Mamma's Murli - 101
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0> > 1मम्मा मुरली मधुबन 2श्रेष्ठ कर्मों का ज्ञान - 23-04-65
024/06/06 Morning Murli Mateshwari Madhuban 23/04/65 1
2Sweet elevated versions to be read in class on the day of remembrance of sweet Jagadamba. 3
4The basis of all attainments for all time is the power of complete purity.
5This is the most elevated action of all. 6
3रिकॉर्डः 4जो पिया के साथ है उसके लिए बरसात है…
5हेलो, गुड मॉर्निंग ।
6आज शुक्रवार, अप्रैल की 23 तारीख है । 7प्रातः क्लास में प्राण माँ की मुरली सुनते हैं ।
8रिकार्ड:- जो पिया के साथ है उसके लिए बरसात है…
7Song: The rain is for those who are with the Beloved.
9जो समझ लिया है, जो गीतों में आता है पिया, पियू, बालम, साजन, ऐसे-ऐसे जो शब्द आते हैं तो यह कोई कॉमन मनुष्य के लिए नहीं है ।
8The words that are used in songs such as “Beloved, Bridegroom” etc. are not really words for ordinary human beings.
10यह कहावत है ना जैसी दृष्टि वैसी सृष्टि ।
9However, as people’s vision, so their world.
11भले गीत बनाने वालों ने गाने वालों ने किसी भी तरह से गाया हो लेकिन अपनी बुद्धि तो अभी उधर है ना, उनके तरफ । 12तो अभी बुद्धि को ले जाना है उधर, परमपिता परमात्मा की तरफ ।
10No matter how these words have been used by composers or singers, we now have to take our intellect to the Supreme Father, the Supreme Soul.
13जो ही अभी अपना मात-पिता, बंधु-सखा यह सभी कनेक्शन उसी से ही हैं ।
11Our connection now is with the One who is our Mother, Father, Friend; all our relationships are with Him.
14इसलिए जब ऐसे सुनते हो तो बुद्धि को तो उधर ही ले जाना है ।
12Therefore, as soon as we hear such songs, we have to take our intellect there.
15तो अभी सुना, जो पिया के साथ है उनके लिए बरसात है, कौन सी बरसात?
13So, you just heard the song, “The rain is for those who are with the Beloved,”. 14Which rain?
16यह जो पानी की बरसात पड़ती है?
17नहीं, यह ज्ञान की बरसात ।
15It is the rain of knowledge.
18ज्ञान को बरसात भी कहा जा सकता है इस अर्थ से क्योंकि बरसात से क्या होता है, देखो पानी मिलता है, अगर बरसात ना पड़े तो खाना पीना नहीं खा सको ।
16With physical rain you receive water and if there isn’t any rain, there wouldn’t be a harvest and there would then be famine.
19तो यह सरसब्ज बनाने के लिए, तो यह है ज्ञान की बरसात ।
17Now, we have this rain of knowledge to create heaven.
20हम आत्माएँ सूख गई हैं ना?
21सुखी हो ना?
22अभी तो सुखी नहीं हो ना?
23सूख गई थी, यह ज्ञान की बरसात ना मिलने से आत्माओं को सुखी कहो या आत्माएँ अपवित्र, तमोप्रधान हो गई थी ।
18Because of not receiving the rain of knowledge, souls have become dry, impure and tamopradhan.
24अभी बाप ने आ कर के फिर से इस ज्ञान बरसात से अभी उसको साफ कर रहे हैं या सरसब्ज बना रहे हैं ।
19The Father has now come and is making everything green with the rain of knowledge.
25तो अभी हम फिर से हरे-भरे होते जा रहे हैं इस ज्ञान की बरसात से ।
26तो इसीलिए इसको बरसात भी कहेंगे क्योंकि हम आत्माएँ जो मुरझा गई थी, सूख गई थी, अभी इस बरसात से फिर हम जागृत होकर के अभी फिर बाप से अपना वह जो कुछ भी पाने का है, वह पाने का यह पुरुषार्थ रख रहे हैं इसीलिए इसको ज्ञान की बरसात कहा जाए ।
20He is cleansing the souls. 21That is why you can call this rain.
27ज्ञान के भी बहुत नाम हैं, जैसे परमात्मा के भी बहुत नाम हैं ना, तो इसी तरह से ज्ञान के भी बहुत नाम है ।
22Just as God has many names, similarly, knowledge too has many names.
28ज्ञान को बरसात कहो, ज्ञान को अंजन कहो, ज्ञान को कहाँ देखो तलवार के रूप में दिया है, जैसे शक्तियों को तलवारें आदि दिए हैं न, अभी उन्होंने तलवार आदि कोई हिंसक अस्त्र-शस्त्र तो नहीं उठाए हैं ना, यह ज्ञान है तो ज्ञान को तलवार भी कहा जाता है ।
23You can call knowledge rain, ointment and also the sword of knowledge. 24This sword is not for violence. 25The weapons that the goddesses have been portrayed with are not for violence; they are of knowledge.
29कृष्ण के हाथ में देखो मुरली दी है । 30उसको तो भगवान समझा है ना, परंतु वह मुरली, वह कोई कांठ की मुरली की बात नहीं है ।
26Similarly, they show the flute in Krishna’s hands; it is not a matter of that music.
31वो यह ज्ञान है जो परमात्मा ने सुनाया है इसीलिए उनको ज्ञान मुरली कहा जाता है ।
27The knowledge that God spoke is called the murli (flute) of knowledge.
32कहाँ देखो साज़ों के रूप में जैसे सरस्वती को सितार या बैन्जो दिया है तो ऐसा नहीं है कि उसने आ करके यह सितार बजा करके सुनाया है ।
28For instance, they have shown Saraswati with a sitar but it isn’t that she came and played that musical instrument.
33नहीं, यह ज्ञान सुनाया इसीलिए उनको कहते हैं गॉडेज ऑफ नॉलेज, तो नॉलेज दिया है ना । 34बाकी ऐसे नहीं है बैंजो बजाया है इसीलिए कहा, क्योंकि इसी से जीवन मधुर बनती है । 35इससे जीवन में यह प्राप्ति आती है सुख शांति की इसीलिए कहाँ साज़ों के रूप में, कहाँ अस्त्र शस्त्रों के रूप में, कहाँ कुछ रूप में, कहाँ ये देखो ज्ञान का नेत्र दे दिया तो यह सभी ज्ञान के अलंकार और ज्ञान के सब निशान हैं ।
29No, this is a matter of knowledge. 30This is why she is called the goddess of knowledge. 31So, she gave knowledge; she did not play a banjo (sitar). 32It is with this knowledge that your life becomes sweet and you attain peace and happiness and this is why they have sometimes shown it in the form of music and sometimes in the form of weapons. 33However, in fact, all of these are ornaments of knowledge.
36ज्ञान को भी देखो अभी कितने रूप और कितने ढंग में लाया है, कहाँ नेत्र से, कहाँ अंजन से, कहाँ बरसात के रूप में, कहाँ कुछ तो यह सभी बातें बैठ कर के बाप समझाते हैं । 37वह भागीरथ का देखा है ना, वो यहाँ से गंगा निकली फिर पानी बहता है, वह चित्रों में दिखलाया है तो यह भी सभी है, तो वास्तव में ज्ञान की बरसात की बात है परंतु ऐसा नहीं पानी यहाँ से निकलेगा यह तो नॉलेज है न, जिसको धारण करना है और उस परमात्मा ने भी आकर के नॉलेज सुनाया है, तो नॉलेज तो सुनाना पड़ेगा ना बाकी यहाँ से पानी थोड़ी निकलेगा माथे से । 38तो यह सभी चीजें अभी बुद्धि में हैं कि परमात्मा ने आकर के नॉलेज सुनाया है और हमने भी नॉलेज को धारण किया है बाकी कोई ज्ञान की बरसात या ज्ञान की गंगा या पानी बहा है या कुछ ऐसी बातें नहीं है ।
39तो यह तो सभी अभी अच्छी तरह से जो पुराने हो जो भी आते हो, इन सब बातों को तो समझ गए होंगे ।
34All of these matters have to be understood.
40तो अभी बाप के द्वारा वह नॉलेज प्राप्त हो रहा है जिससे अभी हम हरे-भरे होते जा रहे हैं, होते जा रहे हो ना, अपने को समझते हो ना क्योंकि यह समझने की बातें हैं ।
35
41तो देखो यह ड्रामा भी जो है वह भले है बना बनाया, परंतु उसका मतलब यह नहीं है, इसके भी नियमों को समझना है ना कि यह बना बनाया ड्रामा भी किस तरह से बना हुआ है । 42तो बाप आकर के समझाते हैं कि यह बना बनाया जो चीज है वह भी किन नियमों से बना हुआ है वह समझने की बात है ।
36The Father comes and explains that this drama is predestined, but you have to understand with which principle it is predestined.
43इसमें मूंझना नहीं है क्योंकि कभी-कभी कई इस ड्रामा की बात में मूंझते भी हैं कि जब यह बना बनाया है तो फिर हमारे लिए तो कोई पुरुषार्थ की बात ही नहीं है ।
37You mustn’t get confused about this because some people sometimes do get confused about the drama. 38They think that since it is predestined there is no question of making effort.
44बना बनाया पड़ा है फिर हम काहे के लिए मेहनत करें जो होना होगा वह होगा परंतु नहीं, वह होना होगा वह भी तो होगा हमारे करने से ना ।
39“Why should we make effort? 40Whatever is to happen will happen,” but no!
45तो हमको अपना आधार रखना है अपने कर्म के ऊपर ।
41We have to base everything on our actions.
46वह बात भूल जाओ जो इन बात में कोई को ना समझ में आती है ना, तो उसमें अटकना नहीं है कि बना बनाया है, और यह पॉइंट हमें समझाई भी है कि कभी भी कोई भी नयों को समझाने की नहीं है ।
42If you are unable to understand anything, you mustn’t get stuck with it.
47यह तो है ड्रामा को समझना कि कैसे यह नाटक बना बनाया है और अनादि काल से यह बना बनाया ही है, इसका टाइम है शुरू होता है तो पूरा होता है फिर पूरा हो करके फिर शुरू होता है, तो यह तो एक नाटक है जो बाप बैठकर के समझाते हैं कि यह कई बार शुरू हुआ है, फिर पूरा होता है, फिर पूरा हो करके फिर शुरू होता है वह बैठकर के बाप समझाते हैं, लेकिन शुरू कैसे हुआ, मुझे भी तो आकर के देखो कर्म करना पड़ता है ना, उसमें तो मैं भी बंधा हुआ हूँ और मुझे भी आकर के नई दुनिया को रचने के लिए काम करना पड़ता है तो मेरा भी पार्ट है ना, तो हरेक का भी अपना-अपना पार्ट है जो भी नूंधा हुआ है । 48तो हमको अपने पार्ट के ऊपर, अपने एक्शंस के ऊपर अटेंशन देने का है ।
43The drama has to be understood as to how it is predestined eternally. 44It does have a time; it has a beginning and an end. 45The Father too has to enter it and perform actions. 46The Father says: I too am bound by it. 47I too have to work to create the new world. 48I too have a part. 49In this way, whatever is fixed in each one’s part, they have to pay attention to their actions.
49तो अभी जो हमारा टाइम है, अभी हमको क्या करना है, अभी तो हमको अपने कर्मों को श्रेष्ठ बना करके अभी हमको अपनी प्रालब्ध ऊंची करने की है ।
50We have to make our actions (karma) elevated and make the reward elevated.
50तो बाप भी तो आता है ना कर्म बनाने के लिए जब ड्रामा है तो फिर उसका आना क्यों ना हुआ होना चाहिए फिर उनको आ करके हमको ज्ञान देना उनको भी यह मेहनत करने की क्या जरूरत है ।
51The Father also comes to give us the knowledge of karma. 52If it were the drama, why is His coming recorded? 53In that case, what would be the need for Him to come and give us knowledge and make effort?
51नहीं, उनका भी आना यह पार्ट है, हमको आकर के ज्ञान देना, यह पार्ट है न, तभी तो उसकी महिमा है ना नॉलेजफुल ।
54However, He also has this part and this is why He is praised as the Knowledge-full One.
52तो नॉलेजफुल है तो अपने लिए तो नहीं है ना कि भाई उनको सब जानकारी है ।
53जानता है, अपने लिए जानता है तो क्या हुआ लेकिन वह जो जानता है वह आ करके समझाता है और समझाता है हमको, जो हम नहीं जानते हैं तो हम नहीं जानते हैं उन्हों को आ करके समझाया है ।
54उनकी समझ उनके पास है तभी उनकी महिमा है कि नॉलेजफुल है ।
55बाकी ऐसे नहीं है वह हम सब को जानता है अपने लिए तो हमारे लिए क्या हुआ ।
56नहीं, उसने हमको उसी समझ का बल दिया है, जिसके आधार से हम भी ऊँचे उठे हैं तो इसी कारण उनकी महिमा है, तो परमात्मा को भी कर्म करने की ड्रामा में ही समझो परंतु उनको भी तो अपना कर्म करने का पाबंदी है ना, वह भी तो बंधा हुआ है ना ।
55So, God too is bound to perform actions in the drama. 56He too is bound by this. 57Similarly, we too are bound by our karma.
57इसी तरह से हम भी अपने कर्म करने के लिए बंधे हुए हैं, तो हमको दूसरी बात को ना समझ या उन्हीं बातों में ना मूंझ करके हमको अभी क्या करने का है, हमको अभी अपना कर्म स्वच्छ बनाने का है ।
58So, instead of becoming confused about anything, you have to make your actions clean and pure.
58तो इसीलिए ऐसा नहीं कि ड्रामा में होगा तो अपने आप ही स्वच्छ हो जाएगा नहीं, हमारा काम तो है ना करना, बनेगा भी कैसे अपने आप नहीं बनेगा वह भी हम करेंगे ना । 59तो हमको अपना अटेंशन जो है वो करने के ऊपर देने का है ।
59It isn’t that if it is in the drama, they will automatically become pure and clean; no.
60हमको अपना कर्म करके अपने को स्वच्छ बनाना है ।
60Our duty is to perform elevated actions and to cleanse ourselves.
61अभी देखो हमको समझ मिली है, हमारा काम क्या है, अभी हम ऐसे तो नहीं समझेंगे कि जो होना होगा वह अपने आप होगा ।
61It isn’t that whatever is to happen will happen by itself; no.
62नहीं, हमारा काम है जो समझ है उस पर चल करके काम करना न ।
62We have to understand our work and do that accordingly.
63तो हमारा काम है उसी समझ को ले करके अभी अपने कर्म को स्वच्छ बनाना ।
64हमारा अटेंशन इसी कर्म पर है कि हम अपने को स्वच्छ बनाएं ।
65तो हमारा काम है काम करके उसको प्राप्त करना, जो करेंगे तो जरूर पाएंगे ।
63Those who do something will definitely receive the return of it.
66बाकी यह तो जानते हैं कि हाँ यह ड्रामा है, यह खेल है, आदि से अंत तक है कैसे चलता है वह नॉलेज है जिसको समझने की बात है, बाकी ऐसा नहीं है कि हम उसके लिए चुप हो करके बैठें या कुछ ना करें तो इन बातों में अगर यह बात किसी को नहीं भी समझ में आती है ना, तो मूंझना नहीं है ।
64But yes, you do know that this is the drama, that this is a play, and that you have to understand the knowledge of how it continues from the beginning to the end.
67आप उसको छोड़ कर के, यह कोई पॉइंट ऐसी भी नहीं है कि कोई जरूरी है । 68नहीं, यह पॉइंट ना समझ में आती है तो उसको छोड़ कर के अपना अटेंशन अपने कर्म पर रखो कि हम जो करेंगे सो पाएंगे ।
65If you are unable to understand something, put that aside and pay attention to your actions. 66Whatever we do, we will receive the return of it.
69यह तो गीता में भी है न कि जीवात्मा अपना शत्रु अपना मित्र है तो करने के ऊपर सारा आधार है न ।
67It is also mentioned in the Gita: A soul (in a body) is his own enemy and his own friend.
70तो हमको अपना पुरुषार्थ करना है इसीलिए पहले पुरुषार्थ पीछे प्रालब्ध ।
68So, we have to make our own effort. 69First there is the effort and then the reward.
71भले पुरुषार्थ और प्रालब्ध का है बना बनाया परंतु वह बना भी कैसे हैं, जो करेगा सो पाएगा, इसी के आधार पर बना हुआ है परंतु करेंगे तब पाएंगे ना ।
70Whatever we do, we have to receive the reward of that.
72बना हुआ भी ऐसे ढंग से है कि हम जो करेंगे सो पाएंगे ।
73अगर करेंगे नहीं तो पाएंगे नहीं तो इसीलिए ऐसा नहीं है जो बना हुआ होगा वह आपे ही होगा ।
71If we don’t do anything we won’t receive anything.
74नहीं, वह भी हमारे करने से होगा ना और ऐसा भी नहीं है की करना भी हमारा अपने आप होगा, वह तो हम समझेंगे, करेंगे, ध्यान देंगे, अटेंशन देंगे तब तो करेंगे ना । 75तो इसीलिए हम को सारा आधार अपने करने के ऊपर रखना है और करना ही फिर पाना है ।
72
76इसीलिए इन बातों में भी कोई अगर अटकता हो तो इनमें मूंझो नहीं ।
77इनको छोड़ कर के अपने कर्म के ऊपर रहो कि हम जो करेंगे सो पाएंगे और बिना किए पा तो सकते ही नहीं है ।
78लेकिन अभी सिर्फ रोशनी मिलती है कि करना क्या है ।
79क्योंकि मनुष्य तो समझते हैं कि भाई अच्छा करना है ।
80अच्छा भी क्या है, अच्छे का भी नॉलेज होना चाहिए ना की अच्छी चीज क्या है, सबसे श्रेष्ठ कर्म कौन से हैं, वह बैठ कर के भी बाप समझाते हैं कि कर्मों को श्रेष्ठ बनाना जिसके ऊपर फिर कोई कर्म करने की जरूरत ना रहे, ऐसे श्रेष्ठ कर्म कौन से हैं ।
73Now, we have to make our actions so elevated that there will be no need to do anything beyond that. 74However, what actions are the most elevated of all?
81तो बाप बैठ करके उसकी अभी नॉलेज देते हैं की सबसे ऊँचे में ऊँच और श्रेष्ठ में श्रेष्ठ कर्म कौन से हैं । 82तो श्रेष्ठ कर्म तभी हैं, जिस कर्म करने से फिर हमको कोई बात करने की दरकार ना रहे तो वह चीज अभी सीखलाते हैं कि कंप्लीट पवित्र कैसे बनो । 83तो अभी कम्प्लीट पवित्र बनाने की अथवा कंप्लीट अपने श्रेष्ठ कर्म बनाने की अभी नॉलेज बैठकर के बाप देते हैं जिससे हमारे कैसे पिछले पापकर्म भी दग्ध होवे और आगे के लिए भी हमारी कंप्लीट पवित्र कर्म बने, जिसके आधार से हम उसी पवित्रता की प्रालब्ध को पाएं जिसमें फिर हमारे को कोई कर्म करना ना पड़े । 84बाकी हम जो करते आए हैं ना वह अल्पकाल के हैं, वह श्रेष्ठ कर्म सदा के लिए नहीं है, यानी सदा की प्राप्ति के लिए नहीं है इसीलिए उनको कहेंगे अल्पकाल की प्राप्ति के कर्म ।
75The Father is now giving us that knowledge and teaching us how to become completely pure. 76The Father is now giving us knowledge for us to become completely pure and to make our actions elevated so that our past sins are burnt away and that our actions for the future are completely pure and on the basis of those we receive the reward of purity where we won’t have to perform actions. 77Whatever we have been continually doing was for a temporary period.
85तो उनको हम श्रेष्ठ कर्म जो कंप्लीट कर्म है उसके भेंट में नहीं कहेंगे ।
78Those elevated actions were not for attainment for all time.
86वह है थोड़ा बहुत अच्छा करता है जैसे किसी ने दान किया मानो, अच्छा दूसरे जन्म में क्या होगा, उसको धन दान करने के एवज में उसको अच्छा धन मिलेगा, तो चलो साहूकार होगा ना, बस न, इतना ही उसको फल मिला या जो भी जितना थोड़ा बहुत अच्छा किया उसका मिला लेकिन उससे ऐसा तो नहीं है ना कंप्लीट पवित्रता का बल मिलेगा, जिससे सब कुछ प्राप्त हो ।
79If someone does a little good - for instance, if someone donates something - in return for donating wealth he receives wealth and becomes wealthy; he only receives that much fruit. 80By doing so, it isn’t that he receives the power of complete purity through which he attains everything; no.
87नहीं, धन मिला तो कोई रोग होगा, फिर कोई ऐसी कर्म की भी हानि होगी जिससे फिर कोई ना कोई दुःख रहेगा, तो यह सब चीजें जो है कि सभी चीजों का सुख प्राप्त रहे उसको कहा जाएगा कर्म श्रेष्ठ ।
81If someone has wealth, but doesn’t have a body that is free from disease, there would be sorrow experienced. 82When you have happiness of everything, you can say that your actions are elevated.
88तो बाप बैठ कर के अभी वो चीज हमको सिखाते हैं जिससे हमारे सर्व कर्म अथवा श्रेष्ठ कर्म जिसको कहा जाता है, सब तरह से कर्मों की श्रेष्ठता की प्रालब्ध हमको प्राप्त रहे और जिस प्रालब्ध से फिर हम सदा सुख को प्राप्त करते रहें तो सदा सुख और सर्व सुख प्राप्त करने के लिए हमारे ऊँच में ऊँच जो कर्म है ना वह बैठकर के बाप सिखाते हैं इसीलिए कहा जाता है कि जो बाप ने बैठकर के कर्म सिखलाया न इसीलिए अपने कर्मों के लिए कहा है कि मेरा कर्मयोग सबसे श्रेष्ठ है और उसके ऊपर फिर कोई ऐसी चीज नहीं है । 89तो मैं तो आकर के कर्म करना सिखलाता हूँ, वह सबसे श्रेष्ठ है और उसको ही कहा कि यह कर्म योग राजयोग यानी जिस प्राप्ति का राजाई का अथवा जो मैं स्थापित करता हूँ राजाई अथवा जो मैं आकर के दुनिया बनाता हूँ उसी श्रेष्ठ दुनिया के ऊपर फिर कोई दूसरी तो बात है ही नहीं ना ।
83So, the Father sits and teaches us to perform actions that will enable us to attain the reward of the greatness of actions and from the reward of those, we will constantly continue to receive happiness. 84 85So, the Father has taught you such actions and this is why He says: The Karma Yoga and Raja Yoga that I teach you are the most elevated. 86There is nothing higher than these.
90तो यह सभी चीजों को समझना है कि अभी जो हमको बाप के द्वारा यह कर्म करने की जो शिक्षा मिलती है यह है सबसे ऊँच, इसीलिए इसको कहा है कि कर्म श्रेष्ठ अथवा कर्म की ऊँच प्रालब्ध अभी बैठकर के बाप सिखाते हैं ।
87So, the teachings to perform karma that we receive from the Father are the highest of all.
91तो इन बातों में अपनी बुद्धि रख करके कि हमको अपना कर्म करना है और जो अभी बाप के द्वारा यह मत मिल रही है ये उनकी मत है ना, बाप की डायरेक्ट तो अभी जो उसकी मत मिल रही है उसे लेकर के अभी हमको अपने कर्मों में रहना है । 92बाकी तो बाप बैठकर समझाते हैं कि तुमने कभी अच्छा कर्म किया था और ऐसी प्रालब्ध पाई थी, इसका भी तो निशान है ना कि तुमने यह किया था तो वो ड्रामा भी समझाते हैं कि ऐसे नहीं है, जो चीज हुई है वह फिर होने की है उसी आधार पर समझाते हैं कि नहीं, तुम आगे ऊँचे थे फिर देखो कैसे तुम्हारा ये सब नीचे चले आए, अभी फिर आकर के तुम्हारा वो टाइम हुआ है ।
93अभी फिर मैं आया हूँ तुमको ऊँचा उठाने के लिए तो ये सारा चक्कर है सृष्टि का, वह बैठ करके समझाते हैं कि कैसे तुम ऊँचे थे, अभी नीचे हुए हो फिर ऊँचे होते हो, वह चक्कर बैठकर समझाते हैं ।
94बाकी हमको करना तो कर्म है ना ।
95ऊँचा उठेंगे तो भी तो कर्म से ना फिर एक-दो ने भी अपने कर्म उल्टे बनाए तभी तो गिरे ना कारण तो फिर भी कर्मों का देना पड़ेगा ना । 96तो इसीलिए इन बातों में भी भाई ड्रामा है, ड्रामा के कारण ही हम गिरे और ड्रामा से ही हम चढ़ेंगे ।
88Since we have fallen through our wrong actions, we will be uplifted through our (elevated) actions, it would have to be said that it is because of our actions, but you would still say that it was because of the drama that you fell and that because of the drama you will rise.
97लेकिन ड्रामा से भी चढ़ेंगे कैसे, उनके भी कोई नियम है ना, तो उन नियमों को भी समझना है कि हम करेंगे तो पाएंगे ।
89However, there are some principles of the drama, and so we have to understand those principles: If we do something, we will receive the reward of it.
98अगर नहीं करेंगे तो समझेंगे इसका ड्रामा में पार्ट नहीं है ।
90If you don’t do something, it would be understood that it was not your part in the drama.
99ड्रामा तभी समझेंगे कि अगर ये अच्छा पुरुषार्थ नहीं करता है तो समझेंगे हाँ इनका ड्रामा में पार्ट नहीं है, परंतु हमको करने के लिए तो करना पड़ेगा ना ।
100पुरुषार्थ करेंगे तब तो पाएंगे ना ।
101अगर अभी हम हैं, हम समझे कि अगर हमारा ड्रामा में होगा तो फिर हम अपने आप ही चढ़ेंगे फिर तो कुछ नहीं करें ।
102तो फिर हमारी क्या पड़ी है इतनी मेहनत करें, ये क्यों हम करते हैं । 103ये इसीलिए करते हैं क्योंकि समझते हैं कि हम जो करेंगे सो पाएंगे ।
104तो अपने करने के ऊपर ही तो पाने का आधार है न ।
105तो यह समझने की बात है ।
106ऐसे नहीं कि हमारे ड्रामा में होंगा तो हमारे से अपने आप ही होगा ।
91It isn’t that if it is in the drama, you will automatically do it. 92How would it happen by itself?
107आपे ही कैसे होगा, वह भी तो हम सोचेंगे हमको यह करना है, यह राइट एक्शन है, यह रॉन्ग है, यह करना है, यह नहीं करना है, यह तो हम समझ ले कर के अपने पुरुषार्थ से चलेंगे ना ।
93This is something we have to think about: These are right actions and I have to perform them. 94These are wrong actions and I must not perform them. 95This is something we have to understand and make effort accordingly.
108अगर हम खाली उसी पर बैठ जाएं कि जो होना होगा वह अपने आप ही होगा हम बैठ जाते हैं, फिर तो सब में बैठो । 109फिर धंधा भी नहीं करो, कहो जो होना होगा, यह काम काज जो होना होगा, पैसा कमाना होगा तो आपे ही होगा और बैठ जाओ, देखो कमाते हो ।
96If we were just to sit back and think that whatever is to happen will happen automatically, we would just sit back with that awareness about everything, we wouldn’t do any business, and we would say that whatever is to happen will happen. 97If we are to earn money, it will happen.
110तो बैठ जाओ चुप करके, फिर तो सभी बात मैं बैठो ना, सिर्फ इसी बात में क्यों, फिर तो सभी करो यह जो शरीर निर्वाह के लिए काम करते हो ना, उसमें भी ड्रामा रखकर बैठ जाओ कि नहीं, हमारा होना होगा तो अपने आप होगा, हमको पैसा कमाना होगा फिर अपने आप कमाएंगे, कर सकते हो?
98In that case, just sit back and don’t do anything. 99Then see; would you be able to earn?
111नहीं, जैसे उसमें सोच के, समझ के चलना पड़ता है, फिर कोई रिजल्ट हो जाती है तो वहाँ समझते हैं कि चलो इतना ही था, जो होना था वह हुआ ।
100So, you have to think about this and then move along according to that, and then whatever result you get, you think that was all the result that there was supposed to be. 101Whatever had to happen happened.
112बाकि ऐसे नहीं है कि करने के समय हम उस पर बैठ जाएँ की होना होगा तो होगा खाना पीना सब, फिर तो कमाओ भी नहीं, फिर तो कुछ नहीं करो, होना होगा तो होगा, हम तो चुप करके बैठ जाएँ फिर तो कुछ नहीं काम कर सकेंगे, फिर तो खाना भी न खाओ, पकाओ भी नहीं, फिर तो कमाओ भी नहीं, फिर तो कुछ नहीं करो, होना होगा अपने आप होगा फिर तो चुप करके बैठ जाओ, परंतु ऐसा होता नहीं है ।
102It isn’t that at the time of doing it we just sit down quietly. 103In that case, don’t even eat! 104Don’t cook. 105Don’t earn anything, don’t do anything, because whatever is to happen will happen automatically. 106However, it is not like that.
113करना ही पड़ता है, कर्म तो चलता ही है ना ।
107You have to do something. 108Actions continue all the time.
114तो जो चलता है उसी में हमको समझना है और समझ कर के अपने कर्म को श्रेष्ठ बना करके चलना है जिसकी प्रालब्ध हमको श्रेष्ठ पानी है ।
109So, think about what’s going on; let your actions be elevated and then continue to move along through which you will receive an elevated reward. 110
115तो वह तो हमको समझ भी देनी पड़ेगी, करम भी करना पड़ेगा, पुरुषार्थ भी रखना पड़ेगा, रॉन्ग ओर राइट को सोचना समझना और उसी पर हमको चलना भी पड़ेगा कि राईट क्या है, जो हमको करने का है ।
116तो यह सब करने के ऊपर है इसीलिए अपना आधार सारा कर्म के ऊपर है ।
117बाकी तो हाँ यह टोटल समझते हैं कि यह वर्ल्ड की हिस्ट्री कैसी है, ये शुरू कैसे होती है, पूरी कैसी होती है फिर इसका भी टाइम है जो बैठकर के बाप समझाते हैं । 118अभी वह टाइम पूरा हुआ है फिर से अपना आदि सनातनी वो जो पहली पहली दुनिया थी उसका अभी टाइम आता है तो यह वर्ल्ड हिस्ट्री रिपीट होती है ।
119तो यह सभी हिसाब हिस्ट्री का भी समझना है, और उसमें हमारा डिटेल्स जो चलता है वह कम होता है वह डिटेल्स चलने से ही तो हमारे कर्म ऊँचे फिर हमारे कर्म नीचे उसी के आधार पर ही तो हमारी यह सारी हिस्ट्री वर्ल्ड की चलती है । 120हमारे नीचे के कर्म होते हैं तो हम नीचे हो जाते हैं मानो वर्ल्ड ही नीचे हो जाती है अर्थात उसकी लाइफ ही नीचे हो जाती है, हमारे कर्म ऊँचे होते हैं तो देखो वर्ल्ड ऊँची हो जाती है अर्थात दुनिया स्वर्ग हो जाती है, है तो हमारे कर्म के आधार पर न ।
111The basis of the history of the world is also our individual actions.
121स्वर्ग और नरक ये आधार कैसे बना, नर्क कैसे बना ।
122बनी बनाई तो नहीं पड़ी है न, बनती है, परन्तु बनती कैसे है कर्म से ।
123नर्क भी बनता है तो हमारे कर्म से और स्वर्ग भी बनता है हमारे कर्मों से ।
124तो कर्म से बनता है, ऐसे नहीं स्वर्ग बना रखा है, नरक बना रखा है सब बना बनाया पड़ा है ।
125नहीं, वो टाइम अनुसार चेंज भी होती है तो भी हमारे कर्म से होती है ना ।
126तो यह सभी चीजों को समझना है इसीलिए जो चीज हमारे कर्म के आधार से बनने वाली है तो हमको आधार पकड़ना है कर्म का ।
127भले बना बनाया है परंतु आधार कर्मों का है, जो हम करेंगे उससे बनेगा ।
128बना बनाया भी उसी तरीके से बनता है हमारे कर्म से ।
129तो नर्क और स्वर्ग भी हमारे कर्म से बनता है, वो हम बुरे कर्म करते हैं तो दुनिया देखो नर्क हो जाती है और फिर हम अच्छे कर्म करते हैं तो दुनिया स्वर्ग होती है तो दुनिया की बात है ना ।
130तो यह दुनिया की हिस्ट्री भी है और फिर हमारे इंडिविजुअल कर्म के ऊपर भी सारा आधार भी है इसीलिए इन सभी बातों को भी अच्छी तरह से समझ कर के और अपने ऐसे पुरुषार्थ को चलाना है ।
131बाकी इसमें ऐसा नहीं है कि होना है, दुनिया स्वर्ग होनी है तो हम अपने आप आ जाएंगे ।
112It isn’t that heaven is going to come and so we will automatically go there.
132नहीं, इसके लिए ही तो हम माथाखुटी करते हैं कि हम स्वर्ग में अपना अधिकार लगाएं और स्वर्ग में भी ऊँचा स्टेटस पाएं, उसके लिए इंडिविजुअल पुरुषार्थ करें ।
113No, that is why we are beating our heads (making effort), so that we can claim our right to heaven. 114The effort we are making is so that we can claim a high status in heaven.
133बाकी बाप बनाता है, अपने आप होगा तो फिर तो हम भी चुप करके बैठ जाएं ।
134फिर तो हम खाएं पियें मौज करें, जैसे चले वैसे चले फिर तो कोई बात ही नहीं ।
135हम तो अपने आप आ जाएंगे फिर तो कर्म का कुछ रहा ही नहीं ना ।
136नहीं, हमारे कर्मों से ही तो होगी ना इसीलिए परमात्मा को भी तो हमारे कर्म बनाने के लिए आना पड़ता है । 137उसको भी मेहनत करनी पड़ती है हमारे कर्मों के लिए ।
115It is for this that God has to beat His head with us and we also have to make effort.
138लेकिन ऐसे ही अगर होना होता तो वह ऐसे ही कर लेता, तो हमारे से माथाखुटी क्यों करता ।
139उनको भी तो हमारे से माथा लगाना पड़ता है ना और हमको भी तो अपना इंडिविजुअली मेहनत करनी पड़ती है ना ।
140तो आधार है ना ।
141उनको भी उसी का आधार देना पड़ता है कर्मों को आ करके और हमको भी अपना इंडिविजुअली कर्म बनाने पड़ते हैं इसीलिए हम करेंगे तब पाएंगे ।
142भले बनेगा भी परन्तु कैसे, बनने का भी तो नियम है ना तो उसको भी उसी नियम से बनाया गया है परमात्मा को भी, देखो कर्म करा करके उसी नियम से आ करके हमको बनाना पड़ता है बाकी ऐसा नहीं है बना पड़ा है अपने आप बनेगा ।
143नहीं, अभी मकान है, ऐसा थोड़ी छू मंत्र से बन जाएगा ।
116For instance, this building has not been constructed by magic.
144बनेगा जैसा नियम होगा वैसे ना कि हाँ भाई इसका ऐसे फाउंडेशन डाला जाता है, ऐसा किया जाता है, जैसी बनाने की तरकीब होगी उसी तरकीब से बनेगा ना, तो तरकीब को तो लेना पड़ेगा ना ।
117According to the discipline for this, a foundation had to be laid. 118The building would be built with the method of building it.
145बाकी ऐसे थोड़े है की बना हुआ होगा तो ऐसे अपने आप ही बन जाएगा ।
119You cannot say that it would have been built at some time and so it will be built by itself.
146यह चीज अगर बननी होगी तो अपने आप ही बन जाएगी ।
147नहीं, वो जिस तरकीब से बनने की है, जिस नियम से बनने की है उसी चीज को उसी नियमों से बनाना होगा ना ।
148तो मनुष्य की लाइफ इसी नियम से बनने की है तो उसको भी तो अपने कर्म के नियम से बनाना होगा ना ।
120So, on what principles is human life created? 121That also has to be created on the basis of the principles of actions.
149तो हमको करना होगा इसीलिए हमारा अटेंशन जो है वह अपने करने के ऊपर होना चाहिए ।
150बाकी तो जानते ही हैं कि हाँ यह तो ड्रामा है और सृष्टि चक्र है वह कैसे होता है वो कैसे ऊँचा उठता है और कैसे ये नीचे आता है परंतु अभी तो ऊँचा उठने का टाइम है ना तो वह भी सभी बात को छोड़ करके अभी जो टाइम है हमारे उनसे ऊँचे उठने का है इसीलिए हमको ऊँच कर्म करना ही चाहिए ।
122But yes, you know that this is the drama and that the world cycle continues to turn, how it comes down and how it rises again. 123It is now the time to rise high. 124This is why we must perform elevated actions.
151ड्रामा अनुसार अभी हमारी चढ़ती कला का टाइम है तो हमको चढ़ना ही चाहिए ना ।
125 126According to the drama, it is now the time for our ascent, and so we have to ascend.
152अगर चढ़ती कला के समय पर हम अपने कर्मों को श्रेष्ठ ना करेंगे तो चढ़ेंगे कैसे, इसीलिए हमको अपने अपने कर्म के ऊपर यह आधार रखना है ।
127If we don’t make our actions elevated at the time of ascent, then how would we ascend? 128Therefore, we first have to base everything on our actions.
153बाकी ऐसा नहीं है कि अपने आप होगा, अपने आप कुछ होता नहीं है ।
129You cannot say that everything will happen by itself.
154कुछ होता है?
130Nothing will happen by itself.
155खाना-पीना भी करते हो, अपने आप होता है?
131When you eat and drink, does that happen by itself?
156खाना है, हमको मिलना है तो बनके आएगा हमारे आगे?
157अन्दर जाना होगा, अपने आप जाएँगे? 158अपने आप होता है कुछ?
132Will it go inside you by itself?
159करना होता है ना, बनाना होता है उसको खाना होता है और उनको सब तरह से चलाना होता है ।
133First, you have to prepare it and then you have to eat it.
160हर चीज को हमको एक्शंस में लाना ही पड़ता है ।
134Everything has to be put into action in this way.
161तो जबकि हर चीज एक्शन से चलती है तो हमको अपना ऊँचा उठने के लिए भी तो करना है ना ।
135Therefore, since everything is based on actions, then, in order to rise high we also have to perform actions accordingly.
162उस पर फिर क्यों, हम कैसे बैठ जाएं कि नहीं होना होगा तो होगा ही ।
163फिर तो सब बात में होना होगा । 164फिर तो सब के लिए कहो कि सब कुछ अपने आप होगा, चलना होगा, होना होगा सब ।
165सब बात में ऐसे कहो बाकी बैठ जाओ, परंतु हो ही नहीं सकता है ना ।
166तो ऐसे थोड़ी बाकी बात में करेंगे और इस बात में कहेंगे कि नहीं, होना होगा तो होगा, हमारी किस्मत में होगा, हमारे नसीब में होगा या हमारे ड्रामा में होगा तो होगा, नहीं तो फिर उसके लिए बैठ जाना है ।
136It isn’t that you can say that you will do whatever is in your destiny. 137Or, some people say: My fortune is such! 138You mustn’t just say it is your fortune and leave it at that.
167नहीं, जैसे सब बात करते हो तभी होता है, तो यह भी तो बात करने से होगी ना । 168यह फिर खास ऐसी कैसे होगी कि अपने आप हो । 169इसका मतलब यह हो जाता है कि कई समझते नहीं है कि यह बात भी हमारी ऐसे जरूरी है जैसे हम जीवन के दूसरे जरूरी काम करते हैं खाना-पीना पकाना कमाना सब जो कुछ करते हैं जरूरी समझकर करते हैं यह भी वैसे ही चीज है ।
170इसको भी हमको कर्म से बनाना है । 171बाकी ऐसे नहीं है यह अपने आप होगा ।
172अपने आप होगी तो ड्रामा में सब अपने आप होने का होगा ना ।
173फिर तो कमाओ भी नहीं, बैठ जाओ, होना होगा तो आपे ही करेंगे । 174आप ही करेंगे?
175नहीं, जरूर सोचेंगे क्या करना है, कैसे करना है, उसके लिए यह करना है, बच्चे हैं पालना है, रिस्पांसिबिलिटी है, यह सब सोचेंगे, करेंगे तभी तो होगा ना, उसके लिए जाएंगे और बैठे हो यहाँ, समझते हो नहीं हमको कमाने के लिए जाना होगा आपे ही जाएंगे, आपेही कैसे?
139If you have children, it is your responsibility to sustain them, and so you have to do everything. 140We will have to go to work to earn money. 141How can it happen by itself?
176उठेंगे, टाइम हुआ है, जाना है, दफ्तर है, ऑफिस है सब एक्शंस सोच के करना पड़ता है ना, तो फिर करना ही पड़ता है ना ।
142You will wake up, then it will be time for you to go to work or your office etc. 143You have to think about all these actions and do everything accordingly.
177तो जैसे सभी बात करने से होती है, यह भी तो करने की बात है ना ।
144So, just as everything happens by being done practically, so too, it is also a matter of doing this.
178इसमें फिर ऐसे क्यों कि किस्मत में होगा तो होगा, इसमें किस्मत क्यों ।
145Then, why do you say that you will do it if it is in your destiny?
179किस्मत तो फिर सबमें करो तो खाली इसमें क्यों?
146All activities are included in actions.
180नहीं, जैसे और एक्शंस में सब एक्टिविटी चलती हैं, वैसे ही इसमें भी अपनी एक्टिविटी को राईटिअस वे में चलाना है, तो यह समझना है उसी तरीके से चलाना है ।
147Similarly, you have to make all your activity righteous.
181हर बात में ऐसा होता है हम को डॉक्टर बनना है या इंजीनियर बनना होगा तो क्या अपने आप बन जाएगा?
148For instance, if you want to become a doctor, it isn’t that by thinking you want to become a doctor you will become that; no.
182नहीं, उसके लिए जरूर है कि हम कोशिश रखेंगे, पुरुषार्थ रखेंगे, पढ़ेंगे, उसमें अटेंशन देंगे, वह सब करेंगे, तभी तो होंगे ना, सब बात कैसे चलती है ।
149You would definitely make effort for that, you would study and pay attention to that.
183चलो, होती है तो कहते हैं हाँ भाई यह किस्मत में था ।
150
184यह चीज नहीं हुई तो कहेंगे अच्छा, न था ड्रामा में इसीलिए किस्मत कहो, ड्रामा कहो बात एक ही है, वह तो होती है रिजल्ट में, जब किसी बात का रिजल्ट होता है ।
185बाकी हमको करना तो हर काम तो करने की तरह से करना पड़ता है ना ।
186तो उसमें तो हमको अपना पुरुषार्थ लगाना ही पड़ेगा, उसमें सोचना है, समझना है रोंग और राइट को और समझ करके चलना है तो अभी जो बुद्धि मिली है उसको लेकर के चलना है ।
151So now that we have received an intellect we have to do everything on that basis.
187उससे ऐसा नहीं है की होगा तो होगा, फिर तो सब में बैठ जाओ ।
188फिर तो धंधे धोरी में भी कहो होगा तो आपे ही कमाई हो जाएगी, बैठ जाओ ।
189बैठो तो सब में बैठो, उठो तो सब में उठो ।
190बाकी ऐसे नहीं उसमें उठो उसमें सोंचो, उसमें करो फिर इसमें क्यों ।
191इसमें क्यों बैठ जाते हो कि होगा किस्मत में तो पैसा भी कमाएंगे, बैठ जाओ घर में, देखो होगा?
192लव जी?
193नहीं, तो करना पड़ेगा ना ।
194तो जैसे उस काम के लिए करना है, वैसे यह भी तो अपने जीवन के लिए ही तो करना है न ।
195ऐसा समझो, हम मोटर चलाते हो और बच्चा आ गया तो उसका एक्शन तो अच्छा था मोटर चलाने का, वह बच्चा कट जाता है, देखिए वह भी तो हिसाब है ना ।
196अभी कोई बच्चा कट गया, हम समझेंगे कि इसको कोई दुःख दिया था या इसने हम को कोई दुःख दिया था अभी रिटर्न उसको हमसे मिला तो वह हो गया कुछ अगले कर्मों की हिसाब-किताब की भी सब चलती है ना ।
152It is a matter of karmic accounts of our past births.
197हमने कभी किसको दुःख दिया है तो हाँ हमको फिर दूसरे जन्म में उससे लेना है तो यह लेनदेन का भी जो हिसाब है कर्मों का तो वह भी तो चल रहा है, हम तो अभी सोच के अच्छे चले लेकिन हमसे कुछ उसको कुछ ऐसा पहुंचा, हमारे से कुछ किया हुआ है तो हमारे से फिर मिलना है तो फिर वह चला, तो वह तो कर्मों का हिसाब है ना तो फिर वह सारी कर्मों की फिलॉसफी है कि कितने जन्मों का हमारा खाता चलता है ।
153If we have given sorrow to someone in our previous birth, we will definitely have to receive sorrow from that person in the next birth. 154So this account of give and take is also based on karma. 155We were moving along thinking about doing something good, but if someone received sorrow through that, then that person must definitely have done something. 156That is why he received the return of that. 157So, all of this is the philosophy of karma. 158Our account of many births continues.
198ऐसा नहीं जो हमें अभी करते हैं अभी ही पाते हैं नहीं, हम जो करते हैं वह हमारे रिजर्व में बहुत कुछ खाता कई जन्मों का चलता रहता है इसीलिए हम बहुत जन्मों के हिसाब को भी पा रहे हैं ।
159It isn’t that whatever we do now, we receive the return of that now; no. 160Whatever we do, it remains in our account in reserve for some births. 161Therefore, we are now receiving the account of many births.
199समझो इस जन्म में कोई बुरा काम नहीं किया, हम तो सोचेंगे हमने कोई बुराई नहीं की है लेकिन हमारे पास क्यों यह कर्मभोग या यह बुराई सब क्यों आती है तो हाँ यह हमारा कोई अगले जन्म का भी तो पाप है ना ।
162 163For instance, if you haven’t performed any such bad actions in this birth, you would therefore think that you haven’t done anything bad, so why has this suffering of karma come to you? 164However, there are some sins of your previous births that still remain.
200कई जन्मों का बोझ है सिर पर तो हो सकता है उसकी भोगना भी तो अभी हमको भोगनी पड़ेगी ना ।
165There is the burden of sin of many births on your head. 166So, it is possible that we have to settle the account by suffering for that now.
201तो ऐसे नहीं है की एक जन्म का खाता एक ही जन्म में खत्म होता है कई जन्मों का खाता हमारा बहुत बड़ा बनता है, उसको भोगने में हमारी एक आयु पूरी भी नहीं होती है इसीलिए हमारा खाता स्टॉक में रहता चलता है कई जन्मों का इसीलिए हम उसको भोगते हैं तो उसका मतलब यह नहीं है कि हम इस जीवन को देखकर भाई इस जीवन में तो हम किसी से बुराई नहीं की है या कोई ऐसा बुरा कर्म नहीं किया है लेकिन पाते क्यों हैं बुराई ।
167It isn’t that the account of one birth is settled in one birth. 168We have a huge account of many births. 169One life is not enough for us to settle all of those accounts, and this is why the stock of accumulation remains in our account for many births. 170This is why we suffer and settle. 171So, we mustn’t just look at our present life.
202पाते है क्योंकि कोई अगले जन्मों का हिसाब है ।
203जरूर अगले जन्म में कोई ऐसा कर्मों का हिसाब किताब है जिसको भी अभी पाने का ही है ।
204तो कोई हिसाब अगले जन्मों का आते तो हैं न ।
205तो यह आ गया, हमने तो सोचा नहीं कि मोटर के नीचे किसको लाऊँ लेकिन हाँ कुछ उसका दुःख दिया हुआ है, फिर हमसे उनको मिलना है अंजानाई में ।
206एक होता है जानबूझ कर किसका खून करना, एक होता है अन्जानाई से तो ऐसा ही कोई हिसाब होगा ।
172It is one thing to kill someone deliberately, and another thing to kill someone accidentally.
207कुछ ऐसा हिसाब किताब का बना होगा जिससे कुछ उसने दुःख दिया है उसको मिलना होगा मिला है ।
173So, there must be some karmic account created accordingly there too.
208तो यह जो हुआ वह तो समझते हैं की ये कुछ कर्मों का हिसाब है तो यह सभी चीजें कर्म का हिसाब भी तो चलता है ना, बाकी हम सोचते हैं अच्छा चले, चलना तो है ना हमको सोचकर ।
209लेकिन सोचकर चलने पर भी कुछ ऐसा हो गया यहाँ कहेंगे ड्रामा ।
210समझो हो गया कोई एक्सीडेंट, चलो ऐसा कुछ हो गया जैसा आपने कहा, तो हम उसको क्या कहेंगे ड्रामा, कोई हिसाब था ।
174For instance, when an accident takes place, what would you call that? 175That it was some account in the drama.
211कोई कर्म का ऐसा किया हुआ था मेरा उसके साथ में हिसाब किताब का था सो हुआ ।
212फिर हाँ उसके लिए हम जितना अच्छा कर सकते हैं या जितना हमारे से उसके लिए कुछ बन सके हम करें।
213परन्तु हाँ उसको कहेंगे न जो हो चुका, हमने जानबूझकर तो नहीं किया ना, हो गया, लेकिन अभी तो हमको अपने कर्मों को अच्छा करना है ना, जो अभी बनाते हैं ।
176For that, whatever good we can do, or however we are able to help in that, we should do that. 177We now have to perform good actions.
214अभी तो सोचना है, अभी तो राइटियस करो करने की है उसी राइटियस को समझना है ।
178We now have to perform righteous actions. 179So, we have to understand what is righteous.
215इसीलिए हम को अटेंशन तो देना पड़ेगा ना, ऐसा नहीं कि जो होना होगा होगा ।
180For that, we have to pay attention. 181It isn’t that whatever is to happen will happen.
216नहीं, हमको अपने कर्म के ऊपर ध्यान देना है ।
182No. 183Let there be attention to your actions.
217तो ड्रामा और कर्म, पुरुषार्थ और प्रालब्ध का ये ऐसा बना हुआ है इसी सभी बातों को अच्छी तरह से समझना है ।
184 185So, drama and actions, effort and reward, is a play that has been created. 186All of these things have to be understood very well.
218लेकिन करना हमको पुरुषार्थ है ।
219हमारा अटेंशन उसी के ऊपर रहना चाहिए ।
220तो यह सभी चीजों को समझने का है अच्छी तरह से ।
221अच्छा टाइम हुआ है ।
222तो इसीलिए बाप से जो कुछ अपना मिल रहा है, उसी सभी बातों को अच्छी तरह से समझ और अपना पुरुषार्थ उस पर लगाना है ।
223हमको उसमें लगे रहना है ।
224अगर यह ड्रामा की भी बात हमको ना समझ में आए तो उसको छोड़ दो कोई ऐसी जरूरी नहीं है ।
187If you are unable to understand these aspects of the drama, then leave them alone. 188They are not that essential.
225हाँ परमात्मा को जानना जरूरी है क्योंकि उससे योग लगाना है ।
189It is essential to know God because we have to have yoga with Him.
226हाँ ड्रामा है, कैसा चलता कैसा है, नहीं समझ में आता है छोड़ दो, लेकिन हमको कर्म करना है, उसको पकड़ो ।
190So, whatever you are unable to understand, leave that. 191Just concentrate on whatever actions you have to perform.
227यह अपने आप समझ में आ जाएगा कि यह कैसा बना बनाया है और उसमें फिर रह करके हमको कैसा पुरुषार्थ करना है ।
228हमारा चलता ही जीवन कर्म से है तो हमको अपने कर्म के ऊपर ही अटेंशन देना है इसीलिए हम को उसी बातों को उठा करके चलना है ।
229अभी उठा कर के रहना है क्योंकि अभी तो हमारे कर्म नीचे के हैं ना ।
230हमको तो अभी ऊँचा उठना है तो हमको तो उस चीज को ऊंचा उठाना है इसीलिए उठा कर के हमको ऊँचा बनने का है तो हमको तो वही पुरुषार्थ रखना है न ।
231अच्छा, टोली दो ।
192Achcha.
232यह भी अपनी बुद्धि की में रखने की बात है और हर बात में हम को सोच कर चलना ही चाहिए ।
193
233सोच के चलते हैं तो यह तो अभी सोच मिलता है ना कि सच्चा सोच कौन सा है ।
234राइटियस क्या है बुद्धि वह अभी मिलती है तो उस बुद्धि से काम ले करके चलना है ।
235जो भी ग्रंथ है न देखो गुरु नानक के भी ग्रंथ हैं शास्त्र, उसमें भी है आदि युग आदि है भी सत होसि भी सत, यानी उसका मतलब है जो हो चुका है वह फिर होने का ही है परंतु उसका मतलब यह नहीं है वह वर्ल्ड हिस्ट्री का कि जो हिस्ट्री हो चुकी है वह फिर होने की है, जो स्टेज हमारी ऊँची थी, चल चुकी है, वह फिर आने की है ।
236अभी हम फिर नीचे आए हैं परंतु उसका मतलब यह नहीं है ना कि जो होना होगा अपने आप ही होगा ।
237अपने आप नहीं होगा, होना होगा, होगा परंतु करने से होगा न ।
238वह भी तो हम ऊँचे उठेंगे अपने कर्म से ही ना ।
239जब ऊँचे उठे थे तभी भी कर्म से ही उठे थे तो हमको कर्म अवश्य करना ही है ।
240इसीलिए देखो उस अर्जुन के लिए भी है गीता ही सारी इसी के ऊपर है, उसने कहा कि नहीं, जो हमारे से होना होगा अपने आप होगा, वह सब छोड़ कर बैठ गया, कहा नहीं तुमको उठाना है, तुमको करना है ।
241करने के बिना नहीं होगा तो अवश्य करना है ।
242तो हमको अपने कर्म को उठाना ही है, पुरुषार्थ को उठाना ही है ।
243तो अपने पुरुषार्थ को उठाओ ।
244चलो उस पर ।
245जो है ना वो ही सब्जेक्ट है ।
246अपना मुख्य है ही यह बातें ज्ञान की और मुख्य है ही चीज की हमको चलना ही उसी के ऊपर है इसीलिए अपने कर्मों को, कर्म भी कौन सा?
247श्रेष्ठ बुद्धि रखकर के कर्म करना है और अभी श्रेष्ठ बुद्धि मिलती है कि हमारी ऊँची बुद्धि कौन सी है तो हमको उसको लेकर के चलना है ।
248तभी तो परमात्मा को भी आ करके समझ देनी पड़ती है ना ।
249अगर हमारे कर्म के ऊपर आधार नहीं होता तो वह भी कहता अपने आप ही बनेगा, तो वह भी क्यों आकर के नॉलेज देता, फिर उसको नॉलेजफुल क्यों कहते ।
250फिर पतितों को पावन करने वाला वह भी क्यों करता, अपने आप होने वाला कहो ।
251फिर तो भगवान की भी कोई अथॉरिटी रही नहीं, वह तो सब अपने आप होता है फिर तो भगवान् भी कोई अथोरिटी नहीं है ।
252फिर तो उसको ऑलमाइटी कहना भगवान कहना, फिर तो नाम उतार देना चाहिए उसका भी ।
253काहे की माईटी, ऑलमाइटी काहे की, किसकी माइटी देता है, क्या करता है ।
254फिर तो सब ऐसा ही चलता रहता है फिर कोई किसकी माइटी है ही नहीं ।
255ना हम कुछ कर्म करते, न परमात्मा हमको कराते हैं, ना वह कुछ है न कोई कुछ है, सब ड्रामा है, फिर तो चलता ही रहता ।
256फिर तो किसकी बड़ाई नहीं?
257नहीं, परंतु ऐसे नहीं है, उनका पार्ट है, वह भी हमको आकर के उठाते हैं इसलिए उनको भी नाम है वर्ल्ड ऑलमाइटी क्योंकि हमारी ऊँची दुनिया बनाता है, वह हमको शक्ति देता है इसीलिए वह भी ऑलमाइटी गाया जाता है और हम अपने कर्म श्रेष्ठ करते हैं तो हमारी भी प्रालब्ध बनती है तो सब का है ना काम, पार्ट है ।
258फिर अगर नहीं होता सब अपने आप होने का होता, तो फिर तो ना वर्ल्ड ऑलमाइटी है, ना हमारे कर्म है, ना हमारी प्रालब्ध है, कुछ नहीं है, फिर तो ऑटोमेटिक मशीन चलती रहती है ।
259फिर तो कुछ बात ही नहीं है न ।
260परंतु नहीं, भले है ऑटोमेटिक परंतु उस ऑटोमेटिक को भी किन नियमों से चलना है वह नियम भी समझने है न ।
261तो हमको पकड़ना है नियम को ।
262बाकी ऑटोमेटिक तो है अनादि, वह बात ही अलग है लेकिन हमको नियम को पकड़ना है ।
263अगर नियम को नहीं पकड़ेंगे तो फिर हम राईट नहीं चलेंगे ।
264चलेंगे ऑटोमेटिक में परन्तु ठीक नहीं चलेंगे ।
265हमारे एक्शंस टेढ़े हो जाएंगे, चलना तो है ही जरूर परंतु क्यों नहीं हम समझ कर चलेंगे तो हमारा पोजीशन अच्छा रहेगा ।
266तो समझ कर चलना चाहिए ना इसलिए अपने कर्म को और उसी सभी बातों को समझना है और अपने कर्म को श्रेष्ठ रखना है ये सभी चीजें समझने की हैं ।
267देखो इतना नॉलेजफुल, सर्वशास्त्रमई शिरोमणि गीता भगवान को भी समझाना पड़ा और जो भी आए हैं धर्म स्थापक सबने अपना-अपना काम आ कर के एक्शंस से किया है ना, अपने आप थोड़ी ही होता रहा ।
268आए हैं उन्होंने भी जितना-जितना काम किया है अपना आकर के कर्म कराकर के किया है ।
269गांधी ने भी किया कुछ भी तो अपना थोड़ा पुरुषार्थ किया न, माथाकुटी की, कुछ किया ।
270हर एक काम करने से होता है ना, अपने आप कैसे होगा ।
271तो करना है उसमें समझना पड़ता है, उसमें चलना पड़ता है, करना पड़ता है न ।
272कुछ भी करते हो तो करने की तरह से करते हो ना अपने आप कैसे होगा ।
273दो चार बच्चे संभालते हैं तो कैसे संभालते हो ।
274करते हो तभी संभालते हो ना ।
275इतने छोटे काम भी बिना करने नहीं होते हैं, एक शरीर का भी अपने संभाल भी बिना करने के नहीं होता है उसके लिए भी करना पड़ता है, समझना पड़ता है, अभी खाना है, अभी यह करना है, अभी यह करना है, वह करना पड़ता है ना ।
276चुप करके बैठो सब कुछ होता जाए, करो, देखो होता है?
277कभी नहीं होगा ।
278तो ऑटोमेटिक हो तो सब ऑटोमेटिक हो ना ।
279परन्तु ये नहीं आप कहेंगे यह भी हमसे ऐसा ही होता है, उसमें आपका सोच चलता है एक्शंस चलती है, करते हो यह करना है या नहीं करना है, सब करने की तरह से होता है न ।
280तो फिर इसमें भी ऐसा होना चाहिए ना इसको कोई अलग क्यों करते हो, वह अपना सोच समझ कर करते हो इसको क्यों समझते होना होगा, किस्मत में होगा हम बने होंगे तो बनेंगे ।
281इसमें क्यों ऐसे करते हो ।
282उसमें भी ऐसे करो न हम बने होंगे तो बनेंगे, पैसा मिलना होगा तो मिलेगा, कमाना होगा तो कमाएंगे तो करेंगे, फिर चुप करके बैठ जाओ ।
283उसमें नहीं बैठते हो फिर इसमें क्यों?
284तो यह तो सभी चीजों के लिए है ना ।
285ऐसा बाप, कैसा?
286जो हमको ऐसी समझ दे करके ऐसा ऊँच बनाते हैं और दादा जिसको बनाया है ।
287वह हमारे सामने आदर्श है कि मनुष्य को कैसा बनना है और और कैसे मनुष्य को क्या बनाया ।
288तो दादा को क्या बनाया, उसको क्या बनाया है वह हमारे सामने है कि किसको और क्या बनाया वह दिखाते हैं कि मनुष्य को मैंने क्या बनाया तो बनना है ना, वह भी कर्म से बना है ।
289ऐसे नहीं ड्रामा से बना है, कर्म से बना है कराया ना ।
290उसको भी आकर के मुझे उठाना पड़ा ना, कराना पड़ा ना ।
291तो उसके तन मन धन से जो उसने कर्म किया, उसका फल पाया है तो वह फल का साक्षात्कार है ।
292बाकी बना बनाया नहीं है ऐसे ही मुफ्त का, कर्म से ।
293तो दिखलाते हैं कि उसने भी कर्म किया है और कर रहे हैं ना हमारे सामने ।
294तो बाप दादा, बाप को भी करना पड़ता है और दादा से भी आकर के कराया है तो उसको भी कराने का काम आ करके करना पड़ता है ना, करना ही तो पड़ेगा न ।
295तो ऐसा बाप और दादा और माँ के बहुत मीठे-मीठे, ऐसे समझदार जो अपने सब पुरुषार्थ में पूरे तत्पर रहे हैं ऐसे बच्चों प्रति याद प्यार और गुड मॉर्निंग ।
194Love, remembrance and good morning to the very sweet and sensible children from Bap and Dada, and your mother.
195 196Blessing: May you be complete with all attainments and experience happiness, power and success on the basis of shrimat.
197 The children who continue to move along on the basis of shrimat considering themselves to be trustees and who do not mix the slightest dictates of their own mind or those of others with shrimat constantly experience happiness, power and success.
198While making less effort and not working so hard, they receive greater attainment.
199Only then can it be said that they follow shrimat accurately.
200However, Maya mixes the dictates of the self or of others with Godly directions in such a royal way that there isn’t the experience of all attainments.
201For this, imbibe the powers to discern and to judge and you will not be deceived.
202Slogan: A child and a master is one who makes the Father, the Bestower of Fortune, belong to Him with the power of his tapasya.
203* * * O M S H A N T I * * *