममत्व मिटाओ।
53अब तुम्हें नये घर में चलना है।
54जब स्थापना हो जाए तब तो चलेंगे ना - यह है पुरानी दुनिया, दुःखधाम।
55यह अन्तिम जन्म है।
56अभी तुम ईश्वर की गोद में बैठे हो।
57मात-पिता की गोद में हो।
58लॉमुजीब बाप ब्रह्मा मुख से तुमको जन्म देते हैं तो यह माँ हो गई, लेकिन तुम्हारी बुद्धि फिर भी शिवबाबा तरफ चली जाती है।
59तुम मात-पिता हम बालक तेरे.... शिवबाबा तरफ लव चला जाता है।
60तुम सजनियां भी हो।
61शिवबाबा आया है, तुमको श्रृंगार कर लायक बनाने।
62ज्ञान और योग से तुम बच्चों को श्रृंगारते हैं।
63सिर्फ तुम नहीं हो, यह आवाज तो सब सेन्टर्स पर सुनते हैं।
64हजारों सुनते रहेंगे।
65सभी का श्रृंगार होता रहता है।
66कितने श्रृंगार करते-करते फिर मैले हो जाते हैं।
67बाबा गधे का मिसाल देते हैं ना।
68तुम बच्चों को सर्वगुण सम्पन्न, 16 कला सम्पूर्ण .... बनना है।
69घड़ी-घड़ी माया से हार नहीं खानी है।
70कहते हैं बाबा आज माया ने थप्पड़ मार दिया।
71बाबा कहते हैं तुम कुल को कलंक लगाने वाले हो।
72बाप की भी निंदा तो बच्चों की भी निंदा कराते हो।
73तुम तो और ही गिर पड़ेंगे।
74इस काम महाशत्रु पर पूरी जीत पानी है।
75बाप से प्रतिज्ञा करनी पड़ती है।
76बाप है स्वर्ग का रचयिता, सो तो जरूर स्वर्ग का मालिक बनायेंगे।
77जो यह सहज राजयोग सीखेंगे, वही स्वर्ग में आयेंगे।
78ऐसे नहीं कि सभी स्वर्ग में आयेंगे।
79भल यह समझते हैं कि नई दुनिया गॉड फादर रचते हैं।
80बाकी नई दुनिया में कौन राज्य करते हैं - यह राज़ तो जब कोई समझावे।
81भल जानते हैं भारत प्राचीन है, परन्तु यथार्थ रीति तो भारतवासी खुद ही नहीं जानते तो औरों को क्या बतायेंगे।
82तुम बतला सकते हो - भारत जैसा पवित्र खण्ड और कोई हो नहीं सकता।
83भारत जैसा मालामाल और कोई खण्ड नहीं।
84अभी अमेरिका आदि के पास भल बहुत धन है परन्तु भारत की भेंट में तो यह जैसे कौड़ियाँ हैं।
85भारत ही सब धर्मों का तीर्थ स्थान है।
86सभी आत्माओं का बाप भारत में आते हैं, नर्क को स्वर्ग बनाने।
87सबको लिबरेट करते हैं।
88महिमा है तो उनकी।
89फूल भी उन पर चढ़ाने चाहिए।
90परन्तु गीता में नाम गुम कर दिया है, इसलिए महत्व कम कर दिया है।
91क्रिश्चयिन लोगों ने भी उल्टी सुल्टी बातें सुनी हैं तो वे भी फिर ग्लानी की बातें सुनाए अपने धर्म में बहुतों को कनवर्ट करते गये हैं।
92कितने क्रिश्चियन बनते होंगे।
93यह तो कल्प-कल्प होता ही रहेगा।
94बाप कहते हैं जब ऐसे धर्म ग्लानि होती है तब फिर मैं आकर भारत को हीरे जैसा बनाता हूँ।
95बेहद के बाप से बेहद का सुख मिलता है, स्वर्ग की स्थापना होती है।
96वह है शिवबाबा।
97तुम हो शिव शक्ति भारत मातायें और तुम हो गुप्त।
98तुम शिव शक्ति सेना को मनुष्य क्या जानें।
99तुम ही जानते हो बरोबर हम शिव शक्ति पाण्डव सेना हैं।
100यह नई राजधानी स्थापन हो रही है।
101यह है पुरानी पतित दुनिया, वह है पावन नई दुनिया।
102इस पतित दुनिया में पावन कोई हो नहीं सकता।
103शास्त्रों में क्या-क्या बातें लिख दी हैं।
104सुनाने वाले भी बड़े होशियार होते हैं।
105शास्त्र भी सुनते आये, 7 रोज़ का पाठ भी रखते आये।
106रुद्र यज्ञ आदि भी रचते आये हैं।
107फिर भी दुनिया को तमोप्रधान बनना ही है।
108चाहे कुछ भी करें, वापिस तो एक भी नहीं जा सकता।
109मनुष्यों को ज्ञान नहीं तो शास्त्रों का कनरस बहुत अच्छा लगता है।
110तुमको अभी वह अच्छा नहीं लगता इसलिए बाप कहते हैं हियर नो ईविल.. सिर्फ मुझे याद करो, श्रीमत पर चलो तो श्रेष्ठ बनेंगे।
111आसुरी मत पर चलने से असुर ही बनते जायेंगे।
112वह है रावण मत।
113मनुष्य रावण मत पर हैं तब तो रावण को जलाते रहते हैं।
114बाप हर एक बात अच्छी रीति बैठ समझाते हैं।
115बीज और झाड़ की नॉलेज है, इसको कल्प वृक्ष कहा जाता है।
116इनकी आयु 5 हजार वर्ष है।
117अगर सतयुग को लाखों वर्ष हुए हो फिर तो हिन्दू बहुत ढेर होने चाहिए।
118अब तुम बच्चे अच्छी रीति जानते हो कि विनाश तो होना ही है, नेचुरल कैलेमिटीज़ भी आती जायेंगी।
119इनको फिर वह गॉडली कैलेमिटीज़ कह देते हैं।
120परन्तु गॉड थोड़ेही कैलेमिटीज़ लाते हैं।
121यह तो ड्रामा में नूँध है।
122विनाश न हो तो नई दुनिया कैसे रची जाए।
123महाभारत लड़ाई से ही तो गेट खुलेंगे।
124बच्चों ने साक्षात्कार किया है, मंजिल बहुत भारी है।
125तो कई हिम्मत नहीं रखते हैं।
126देखो, कल भी बाबा समझा रहे थे कि इस मृत्युलोक में तुम्हारा यह अन्तिम जन्म है।
127अब मैं अमरलोक का मालिक बनाने आया हूँ।
128यह अन्तिम जन्म बाप का कहना मानो।
129पवित्रता की प्रतिज्ञा करो।
130लौकिक बाप का भी अगर बच्चा कहना न माने तो बाप कहेंगे ना तुम कपूत बच्चा हो।
131बाबा तो सर्वशक्तिमान् है, उनके फरमान पर चलने से मदद भी मिलेगी, फिर बच्चे कहते हैं अच्छा सोचेंगे।
132अरे कल शरीर छूट जाए तो वर्सा तो मिलेगा नहीं।
1335 विकारों की बीमारी बहुत कड़ी है।
134माया ने सबको रोगी बनाया है।
135अब बाप कहते हैं मेरी श्रीमत पर चलो।
136माया तो बहुत विकल्पों में लायेगी, बहुत तूफान आयेंगे।
137देवाला निकल जायेगा।
138फिर कहेंगे यह क्या, बाबा का बना तो यह हाल हुआ!
139परन्तु बाप कहते हैं तुमने शिवबाबा को सब कुछ दे दिया, तुम तो ट्रस्टी हो गये।
140वह तुमको पूरा हिसाब दे देंगे।
141तुम चिंता क्यों करते हो।
142तुम जानते हो अभी तो भारत का बेड़ा डूबा हुआ है, बाप सैलवेज करने आये हैं।
143बाप बिगर स्वर्ग कौन बनाये।
144कहते हैं द्वारिका नीचे चली गई, अब ऊपर कैसे आयेगी।
145कच्छ मच्छ लायेंगे क्या?
146यह ड्रामा का चक्र है, जिसको समझना है।
147सतयुग, त्रेता जब ऊपर हैं तब द्वापर कलियुग नीचे चले जायेंगे।
148सृष्टि चक्र का चित्र इतना बड़ा बनाना चाहिए जैसे आइना फुल साइज का भी बनाते हैं ना।
149बाप कहते हैं - बच्चे आइने में अपना मुँह देखते रहो, कहाँ बन्दर तो नहीं बन पड़ते हो!
150जिनमें विकार हैं वह बन्दर से भी बदतर हैं।
151देवतायें तो मन्दिर लायक हैं।
152वास्तव में सन्यासियों के लिए कभी मन्दिर नहीं बनाया जाता।
153मन्दिर सिर्फ देवताओं का होता है क्योंकि उन्हों की आत्मा और शरीर दोनों पवित्र हैं।
154यहाँ पवित्र शरीर तो मिल न सके।
155मनुष्य कितने यज्ञ रचते हैं, कथायें सुनते रहते हैं।
156बाप तो एक ही बेहद का यज्ञ रचते हैं, जिसको रुद्र यज्ञ कहते हैं।
157इस यज्ञ से ही विनाश ज्वाला प्रज्जवलित हुई, बाकी सब यज्ञ खलास हो जाते हैं।
158रुद्र ज्ञान यज्ञ मशहूर है।
159शिव ज्ञान यज्ञ मशहूर नहीं है।
160रुद्र की और सालिग्रामों की पूजा होती है।
161कितने सालिग्राम बनाते हैं।
162शिव तो एक ही बनाते हैं।
163प्रजा तो ढेर बनेगी, इतने थोड़ेही बना सकेंगे।
164शिवबाबा और तुम बच्चों की पूजा होती है क्योंकि तुम सारी दुनिया को लिबरेट करते हो।
165तुम हो शिव शक्तियाँ - सैलवेशन आर्मी।
166ऐसे बहुत हैं जो स्वयं को सर्वोदया लीडर कहते हैं।
167अब सारी दुनिया पर दया तो कोई कर न सके।
168सब पर रहम करने वाला रहमदिल शिवबाबा को ही कहा जायेगा।
169मनुष्य नाम तो बड़े-बड़े रखवाते हैं।
170सर्व पर दया वा कृपा करना अर्थात् सुखधाम में ले जाना-यह काम तो एक परमात्मा का ही है।
171सभी का गति सद्गति दाता एक ही शिवबाबा है।
172मनुष्य किसी की सद्गति नहीं कर सकते।
173एक की भी नहीं कर सकते, इम्पासिबुल है।
174तुमको कहते हैं कि तुम लोग शास्त्रों को नहीं मानते हो।
175वह चीज़ सामने है, ऑखों से देखते हैं, मानते कैसे नहीं!
176परन्तु अभी हम श्रीमत पर चलते हैं, जिससे श्रेष्ठ बनेंगे।
177श्रीमत है भगवान की, कृष्ण की मत पर नहीं चलते।
178कृष्ण की आत्मा भी आगे जन्म में श्रीमत से ऐसा श्रेष्ठ देवता बनी थी, तत् त्वम्।
179उनकी राजधानी भी होगी ना।
180अकेला कृष्ण क्या करेगा!
181काँटों से फूल बाप के सिवाए और कोई बना न सके।
182बाप आया है तो जरूर स्वर्ग रचेंगे ना।
183नहीं तो अवतार लेने की क्या दरकार थी।
184जरूर भारत को स्वर्ग बनाया था और अब फिर से बना रहे हैं।
185वहाँ भी मन्दिर आदि होंगे नहीं।
186तुम जानते हो बाबा भारत में आया है, भारत को स्वर्ग बनाने।
187बाबा ने समझाया है माया के तूफान तो सभी को आयेंगे।
188बाबा से आकर पूछो।
189ज्ञान और योग का भी अनुभव पूछो।
190संकल्प जो विकल्प बन जाते हैं, उनका भी अनुभव पूछो।
191बाबा सबसे आगे हैं, तो इन तूफानों से पास जरूर होते हैं।
192हम बाबा को याद करते हैं।
193फिर भी माया कम नहीं है।
194जितना रुसतम उतना माया पूरा सामना करेगी, डरना नहीं है।
195लिखते हैं बाबा माया को बोलो कि तंग न करे।
196परन्तु माया तूफान तो मचायेगी, डरना नहीं है।
197अच्छा।
198मीठे-मीठे सिकीलधे बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का याद-प्यार और गुडमार्निग।
199रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
200धारणा के लिए मुख्य सार:-
2011) बाप को पूरा हिसाब दे, ट्रस्टी बन सब चिंताओं से मुक्त हो जाना है।
202बाप के फरमान पर पूरा-पूरा चल मदद का पात्र बनना है।
2032) मनुष्यों के डूबे हुए बेड़े को सैलवेशन आर्मी बन पार करना है।
204बाप का मददगार बन पूज्यनीय लायक बनना है।
205वरदान:- समय पर योग की शक्तियों का प्रयोग करने वाले स्व के संस्कार सो संसार परिवर्तक भव
206जैसे योग करने और कराने में योग्य हो ऐसे योग का प्रयोग करने में भी योग्य बनो।
207सबसे पहले अपने संस्कारों पर योग की शक्ति का प्रयोग करो क्योंकि आपके श्रेष्ठ संस्कार ही श्रेष्ठ संसार के रचना की नींव हैं।
208तो चेक करो कि कोई भी संस्कार समय पर धोखा तो नहीं देते हैं? 209कैसी भी बात हो, व्यक्ति या वायुमण्डल हो लेकिन श्रेष्ठ संस्कारों को परिवर्तन कर साधारण वा व्यर्थ न बना दें। 210जो स्व के संस्कारों को परिवर्तन कर लेते हैं वही संसार को परिवर्तन करने के निमित्त बन जाते हैं। 211स्लोगन:- नम्बर आगे लेना है तो स्वभाव इज़ी और पुरूषार्थ अटेन्शन वाला हो।
0 21/04/17 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban