Murli de Mamma - gyan-sitar-44

२५.१०.६२

ज्ञान ही रोशनी है जिससे अज्ञान का अंधकार नाश होता है

आत्मा, परमात्मा और सृष्टि-चक्र को यथार्थ रीति जानना – यह है अविनाशी ज्ञान जो अविनाशी पिता द्वारा ही मिलता है। आत्माओं द्वारा नहीं मिल सकता है क्योंकि आत्मा जन्म-मरण के चक्र में आती है। तो यह नॉलेज जो अजन्मा है वही जान सकता है। जो कर्मों के चक्र में चलने वाले हैं उन्हों की नालेज जरुर उनके पास ही रहेगी जो चक्र से न्यारा है। तो यह अविनाशी ज्ञान अविनाशी पिता द्वारा मिलता है । इसको ही रोशनी कहेंगे जिससे अन्धियारा मिट जाता है, रोशनी में आ जाते हैं। कहा भी जाता है- ज्ञान-अंजन सतगुरु दिया, अज्ञान अन्धेरा विनाश । सो परमात्मा के ज्ञान से ही अज्ञान अन्धेरा विनाश होता है। भल अनेक प्रकार का ज्ञान है, परन्तु उनसे अज्ञान अन्धेरा विनाश हो जाए और रोशनी आ जाए - यह नहीं हो सकता। यह तैलुक परमात्मा से ही है। परमात्मा की नॉलेज से ही आत्मा का अज्ञान अन्धेरा विनाश होता है और रोशनी भी आती है। रोशनी अर्थात् जन्म-जन्मान्तर के लिए फिर हम वह प्रालब्ध प्राप्त करें जिससे सदा सुख हो । यह ज्ञान सिर्फ बुद्धि में रखने की बात नहीं। यह तो प्रैक्टिकल अनेक जन्मों के विकर्मों का विनाश करना है जो फिर वह प्रालब्ध मिले । यह परमात्मा ही करा सकता है। इसको ही ज्ञान कहा जाता है। यह नालेज अथवा यह प्राप्ति मनुष्य नहीं करा सकते । मनुष्य को तो प्राप्त करना है। सर्व मनुष्य आत्माओं के लिए बात है ना। तो देने वाला जरुर और है जिससे सर्व आत्मायें वह प्रालब्ध प्राप्त करती हैं। कोई भी मनुष्य आत्मा चक्र से अलग नहीं है । सबको रोशनी चाहिए जिससे वह ऐसी स्टेज को प्राप्त करें।

यह ज्ञान ही रोशनी है जिससे पास्ट अनेक जन्मों के विकर्मों का विनाश करते हैं। अनेक जन्म प्रालब्ध प्राप्त करने के लिए अनेक जन्मों का हिसाब खत्म करना है। अब हम कितना पुरुषार्थ करते हैं, उसको ही नॉलेज अथवा रोशनी कहा जाता है। बाकी तो अनेक प्रकार के पुरुषार्थ हैं, उनसे फिर उस प्रकार की सिद्धि मिलती है। हमको फिर इस पुरुषार्थ से सर्व सिद्धियां मिल जाती हैं, अज्ञान का अंधकार मिट जाता है।