Avyakt murli for Saturday 18 January 1969

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0> 18-01-69 ओम शान्ति अव्यक्त बापदादा मधुबन 1"18 जनवरी 1969 – पिताश्री जी के अव्यक्त होने के बाद – अव्यक्त वतन से प्राप्त दिव्य सन्देश" 2(गुलज़ार बहिन द्वारा)

0Om Shanti Elevated invaluable versions spoken by the Supreme Soul Shiva 18th January 1969 1 before Pita Shri became avyakt – 8.30pm – Night Class.

31. आज जब हम वतन में गई तो शिवबाबा बोले - साकार ब्रह्मा की आत्मा में आदि से अन्त तक 84 जन्मों के चक्र लगाने के संस्कार हैं तो आज भी वतन से चक्र लगाने गये थे। 4जैसे साइंस वाले राकेट द्वारा चन्द्रमा तक पहुँचे - और जितना चन्द्रमा के नजदीक पहुँचते गये उतना इस धरती की आकर्षण से दूर होते गये। 5पृथ्वी की आकर्षण खत्म हो गई। 6वहाँ पहुँचने पर बहुत हल्कापन महसूस होता है।

2

7जैसे तुम बच्चे जब सूक्ष्मवतन में आते हो तो स्थूल आकर्षण खत्म हो जाती है तो वहाँ भी धरती की आकर्षण नहीं रहती है। 8यह है ध्यान द्वारा और वह है साइंस द्वारा। 9और भी एक अन्तर बापदादा सुना रहे थे - कि वह लोग जब राकेट में चलते हैं तो लौटने का कनेक्शन नीचे वालों से होता है लेकिन यहाँ तो जब चाहें,जैसे चाहें अपने हाथ में है। 10इसके बाद बाबा ने एक दृश्य दिखाया - एक लाइट की बहुत ऊँची पहाड़ी थी।

3Om shanti.

11उस पहाड़ी के नीचे शक्ति सेना और पाण्डव दल था। 12ऊपर में बापदादा खड़े थे।

4Children come to be refreshed by the spiritual Father.

13इसके बाद बहुत भीड़ हो गई। 14हम सभी वहाँ खड़े ऐसे लग रहे थे जैसे साकारी नहीं लेकिन मन्दिर के साक्षात्कार मूर्त खड़े हैं।

5All of you children know that you receive the sovereignty of the unlimited world from the unlimited Father.

15सभी ऊपर देखने की कोशिश कर रहे थे लेकिन ऊपर देख नहीं सके।

6You children should never forget this, but you do forget.

16जैसे सभी बहुत तरस रहे थे। 17फिर थोड़ी देर में एक आकाशवाणी की तरह आवाज आई कि शक्तियों और पाण्डवों द्वारा ही कल्याण होना है। 18उस समय हम सबके चहरे पर बहुत ही रहमदिल का भाव था। 19उसके बाद फिर कई लोगों को शक्तियों और पाण्डवों से अव्यक्त ब्रह्मा का साक्षात्कार,शिवबाबा का साक्षात्कार होने लगा।

7Children, it is Maya who repeatedly makes you forget.

20फिर तो वह सीन देखने की थी कोई हसँ रहा था, कोई पकड़ने की कोशिश कर रहा था, कोई प्रेम में आंसू बहा रहा था। 21लेकिन सारी शक्तियाँ आग के गोले समान तेजस्वी रूप में स्थित थी। 22इस पर बाबा ने सुनाया कि अन्त समय में तुम्हारा यह व्यक्त शरीर भी बिल्कुल स्थिर हो जायेगा। 23अभी तो पुराना हिसाब-किताब होने के कारण शरीर अपनी तरफ खींचता है लेकिन अन्त में बिल्कुल स्थिर,शान्त हो जायेगा।

8If Maya didn’t make you forget, you would be very happy.

24कोई भी हल- चल न मन में, न तन में रहेगी। 25जिसको ही बाबा कहते हैं देही अभिमानी स्थिति।

9The Father explains: Children, continue to look at your badge again and again.

26दृश्य समाप्त होने के बाद बाबा ने कहा - सभी बच्चों को कहना कि अभी देही अभिमानी बनने का पुरुषार्थ करो। 27जितना सर्विस पर ध्यान है उतना ही इस मुख्य बात पर भी ध्यान रहे कि देही अभिमानी बनना है। 282. आज जब मैं वतन में गई तो बापदादा हम सभी बच्चों का स्वागत करने के लिए सामने उपस्थित थे। 29और जैसे ही मैं पहुँची तो जैसे साकार रूप में दृष्टि से याद लेते थे वैसे ही अनुभव हुआ लेकिन आज की दृष्टि में विशेष प्रेम के सागर का रूप इमर्ज था।

10You should always have it on.

30एक-एक बच्चे की याद नयनों में समाई हुई थी। 31बाबा ने कहा याद तो सभी बच्चों ने भेजी है, लेकिन इसमें दो प्रकार की याद है।

11Continue to look at the pictures in your home and office, and continue to look at your badge.

32कई बच्चों की याद अव्यक्त है और कईयों की याद में अव्यक्त भाव के साथ व्यक्त भाव मिक्स है। 3375 बच्चों की याद अव्यक्त थी लेकिन 25 की याद मिक्स थी।

12Whilst walking and moving around, continue to look at your badge so that you can know that by having remembrance of Baba, you are becoming like that with Baba.

34फिर बाबा ने सभी को स्नेह और शक्ति भरी दृष्टि देते गिट्टी खिलाई।

13You also have to imbibe divine virtues, because this is the only time to do this.

35फिर एक दृश्य इमर्ज हुआ - क्या देखा सभी बच्चों का संगठन खड़ा है और ऊपर से बहुत फूलों की वर्षा हो रही है। 36बिल्कुल चारों और फूल के सिवाए और कुछ देखने में नहीं आ रहा था। 37बाबा ने सुनाया - बच्ची, बाप- दादा ने स्नेह और शक्ति तो बच्चों को दी ही है लेकिन साथ-साथ दिव्य गुण रुपी फूलों की वर्षा शिक्षा के रूप में भी बहुत की है। 38परन्तु दिव्य गुणों की शिक्षा को हरेक बच्चे ने यथाशक्ति ही धारण किया है।

14You children will never receive this knowledge again.

39इसके बाद फिर दूसरा दृश्य दिखाया - तीन प्रकार के गुलाब के फूल थे एक लोहे का,दूसरा हल्का पीतल का और तीसरा रीयल गुलाब था। 40तो बाबा ने कहा बच्चों की रिजल्ट भी इस प्रकार है। 41जो लोहे का फूल हैं - यह बच्चों के कड़े संस्कार की निशानी थे। 42जैसे लोहे को बहुत ठोकना पड़ता है, जब तक गर्म न करो,हथोड़ी न लगाओ तो मुड़ नहीं सकता।

15This is the only time when the Father says: Sweetest children.

43इस तरह कई बच्चों के संस्कार लोहे की तरह है जो कितना भी भट्टी में पड़े रहें लेकिन बदलते ही नहीं।

16He continues to say, “Sweet sweet, sweet, sweet children” day and night.

44दूसरे है जो मोड़ने से वा मेहनत से कुछ बदलते हैं। 45तीसरे वह जो नैचुरल ही गुलाब हैं। 46यह वही बच्चे हैं जिन्होंने गुलाब समान बनने में कुछ मेहनत नहीं ली। 47ऐसे सुनाते- सुनाते बाबा ने रीयल गुलाब के फूल को अपने हाथ में उठाकर थोड़ा घुमाया।

17Children cannot say to Baba, “Sweetest Baba!”

48घुमाते ही उनके सारे पत्ते गिर गये। 49और सिर्फ बीच का बीज रह गया।

18In fact, both should say to one another, because both are sweet.

50तो बाबा बोले,देखो बच्ची जैसे इनके पत्ते कितना जल्दी और सहज अलग हो गये - ऐसे ही बच्चों को ऐसा पुरुषार्थ करना है जो एकदम फट से पुराने संस्कार, पुराने देह के सम्बन्धियों रूपी पत्ते छट जायें। 51और फिर बीजरूप अवस्था में स्थित हो जायें। 52तो सभी बच्चों को यही सन्देश देना कि अपने को चेक करो कि अगर समय आ जाए तो कोई भी संस्कार रूपी पत्ते अटक तो नहीं जायेंगे,जो मेहनत करनी पड़े? 53कर्मातीत अवस्था सहज ही बन जायेगी या कोई कर्मबन्धन उस समय अटक डालेगा?

19However, some children cannot understand the unlimited Father.

54अगर कोई कमी है तो चेक करो और भरने की कोशिश करो।

20The Father has come to teach you children.

553. आज बाबा को मधुबन में आने के लिए निमन्त्रण देने के लिए गई - तो बापदादा के ईशारों से अनुभव हुआ कि आज बाबा का विचार नहीं है। 56इतने में ही बाबा बोले अच्छा बच्ची सभी बच्चों ने बुलाया है तो बापदादा बच्चों का सेवाधारी है। 57यह सुनकर संकल्प चला कि बाबा ने अभी-अभी ना की और अभी-अभी हाँ की क्यों? 58दिल के संकल्प को जानकर बाबा बोले - यह जानबूझ कर कर्म करके बाबा सिखला रहे हैं कि तुम बच्चों को भी एक दो की राय, एक दो के विचारों को रिगार्ड देना चाहिए।

21He continues to teach you.

59भल समझो कोई विचार देता है और तुमको नहीं जचता है तो भी उनके विचार को फौरन ठुकरा नहीं देना चाहिए। 60पहले तो उनको रिगार्ड दो कि हाँ, क्यों नहीं।

22You should understand in your heart that those who continue to follow shrimat will definitely become elevated.

61बहुत अच्छा। 62जिससे उनके विचार का फोर्स कम हो जाऐं।

23There is no question of ever becoming upset about this.

63तो फिर आप जो उन्हें समझायेंगे वह समझ सकेंगे।

24There is no need to get upset with anyone.

64अगर सीधा ही उनको कट करेंगे तो दोनों फोर्स टक्कर खायेंगी और रिजल्ट में सफलता नहीं निकलेगी। 65इसलिए एक दो के विचार अर्थात् राय को पहले रिगार्ड देना आवश्यक है। 66इससे ही आपस में स्नेह और संगठन चलता रहेगा। 674. आज जब वतन में गई तो जैसे ही हम पहुँची तो बापदादा सामने थे ही लेकिन क्या देखा कि ब्रह्मा बाबा के गले में ढेर की ढेर मालायें पड़ी हुई थी।

25To get upset means to get angry.

68फिर बाबा ने कहा यह माला उतार कर देखो।

26So, under no circumstances should anyone get angry.

69माला उतारी तो कोई बड़ी माला थी कोई छोटी। 70हमने कहा बाबा इसका रहस्य क्या है?

27Baba spoke a murli saying that you mustn’t take the law into your own hands.

71बाबा बोले बच्ची,यह सभी के उल्हनों की माला है। 72क्योंकि हरेक बच्चे जब एकान्त में बैठते हैं तो बाबा को स्नेह में उल्हना ही देते हैं।

28Even if someone is getting angry or making a mistake, report it to Baba, but don’t you yourself say anything to that person.

73हरेक बच्चे ने बाप को उल्हनों की माला जरूर पहनाई है। 74बाबा ने कहा बच्चों को ड्रामा भल याद है लेकिन प्यारे ते प्यारी चीज तो जरूर है। 75तो अचानक ड्रामा को वंडरफुल देख हरेक बच्चा दिल ही दिल में उल्हना देते रहते हैं। 76यूँ तो ज्ञान बच्चों को है लेकिन ज्ञान के साथ प्रेम का स्नेह भी है इसलिए इन उल्हनों को गलत नहीं कहेंगे।

29If you say something, that is like taking the law into your own hands.

77फिर हमने पूछा बाबा, आपने इसका रेसपान्ड क्या दिया? 78तो बाबा बोले जैसा बच्चा वैसा रेसपान्ड।

30The Government also says: If someone punches you, don’t retaliate, but report it.

79बाबा ने कहा मैं भी रेसपान्ड में बच्चों को उल्हनों की माला ही पहनाता हूँ। 80वह कौन सी? 81फिर बाबा ने सुनाया - जो बाप की आश बच्चों में थी वह साकार रूप में बाप को नहीं दिखलाई,जो अब अव्यक्त रूप में दिखलानी है। 82बाबा ने कहा यह उल्हना भी मीठी रूहरूहान है।

31Do not punch that person back.

83यह भी एक खेलपाल बच्चों का है।

32They will bring a case against that person.

84साकार रूप में जो बापदादा ने श्रृंगार कराया वह अब अव्यक्त वतन में बापदादा देखेंगे। 85यह सीन पूरी हो गई। 86फिर भोग स्वीकार कराया फिर मैंने बाबा से पूछा - बाबा आप सारा दिन वतन में क्या करते हो? 87बाबा ने कहा चलो मैं तुमको वतन का म्युजियम दिखलाऊँ तुम तो म्युजियम बनाने के पहले प्लैन बनाते हो बाबा का म्युजियम तो एक सेकेण्ड में तैयार हो जाता है।

33So here, too, it is like that.

88फिर क्या देखा? 89एक बहुत बड़ा हाल था।

34Children, you must never answer back.

90एक ही हाल में हम बच्चे ढेर की ढेर माडल के रूप में खड़े थे।

35You may tell Baba because it is Baba who will caution you children.

91हमने कहा बाबा यह तो हम ही म्यूजियम में खड़े हैं।

36Baba will then give you a yukti very sweetly.

92बाबा ने कहा - बच्ची बाबा का म्युजियम यही है।

37If you become body conscious, you will reduce your status.

93अभी तुम जाओ जाकर एक माडल को देखो कि बापदादा ने क्या-क्या सजाया है? 94जैसे आर्टिस्ट मूर्ति को सजाते हैं तो बाबा ने कहा देखो, बापदादा ने क्या-क्या सजाया है? 95हम जब माडल के पास गई तो हमको कुछ खास दिखाई नहीं पड़ा। 96पूरी सजी हुई मूर्ति दिखाई पड़ रही थी।

38So why do you cause yourself a loss?

97बाबा ने कहा जो मोटा श्रृंगार है वह तो साकार में ही बच्चों का करके आये हैं।

39Bring as much benefit as possible. 40Continue to remember the Father with a lot of love.

98परन्तु अब अव्यक्त रूप में क्या सजा रहे हैं?

41Baba doesn’t tell you to remember him with unlimited love.

99सभी श्रृंगार तो है, जेवर भी है परन्तु जेवर में बीच में नग लगा रहे हैं। 100बाबा के कहने के बाद कोई-कोई में जैसे एकस्ट्रा नग दिखाई पड़े। 101बाबा ने कहा बच्चों के प्रति मुख्य शिक्षा यही है कि अव्यक्त स्थिति में स्थित रहकर व्यक्त भाव में आओ। 102जब एकान्त में बैठते हैं तो अव्यक्त स्थिति रहती है लेकिन व्यक्त में रहकर अव्यक्त भाव में स्थित रहें वह मिस कर लेते हैं इस- लिए एकरस कर्मातीत स्थिति का जो नग है, वह कम है।

42No.

103तो जिसके जीवन में जो कमी देखता हूँ वह सजा रहा हूँ।

43He says: Remember the unlimited Father with unlimited love.

104जैसे साकार रूप में यह कार्य करता था वही फिर अव्यक्त रूप में करता हूँ। 105तो बच्चों से जाकर पूछना कि सारे दिन में जैसे बाप बच्चों को सजाते हैं, ऐसे बच्चों को भासना आती है? 106उस टाइम जो योंगयुक्त बच्चे होंगे उनको भासना आयेगी कि बाबा अब मेरे से बात कर रहे हैं, सजा रहे हैं। 107जैसे मैं अव्यक्त वतन में बच्चों से मिलता, बहलता रहता हूँ।

44Why?

108अव्यक्त रूप वाले बच्चे यह अनुभव कर सकते हैं।

45Because He gives you the sovereignty of the world. 46Imbibe divine virtues.

109मैं भी खास समय पर खास बच्चों को याद करता हूँ। 110ऐसी टचिंग बच्चों को होती ही होगी।

47Divine virtues means not to defame anyone, because deities never defame anyone.

111मैंने कहा बाबा आप सभी को अव्यक्त वतन में क्यों नहीं बुला लेते?

48So you too can never defame anyone because time would be wasted.

112- यहाँ ही बड़ा सेन्टर खोल दो। 113अभी तो सभी बच्चे उपराम हो गये हैं।

49Instead of defaming someone, it is better to remember the Father.

114बाबा ने कहा यह उपराम अवस्था होनी ही चाहिए।

50Children, you would also benefit through that.

115हमेशा तैयार रहना चाहिए। 116यह भी याद की यात्रा को बल मिलता है।

51It is better not to speak because you are no less.

117यह उपराम अवस्था सहज याद का तरीका है। 118अब बच्चों को कहना ज्यादा समय नहीं है। 119बाबा कभी भी किसको बुला लेंगे।

52You understand in your heart that you are establishing the soveriegnty of the new world and so you should have so much intoxication.

1205. आज जब वतन में गई तो जाते ही अनुभव हो रहा था जैसे कि लाइट के बादलों से क्रास करके वतन में जा रही हूँ। 121बादलों की लाइट ऐसे लग रही थी जैसे सूर्यास्त होते समय लाली देखने में आती है। 122जैसे ही वतन में पहुँची तो वहाँ भी ऐसे ही देखा कि लाइट के बादलों के बीच बापदादा का मुखड़ा सूर्य-चन्द्रमा समान चमकता हुआ देखने में आ रहा था। 123सीन तो बड़ी सुन्दर दिखाई दे रही थी लेकिन आज का वायुमण्डल बिल्कुल शान्त था।

53There is no fighting, quarrelling or violence there.

124बापदादा के मुलाकात में भी शान्ति और शक्ति की भासना आ रही थी।

54You should pay a lot of attention to remembrance.

125फिर तो मुस्कराते हुए बाबा बोले - भल तुम बच्चे साकार शरीर में साकारी सृष्टि में हो फिर भी साकार में रहते ऐसे ही लाइट माइट रूप होकर रहना है जो कोई भी देखे तो महसूस करे कि यह कोई फरिश्ते घूम रहे हैं। 126लेकिन वह अवस्था तब होगी जब एकान्त में बैठे अन्तर्मुख अवस्था में रह अपनी चेकिंग करेंगे। 127ऐसी अवस्था से ही आत्माओं को आप बच्चों से साक्षात्कार होगा। 128आज वतन में एक तरफ तो बिल्कुल शान्ति थी, दूसरे तरफ फिर प्यार का रूप बहुत था।

55You remember the cycle anyway.

129क्या देखा? 130बाबा की बाँहों में सभी बच्चे समाये हुए थे। 131साथ-साथ प्रेम का सागर तो था ही।

56All you children should be able to remember the cycle easily.

132बाबा ने कहा - तुम शक्तियों को भी सर्व आत्माओं को ऐसे ही अब अपने समीप लाना है। 133आपकी दृष्टि में बाप समान जब प्रेम और शक्ति दोनों ही पावर होगी तब आत्मायें नजदीक आयेंगी। 134इसके बाद बाबा ने तीसरा दृश्य दिखाया-क्या देखा बाबा के सामने ढेर कार्डस पड़े थे। 135बाबा ने कहा इन कार्डस को ऐसे सजाओं जिससे कोई सीनरी बन जाए क्योंकि हर कार्ड पर सीनरी की डिजाइन थी - किसमें चित्र किसमें शरीर।

57The cycle of 84 births is very easy.

136हम मिलाने लगी तो कभी उल्टा कभी सुल्टा हो जाता था। 137और बापदादा बहुत हँस रहे थे।

58The Father says: Children, you have to become the four-armed image.

138उसमें बहुत ही सुन्दर सतयुग की सीनरियॉ थी।

59You Brahmins become what the deities don’t become.

139एक कृष्ण बाल रूप में झूले में झूल रहा था, साथ में कान्ता (दासी) झुला रही थी।

60You understand that you know the beginning, middle, end and duration of the cycle.

140दूसरे में सखे-सखियों का खेल था।

61You know very clearly what else you have to do.

141मतलब तो सतयुग की दिनचर्या थी। 142फिर बाबा ने विदाई देते समय कहा, बच्ची सबको सन्देश देना - कि शक्ति स्वरूप भव और प्रेम स्वरूप भव।

62Children, you have to give others the introduction with a lot of love because the unlimited Father is making you into the masters of the world and teaching you Raja Yoga.

1436. आज जब इस देह और देह के देश से परे अपने को सूक्ष्मवतन जिसको ब्रह्मापुरी कहते हैं वहाँ गई तो परमात्मा बाप ने एक दृश्य दिखाया - बहुत बड़ी एक भीड़ देखी - फिर देखा जैसे कोई टिकेट बाँट रहा है और हरेक कोशिश कर रहा है कि हमें भी टिकेट मिले। 144लेकिन थोड़े समय में देखा कि कोई-कोई को टिकेट मिली और कोई-कोई टिकेट से वंचित रह गये। 145जिनको टिकेट मिली वह दिल ही दिल में हर्षाते रहे और जिन्हें नहीं मिली वह एक दो को देखते रहे। 146वह टिकेट कहाँ की थी उस पर एक दूसरा दृश्य देखा - एक बड़ा सुन्दर दरवाजा था जो अचानक खुला - जिन्हों के पास टिकेट थी वह तो दरवाजे के अन्दर चले गये और जिनके पास टिकेट नहीं थी वह बड़े ही पश्चाताप से देख रहे थे।

63Destruction is also just ahead of you.

147उस गेट पर लिखा हुआ था - ' 'स्वर्ग का द्वार ''।

64After you were taught Raja Yoga, the great Mahabharat war took place.

148बाबा ने रहस्य सुनाया - कि परमात्मा बाप सभी बच्चों द्वारा सतयुगी नई सृष्टि स्वर्ग में चलने की टिकेट दिला रहे हैं।

65That same Raja Yoga is now being taught to you, and that is also at the confluence age.

149परन्तु कई बच्चे सोच रहे हैं कि अब नहीं बाद में ले लेंगे। 150लेकिन ऐसे न हो कि यह टिकेट मिलना बन्द हो जाए और स्वर्ग में जाने से वंचित हो जायें। 151बाबा ने कहा - कई आत्मायें सुनती हैं, सोचती हैं कि यह कार्य क्या चल रहा है? 152तो बापदादा बच्चों प्रति यही शिक्षा दे रहे हैं कि यह जो समय आने वाला है, आप जो अब सोच रहे हो, सोचते-साचते अपने भाग्य को गंवा न दो।

66The war will definitely take place at the confluence age because the new world is being established.

153यह दृश्य दिखाया। 154फिर दूसरी सीन देखी कि नदी बह रही थी - उस नदी में दूर-दूर से कई लोग आकर स्नान कर रहे थे। 155कई फिर वहाँ ही नजदीक थे लेकिन नहा नहीं रहे थे। 156बल्कि उनसे कई पूछ रहे थे कि नदी कहाँ हैं हम जाकर स्नान करें लेकिन जो नजदीक रहने वाले थे उनको नदी में स्नान करने का महत्व नहीं था और जो प्यासे थे, उनको भी उस प्यास का मूल्य कम कराते थे।

67The old world is to end.

157फिर बाबा ने कहा कि बच्ची यह जो ज्ञान गंगा है। 158गंगा के नजदीक वाले आबू निवासी हैं।

68These two to four things now have to be remembered, but Maya makes you forget them.

159दूर दूर से आकर तो इसमें स्नान करते हैं लेकिन यहाँ वाले इस महत्व को न जान उनको टालते हैं। 160तो कहाँ ऐसे न हो इस भूल में रह जायें इसलिए बापदादा के सब बच्चे हैं, भल आज्ञाकारी बच्चे नहीं हैं फिर भी बच्चे तो बाबा के प्रिय हैं। 161तो बच्चों को बाबा शिक्षा देते हैं कि यह अमूल्य समय जो ज्ञान गंगा में नहाने का मिल रहा है,वह कभी गंवा न देना। 162फिर थोड़े समय में देखा कि कईयों ने तो स्नान किया,कईयों ने जल को भरकर रखा लेकिन कुछ समय के बाद नदी ने रास्ता पलट लिया और जिन्होंने नहीं नहाया,न भरकर रखा वह औरों से एक-एक बूंद मांग रहे थे,तड़फ रहे थे।

69However, the Father says: Whilst making effort, experience happiness remembering Me.

163तो बाबा ने कहा यह समय अभी आने वाला है। 164फिर बाबा ने सभी बच्चों के प्रति एक महामन्त्र की सौगात दी - बाबा बोले, एक तो मुझ परमपिता की याद में रहो और अपने जीवन को पवित्र और योगी बनाओ। 165यही बापदादा ने स्नेह के रिटर्न में महामन्त्र की सौगात सभी प्रति दी। 1667. आज जब वतन में गई तो जाते ही क्या देखा कि शिवबाबा और अपना ब्रह्मा बाबा दोनों आपस में बैठे थे और सामने जैसे एक छोटी पहाड़ी बनी हुई थी।

70The Father says: Let all the sorrow and suffering of the body end.

167वह किसकी थी? 168क्या देखा कि ढेर के ढेर पत्र थे।

71Baba, the sorrow and suffering of how long will end?

169इतने पत्र थे, इतने पत्र थे जैसे कि पहाड़ियां बन गई थी जैसे ही हम पहुँची तो ब्रह्मा बाबा ने हमको देखा और कहा कि ईशू कहाँ है। 170इतने पत्र हो गये हैं। 171मैंने कहा बाबा मैं आई हूँ। 172कहा ईशू बच्ची को भी साथ लाई हो ना!

72For half the cycle.

173देखना ईशू बच्ची, मैं दो मिनट में इतने सारे पत्र पूरा कर देता हूँ।

73It is remembered that this is the land of sorrow and that is the land of happiness.

174शिव बाबा तो साक्षी होकर मुस्करा रहे थे। 175इतने में देखा कि ईशू बहन भी वहाँ इमर्ज हो गई।

74The Father establishes the land of happiness and Ravan establishes the land of sorrow.

176ईशू का चेहरा बिल्कुल ही शान्त था।

75Only you children know this.

177बाबा ने कहा बच्ची क्या सोच रही हो? 178आज तो पत्र का जवाब देना है।

76Not a single other person in the world knows this.

179उसी समय जैसे साकार वतन का संस्कार पूर्ण रीति इमर्ज था।

77The land of happiness is now being established.

180मम्मा खड़ी होकर देख रही थी। 181इतने में ही शिव बाबा ने ब्रह्मा बाबा को कहा आप कहाँ हो?

78You know this amongst yourselves, numberwise, according to the effort you make.

182वतन में बैठे हो? 183फिर एक सेकेण्ड में ही रूप बदल गया।

79However much love the Father has, He has had that from the beginning.

184बाबा ने कुछ कहा नहीं,एकदम डेड साइलेन्स हो गये। 185इतने में बाबा ने मुझे कहा कि बच्ची यह पत्र खोलकर देखो। 186मैंने कहा बाबा पत्र तो ढेर हैं।

80I know that I am going to My children who have become ugly by sitting on the pyre of lust, and so I am going to make them beautiful.

187बाबा ने कहा बच्ची इसमें तो एक सेकेण्ड लगेगा।

81You know that the Father is knowledge-full.

188क्योंकि सभी में एक ही बात है। 189इसके बाद बाबा ने सुनाया कि सभी पत्रों में बच्चों के उल्हने ही हैं।

82Children, you continue to receive knowledge gradually and Maya makes you forget it.

190पत्रों में सभी उल्हने ही थे।

83She doesn’t allow that happiness to remain.

191अब देखना बाबा बच्चों को रेस्पाण्ड करते हैं। 192देखना एक सेकेण्ड में मैं सभी को जवाब दे देता हूँ। 193फिर बाबा ने सभी पत्रों का लाल अक्षरों में यहाँ माफिक ही पत्र लिखा। 194पत्र में क्या था - "ब्राह्मण कुल भूषण, स्वदर्शनचक्रधारी,ये रत्नों बच्चों प्रति,समाचार यह है कि सभी बच्चों के उल्हनों के पत्र सूक्ष्मवतन में पाये।

84Therefore, children, you should have happiness.

195रेस्पान्ड में बापदादा बच्चों को कह रहे हैं कि ड्रामा की भावी के बन्धन में सर्व आत्मायें बंधी हुई हैं। 196सभी पार्ट बजा रही हैं। 197उसी ड्रामा के मीठे-मीठे बन्धन अनुसार आज अव्यक्त वतन में पार्ट बजा रहा हूँ। 198सभी बच्चों को दिल व जान सिक व प्रेम से अव्यक्त रूप से याद प्यार बहुत-बहुत-बहुत स्वीकार हो।

85Day by day, the mercury of your happiness should rise.

199जैसे बाप की स्थिति है वैसे बच्चों को स्थिति रखनी है"।

86Baba has explained to you: In the golden age, the mercury was high.

200यह है बापदादा का पत्र। 201फिर बाबा को हमने भोग स्वीकार कराया।

87The mercury of happiness is now rising with the pilgrimage of remembrance.

202बाबा बोले बच्ची आज कुछ नये बच्चे भी आये हैं। 203पहले मैं उन्हों को खिलाता हूँ।

88The more you stay in remembrance, the more the mercury of happiness will rise.

204फिर वतन में बाबा ने सभी बच्चों को इमर्ज कर अपने हस्तों से जल्दी-जल्दी एक एक दृष्टि भी दे रहे थे,हाथों से गिट्टी भी खिला रहे थे। 205लेकिन एक एक को एक सेकेण्ड भी जो दृष्टि दे रहे थे, उस दृष्टि में बहुत कुछ भरा हुआ था। 206उसके बाद फिर तीसरा दृश्य हमने देखा। 207बाबा को कहा कि सभी ने एक प्रश्न पूछने के लिए कहा है।

89It will not rise instantly.

208बाबा ने कहा जो भी प्रश्न हैं वह पूछ सकते हो। 209बाबा तो एक अक्षर में जवाब दे देगा। 210प्रश्न:- 211सभी पूछते हैं कि पिछाड़ी के समय आप ने कुछ बोला नहीं।

90Children, gradually, experiencing victory and defeat, victory and defeat, you will claim exactly the same status as you did in the previous cycle, numberwise, according to the effort you make.

212बाहर की सीन तो हम सभी ने सुनी है लेकिन अन्दर क्या था वह अनुभव भी सुनना चाहते हैं।

91However, it takes time, the same as it does every cycle.

213बाबा बोले, हाँ बच्ची, क्यों नहीं। 214अपना अनुभव सुनायेंगे। 215अच्छा लो सुनो -

92Only those who passed in the previous cycle will pass.

216बच्ची खेल तो सिर्फ 10-15 मिनट का ही था। 217उस थोड़े से समय में ही अनेक खेल चले।

93BapDada, the detached Observer continues to see your stage.

218उसमें भिन्न-भिन्न अनुभव हुए।

94He continues to explain to you.

219पहला अनुभव तो यह था कि पहले जोर से युद्ध चल रही थी। 220किसकी?

95Those who live outside are not refreshed as much.

221योगबल और कर्मभोग की। 222कर्मभोग भी फुल फोर्स में अपने तरफ खींच रहा था और योगबल भी फुल फोर्स में ही था। 223ऐसे अनुभव हो रहा था कि जो भी शरीर के हिसाब-किताब रहे हुऐ थे वह फट से योग अग्नि में भस्म हो रहे थे। 224और मैं साक्षी हो देख रहा हूँ, जैसे अखाड़े में बैठ मल्लयुद्ध देखते हैं।

96As soon as you go out from the centre, everything is finished.

225मतलब तो दोनों का फोर्स पूरा ही था। 226उसके बाद बाबा बोले कि कुछ समय बाद कर्मभोग (दर्द) तो बिल्कुल निर्बल हो गया।

97They cannot be refreshed as much, and this is why children continue to come here to be refreshed.

227बिल्कुल दर्द गुम हो गया। 228ऐसे ही अनुभव हो रहा था कि आखरीन में योगबल ने कर्मभोग पर जीत पा ली।

98Baba writes to So-and-so: Give Such-and-such a family My love and remembrance.

229उस समय तीन बातें साथ-साथ चल रही थी वह कौन सी? 230एक तरफ तो बाबा से बातें कर रहा था कि बाबा आप हमें अपने पास बुला रहे हो।

99For instance, He would write a letter to this child: Give everyone in the family My love and remembrance.

231दूसरे तरफ यूँ तो कोई खास बच्चों की स्मृति नहीं, लेकिन सभी बच्चों के स्नेह की याद शुद्ध मोह के रूप में थी बाकी शुद्ध मोह की रग वा यह संकल्प कि छुट्टी नहीं ली वा और कोई भी संकल्प नहीं था। 232तीसरी तरफ यह भी अनुभव हो रहा था कि कैसे शरीर से आत्मा निकल रही है। 233कर्मातीत न्यारी अवस्था जो बाबा ने पहले मुरली भी चलाई कि कैसे भाँ भाँ होकर सन्नाटा हो जाता है। 234वैसे ही बिल्कुल डेड साइलेन्स का अनुभव हो रहा था और देख रहा था कि कैसे एक-एक अंग से आत्मा अपनी शक्ति छोड़ती जा रही है।

100

235तो कर्मातीत अवस्था की मृत्यु क्या चीज है वह अनुभव हो रहा था। 236यह है मेरा अनुभव।

101He would write to the doctor: Give everyone in the family My love and remembrance.

237फिर हमने बाबा को कहा कि बाबा सभी बच्चे कहते हैं अगर हम सभी सामने होते तो बाबा को रोक लेते। 238तो बाबा ने कहाँ बच्ची रोक लेते तो यह ड्रामा कैसे होता। 239फिर हमने कहा बाबा यह सीन जैसे अब तो आर्टीफिशियल लग रही है। 240रीयल ड्रामा नहीं लगता।

102So the whole family belongs to the Father.

241बाबा ने कहा कि बच्ची यह स्नेह की मीठी तार जुटी होने के कारण तुमको अन्त तक यह वण्डर ही देखने में आयेगा और अब तक भी तो सम्बन्ध है। 242भल साकार रथ गया है लेकिन ब्रह्मा के रूप में अव्यक्त पार्ट बजा रहे हैं। 243बाबा ने कहा मैं भी कभी साकार वतन में चला जाता हूँ फिर शिव बाबा पूछते हैं कहाँ बैठे हो? 244यहाँ बैठे जैसे साकार वतन में।

103They are limited and the Father is unlimited.

245यह मकान बन रहा है वहाँ तक जाता हूँ।

104Bap and Dada have a lot of love for you children.

246मैंने कहा बाबा, कभी कभी लगता है कि जैसे बाबा चक्र लगा रहे हैं। 247बाबा ने कहा मैं चक्कर लगाता हूँ तो वह भासना तो बच्चों को आयेगी ही। 248मतलब तो रूह रूहान हो रही थी। 249फिर बाबा ने एक दृश्य दिखाया जैसे एक चक्र के अन्दर बहुत चक्र दिखाई पड़े।

105They do lovely service every cycle.

250चक्र का ढंग ऐसे बनाया था कि उस चक्र से निकलने के 4-5 रास्ते दिखाई पड़े परन्तु निकल न पाये। 251सिर्फ ब्रह्मा बाबा का यह दिखाया कि चक्र में चलते-चलते प्याइन्ट (जीरो) पर खड़े हो गये, निकले नहीं। 252बाबा ने सम- झाया कि यह है ड्रामा का बन्धन। 253ब्रह्मा भी ड्रामा के सर्कल से निकल नहीं सकते।

106They remember you with a lot of love.

254ड्रामा के बन्धन से कोई भी निकल नहीं सकते। 255उस जीरो प्याइन्ट तक पहुँच गये लेकिन फिर भी ड्रामा का मीठा बन्धन है।

107If someone doesn’t study or his activity isn’t good, there is mercy for that one: That poor child will not claim a high status.

256जिस मीठे बन्धन को खेल के रूप में दिखाया। 257फिर मिश्री बादामी खिलाई।

108He is not following shrimat, so the poor thing will claim a low status.

258छुट्टी दी, बोला, जाओ बच्ची टाइम हो गया है। 2598. आज जब वतन में गई तो कोई भी नजर नहीं आ रहा था। 260दूर से कोई जैसे आवाज आ रही थी - ऐसे लग रहा था जैसे कोई खास कार्य हो रहा हो। 261मैं पहले तो कुछ रूकी लेकिन फिर आगे चलकर क्या देखा - शिवबाबा ब्रह्मा बाबा,मम्मा और विश्वकिशोर चारों ही आपस में बातचीत कर रहे थे और बहुत प्लैन उनके आगे रखे थे।

109What else can Baba do?

262जिसमें कुछ निशान आदि दिखाई दे रहे थे। 263लेकिन समझ में नहीं आया। 264मम्मा सभी बच्चों का हालचाल पूछ रही थी।

110Mothers also come: They too know that they are coming to Baba who lives here day and night.

265मैंने कहा मम्मा आपने बाबा को भी बुला लिया।

111When they go to the centres, He is not there day and night.

266मम्मा बोली - मम्मा भी नहीं चाहती कि बच्चों से मात-पिता का साकारी साथ छूटे लेकिन ड्रामा। 267फिर मैंने बाबा से पूछा - बाबा यह प्लैन्स आदि क्या हैं? 268बाबा बोले - बच्ची,जैसे मार्शल के पास सारे नक्शे रहते हैं कि कहाँ-कहाँ क्या-क्या हो रहा है। 269आगे क्या होना है - वैसे यह भी स्थापना के कार्य की ही बातचीत चल रही थी।

112They receive some company.

270जो फिर सुनायेंगे। 271इसके बाद एक दृश्य दिखाया - जिसमें तीन संगठन थे।

113You have to go out and come in, go here and there.

272एक तो देखा लाल-लाल चीटियाँ जो आपस में गेंद के माफिक इक्ट्ठी हो जा रही थी।

114So, there is a difference between living here and living there.

273दृश्य ऐसा था जो ब्रह्मा बाबा ने शुरू-शुरू में देखा था -दूसरा संगठन था मूलवतन में आत्मायें शमा रूप में थी तीसरा संगठन - हम ब्राह्मणों का था। 274जो सभी सर्किल रूप में बैठे थे और बीच में बापदादा थे। 275वह ऐसे लग रहा था जैसे फूल के बीच में बूर होता है और चारों ओर पत्ते होते हैं। 276इसका रहस्य बाबा ने बताया - कि बच्ची जब प्रत्यक्षता शुरू हुई तो भी संगठन में देखा।

115However, not everyone can stay here.

277अन्त में भी आत्माओं को संगठन रूप में ही रहना है और अब मध्य में भी संगठन है। 278संगठन की शक्ति है तो कोई भी हिला नहीं सकता।

116If everyone were to stay here, you don’t know what arrangements would have to be made.

279देखो, बापदादा ने कहाँ-कहाँ से चुन-चुनकर संगठन बनाया है। 280तो बच्चे भी जब संगठन में चलेंगे तो माया का वार नहीं होगा। 281जैसे गुलाब का फूल वा कोई भी फूल होता है तो उनको योग्य स्थान पर रखेंगे और अकेला पत्ता होगा तो हाथ से जल्दी मसल देंगे। 282तो बच्चों का भी संगठन रूपी गुलदस्ता होगा तो विजय प्राप्त करते रहेंगे।

117The number of children continues to grow.

283कोई वार नहीं कर सकेगा। 284ऐसे कहते बाबा ने कहा कि सभी बच्चों को कहना कि संगठन ही सेफ्टी का साधन है।

118The Father knows that the number of children will continue to grow and so He continues to make arrangements.

2859. आज जब वतन में गई तो बापदादा दोनों बहुत बिजी थे। 286क्या देखा - दोनों के आगे बहुत से फूल भी थे और पत्ते भी थे।

119The Father has also explained: Sweetest children, this is a very important pilgrimage. 120Abu is a very important pilgrimage place.

287जैसे गुलदस्ते में फूल भी डाले जाते और पत्ते भी डाले जाते। 288फूल दो तीन प्रकार के अलग-अलग थे,उनको देख रहे थे और छांट रहे थे।

121The Father Himself says: I come here and make, not just this body, but the whole world, not just human beings, but even the five elements pure.

289तो बाप-दादा दोनों उसी ही कार्य में बिजी थे। 290मुझे देखा भी नहीं।

122You know that there truly is only the one Father who comes and grants everyone salvation.

291जब मैं नजदीक गई तो मुझे देख मुस्कराया - और कहा कि मैं सारा दिन बिजी रहता हूँ। 292देखो बच्ची कितनी बड़ी कारोबार चल रही है। 293यह फूल पत्ते तीन क्वालिटी के अलग-अलग करके रखे हैं। 294पहले बाबा ने मुझे फूल दिखाये जिनकी संख्या बहुत कम थी फिर बीच की क्वालिटी दिखाई जिसमें फूल बहुत थे लेकिन साथ में थोड़े पत्ते भी लगे थे।

123Time immemorial.

295फूल अच्छे थे लेकिन जो पत्ते लगे हुए थे वह कुछ डिफेक्टेड थे। 296तीसरी क्वालिटी में फिर पत्ते जास्ती थे और फूल बहुत ही कम थे। 297इस पर बाबा ने मुझे समझाया कि यह पहली क्वालिटी जिसमें थोड़े फूल हैं - यह वह बच्चे हैं जो बिल्कुल दिल पर चढ़े हुए हैं और ऐसे दिल वाले अनन्य बच्चे बहुत ही थोड़े हैं। 298दूसरे नम्बर वाले बच्चे हैं बहुत अच्छे, परन्तु थोड़ा कुछ कमी है।

124Children, you also know this and then forget it.

299फूल बने हैं लेकिन थोड़ी कमी है।

125Immemorial means eternal.

300बाकी तीसरी क्वालिटी के हैं प्रजा। 301उनमें कोई फूल निकलता है जो पीछे जाने वाला है।

126The Father continues to explain every point but nevertheless, children forget it.

302बाकी सब हैं प्रजा। 303तो दो ऊपर की क्वालिटी बच्चों की है। 304बापदादा अब गुलदस्ता सजाते हैं।

127This is why the Father says: Maya is very powerful because she has had her kingdom for half the cycle.

305जब गुलदस्ता सजाया जाता है तो सिर्फ फूल डालने से गुलदस्ता नहीं शोभता। 306उसमें कुछ पत्ते भी चाहिए। 307तुम फूल हो लेकिन तुम्हारे साथ पत्ते भी चाहिए। 308तुम राजा बनेंगे तो प्रजा भी चाहिए ना।

128She too has that power.

309तो प्रजा रूपी पत्तों के बीच में फूल शोभता है।

129The Father explains: Half and half.

310तो यहाँ बैठे तुम बच्चों का गुलदस्ता बनाता हूँ। 311और देखता हूँ कि एक फूल ने कितनी प्रजा बनाई है।

130You are defeated then Baba picks you up and then you are defeated again.

312जिसने जास्ती प्रजा बनाई है उनका गुलदस्ता भी शोभता है। 313फिर बाबा ने एक प्रश्न पूछा- कि जब कोई देवता पर फूल चढ़ाते हैं तो सिर्फ फूल चढ़ाते पत्ते निकाल देते हैं क्यों? 314पत्ते तो फूल का शो होते हैं फिर पत्ते क्यों निकाल देते? 315फिर बाबा ने सुनाया कि तुम बच्चों से ही यह सारी रसम-रिवाज होती है।

131Baba often receives such letters saying that children have fallen.

316जब तुम पहले अर्पण हुए तो अकेले थे लेकिन फूल को अगर कुछ समय रखना हो तो पत्ते साथ में होंगे तो रख सकेंगे वैसे ही जब तुम पहले अर्पण हुए तो तुम अकेले फूल अर्पण हुए हो। 317फिर तुमको 21 जन्मों के लिए अविनाशी चलना है - तो प्रजा रूपी पत्ते भी लगाये जाते हैं। 318पहले तुम आये तो प्रजा नहीं थी लेकिन अब तो तुम फूलों की शोभा ही प्रजा रूपी पत्तों से है इसलिए बापदादा कहते हैं, प्रजा बनाओ। 31910.आज जब मैं वतन में गई तो ऐसे लगा जैसे कोई सूर्य के नजदीक जाए तो सूर्य की गर्मा- इस या सकाश तेज आती है,ऐसे ही आज वतन में जैसे ही आगे बढ़ते गये तो ऐसे अनुभव हुआ जैसे कोई भट्टी के आगे जाते हैं।

132

320आज बाबा लाल-लाल लाईट में जैसे अव्यक्त फीचर में दिखाई दे रहे थे और सूर्य के समान किरणें निकल रही थी। 321क्या देखा कि नीचे बहुत बड़ी सभा है। 322ऐसी सभा साकार रीति में ब्राह्मणों की कभी नहीं थी - सभी ब्राह्मणों पर वह किरणें जा रही थी। 323और मैं भी वतन में गई तो देखा मेरे पर भी वह किरणों की लाइट माइट आ रही है।

133Yoga and the study.

324कुछ समय बाद - मैं बाबा से उसी रूप में मिली और कहा कि बाबा मैं भोग लेकर आई हूँ। 325बाबा भोग स्वीकार करते हुए सिखला रहे थे कि खाते समय कैसे लाइट माइट की स्थिति में रहना है। 326फिर मैंने बाबा से पूछा कि बच्चों को याद-प्यार तो देंगे ना। 327इस पर बाबा ने कहा कि स्नेह का रूप तो बहुत देखा लेकिन स्नेह के साथ शक्ति रूप की स्थिति जो बाबा बच्चों की बनाने चाहते हैं, वह अभी तक कम है।

134There is yoga in the study anyway.

328तो आज बाबा स्नेह के साथ शक्ति भर रहे थे। 329और कहा इसी से ही सर्विस में सफलता होगी।

135Whatever I teach definitely needs the yoga of the intellect.

330बाबा ने सन्देश भी यह दिया कि सिर्फ स्नेह नहीं लेकिन साथ में शक्ति भी भरनी है। 331जो बाबा ने खुद दृश्य में दिखाया कि बच्चों को इस सृष्टि को लाइट-माइट की किरणें देनी है। 332इतने दिन बाबा का स्नेह के रूप से मिलन था लेकिन आज स्नेह के साथ लाइट-माइट का रूप था तो मैं उसे लेने में ही तत्पर हो गई और वापस साकार वतन में आ गई। 33311. आज जब मैं वतन में गई तो जैसे एक सभा लगी हुई थी - क्लास हो रहा था।

136So-and-so is teaching me.

334पहले तो मैं धीरे-धीरे आगे बढ़ने लगी।

137You children know that the Father is now teaching you.

335बापदादा ने नयनों से स्वागत किया। 336फिर बोले बच्ची इन सबसे मुलाकात करो और यह भोग सभी को खिलाओ। 337तो क्या देखा - जो आत्मायें एडवांस में शरीर छोड़कर गई हैं उन सभी को इमर्ज कर बाबा क्लास करा रहे थे। 338फिर सभी को मधुबन का ब्रह्मा भोजन स्वीकार कराया।

138Achcha.

339उस संगठन में सभी गई हुई आत्मायें थी। 340फिर मैंने एक दृश्य देखा - बहुत मकान बन रहे थे।

139Children had not been refreshed and this is why they have had some thoughts, wondering what Baba’s health is like.

341और जैसे मकान में जब छत पड़ती है तो उसको बहुत आधार देते हैं फिर जब सीमेन्ट पक्का हो जाता है तो वह आधार लकड़ी पट्टी आदि निकाल देते हैं। 342तो इस तरह मकान बनने की छत भरने की कारोबार बहुत जोर शोर से चल रही थी। 343तो मैं इस मकान को देखती रही और बाबा गायब हो गया। 344बाबा ने यह दिखाया कि मकान बनाने के लिए पहले आधार दिया जाता है फिर आधार निकाला जाता है।

140Isn’t that right?

345ऐसे ही दृश्य देखते यहाँ पहुँच गई। 34612. आज जब मैं वतन में गई तो बाबा नहीं दिखाई दिये। 347थोड़ी देर के बाद बाबा को देखा तो मैंने पूछा आप कहाँ गये थे? 348बाबा बोले - आज गुरूवार का दिन है तो सभी बच्चों के पास चक्र लगाने गये थे।

141My health is fine.

349वैसे तो साकार रूप में इतने थोड़े समय में सब जगह नहीं पहुँच सकता था। 350अब तो अव्यक्त वतन में अव्यक्त विमान द्वारा राकेट से भी जल्द पहुँच सकते हैं। 351हमने कहा बाबा आपने चक्र लगाया तो उसमें आपने क्या देखा! 352बाबा ने कहा - मैजारटी बच्चे अभी तक स्नेह में अच्छे चल रहे हैं और बहुत ऐसे भी हैं जिन्हों के अन्दर कुछ संकल्प भी है कि ना मालूम अब क्या होगा।

142Sometimes, there is a little something.

353परन्तु संगठन के सहारे अब तक ठीक हैं।

143He definitely refreshes you a little.

354बाबा ने कहा कि स्नेह के आधार पर जो बच्चे अभी तक ठहरे हुए हैं तो अब स्नेह के साथ ज्ञान का फाउन्डेशन जरा भी ढीला हुआ तो बच्चों पर वायुमण्डल का असर बहुत सहज हो सकता है। 355इसलिए हर एक बच्चे को अपनी चेकिंग करनी है। 356फिर भी व्यक्त देह में हो तो स्नेह में पहले फोर्स अच्छा रहता है लेकिन इस स्नेह पर फिर जैसे-जैसे दिन पड़ते जायेंगे तो वायुमण्डल का असर जल्दी पड़ सकता है। 357स्नेह में भल कहते हैं कि शिवबाबा कल्याणकारी है या बाबा ने जो किया है वह ठीक है।

144However, you children continue to be refreshed here.

358स्नेह के वश संकल्प बन्द किया है। 359स्नेह की रिजल्ट मैजारटी की अधिक है।

145Yes, children are very good, like this child Mohan.

360वायुमण्डल का असर हमारे पर न हो और हमारा असर वायुमण्डल पर हो तब कायदेमुजीब चल सकते हैं। 361हमने कहा कि बाबा हमारे पास तो ज्ञान की ही बातें चलती हैं। 362तब बाबा ने कहा बच्ची, ज्ञान के फाउन्डेशन से अपने को सन्तुष्ट रखें,ऐसे बच्चे थोड़े हैं। 363तो आज बाबा ने यह रिजल्ट बताई और कहा कि सभी को जाकर सुनाना कि वायुमण्डल को हमें चेंज करना है न कि वायुमण्डल हमें चेंज करे।

146He is a very good child.

364फिर भोग स्वीकार कराने के बाद बाबा ने एक सीन दिखाई - एक बहुत बड़ा हाल था, उस हाल में चारों ओर से बहुत बदबू आ रही थी। 365उस कमरे में दो तीन बहुत अच्छी खुशबूदार अगरबत्ती जल रही थी। 366धीरे-धीरे अगरबत्ती की खुशबू ने बदबू को दबा दिया। 367बाबा ने सुनाया देखो बच्ची, चारों तरफ बदबू का वायुमण्डल था लेकिन इतनी सी अगरबत्ती ने वायु- मण्डल को बदल दिया।

147This child’s nature is such that he never defames anyone.

368तो तुम बच्चों पर जब देखो कि वायुमण्डल का असर होता है तो अग-रबत्ती का मिसाल सामने रखो कि हम सर्वशक्तिवान बाप के बच्चे हैं। 369अगर वायुमण्डल का असर हमारे पर आये तो इससे तो अगरबत्ती अच्छी है। 370जब तुम बच्चे पावरफुल खुशबूदार बनेंगे तब यह वायुमण्डल दब जायेगा। 371बाबा ने कहा अब हरेक बच्चे को शिक्षा तो मिली है।

148Each one has his own virtue.

372शिक्षा भी सभी बड़े मीठे रूप से सुनते हैं।

149It is said: consider the one who defames you to be your friend.

373लेकिन जैसे मीठे रूप से सुनते हो उसी मीठे रूप से धारण भी करना है।

150The Father also says: I am defamed a lot too.

374मीठापन चिपकता बहुत जल्दी है।

151I come and make you My friends.

375जो ऐसे मीठा बनेंगे तो बाप से चिपक जायेंगे।

152So, it is remembered: Those who defame Me…

376याद और मीठापन नहीं होगा तो अलग-अलग रहेंगे। 377जैसे नमकीन चीज आपस में कभी नहीं मिलती है।

153The Father sits here and explains: Look how much they defame Me.

378तो जो ऐसे होंगे उनकी अवस्था योगयुक्त नहीं रहेगी। 379अब जैसे बच्चों ने सुना वैसे ही धारण करेंगे तो बहुत बल मिलेगा। 38013. आज जब मैं वतन में गई तो बाप और दादा दोनों सामने खड़े थे। 381और जाते ही नयनों की मुलाकात से सभी की जो यादप्यार ले गई थी वह दी।

154All are My children.

382जैसे ही मैं याद दे रही थी तो साकार बाबा ने मेरा हाथ पकड़ा। 383उस हाथ पकड़ने में ना मालूम क्या जादू था - ऐसे अनुभव हुआ जैसे सागर में कोई स्नान करता है, ऐसे थोड़े समय के लिए मैं प्रेम के सागर में लीन हो गई। 384उसके बाद हमने आलमाइटी बाबा की तरफ देखा। 385तो बाबा ने कहा बच्ची-बाप में मुख्य दो गुण जो हैं वह बच्चों ने साकार रूप में अनुभव किया है।

155I have so much love for them.

386वह दो गुण कौन से हैं? 387जितना ही ज्ञान स्वरूप उतना ही प्रेम स्वरूप।

156So, it is better not to defame anyone.

388तो बच्चों को भी यह दो गुण अपने हर चलन में धारण करने हैं। 389फिर मैंने बाबा से पूछा कि पहले वतन में जो गये हुए बच्चों का इतना संगठन था इसका रहस्य क्या था! 390बाबा ने कहा पूरा राज तो बाद में चलकर सुनायेंगे लेकिन साकार रूप से जो कोई सर्विस अर्थ या कुछ हिसाब किताब चुक्तू करने अर्थ चले गये हैं उन बच्चों से मुलाकात करने के लिए बुलाया था। 391बाबा उनसे हालचाल पूछ रहे थे कि कौन-कौन, किस रीति से किस रूप से क्या-क्या कर रहे हैं।

157This is the time of the final period.

392हमने कहा बाबा, यह किस रूप से स्थापना के कार्य में बिजी हैं? 393तो बाबा बोले बच्ची यह आगे चलकर स्पष्ट करेंगे, फिर भी शार्ट में सुनाते हैं। 394बाबा ने कहा - बच्ची जब लड़ाई होती है तो किसी भी लश्कर को जब जीतना होता है तो सिर्फ एक तरफ से नहीं चारों तरफ से लश्कर भेजकर पूरा घेराव डाल देते हैं। 395इस संगठन से यह मालूम हुआ कि जो भी बच्चे गये हैं वह चारों और फैल गये हैं।

158There has to be caution about everything.

396अभी चारों तरफ स्थापना की नीव पड़ गई है। 397बाकी अब आर्डर देने की जरूरत है। 398फिर बाबा ने चार स्टेजेस की एक सीढ़ी दिखाई। 399पहली स्टेज दिखाई - ज्ञान सुनना, सोचना- समझना और निश्चय करना।

159Achcha.

400कोई सोच करता है, कोई मंथन करता है। 401दूसरी स्टेज बताई - कि अन्त समय कैसे विनाश हो रहा है। 402कहाँ बाढ़ से डूब रहे हैं, कहाँ क्या हो रहा है लेकिन शक्ति दल और पाण्डव बिल्कुल अडोल खड़े थे। 403तीसरी स्टेज दिखाई कि आत्मायें जैसे निकल कर परमधाम में गुब्बारे माफिक जा रही हैं।

160

404फिर परमधाम की सीन भी बाबा ने दिखाई। 405चौथी सीन - स्वर्ग की दिखाई। 406स्वर्ग में आत्मायें कैसे छोटे-छोटे बच्चों में प्रवेश हो रही हैं। 407तो यह सभी स्टेजेस सीढ़ी के चित्र के रूप में दिखाई।

161To the sweetest, beloved, long-lost and now-found children, the spiritual Father and Dada say good night and give love and remembrance from the depths of their heart.

408यह सीढ़ी दिखाने का रहस्य बताते हुए बाबा ने कहा,बच्चों की बुद्धि में यह घूमता रहे कि अब हमारी क्या स्टेज है। 409जो अन्तिम स्टेज धारण करनी है वह लक्ष्य पहले से ही बुद्धि में रखेंगे तो पुरूषार्थ तेज चलेगा। 410विनाश के समय की जो सीन दिखाई उसमें आप बच्चों की अडोल अवस्था रहे। 411फिर बाबा ने हमें ढेर हीरे हाथ में दिये और कहा इन हीरों का टीका सभी बच्चों को लगाना।

162The spiritual Father says namaste to the spiritual children.

412यह हीरे क्यों दे रहा हूँ? 413क्योंकि हीरे मिसल आत्मा मस्तक में रहती हैं।

163Look how humble, lovely and egoless the Father is.

414तो हरेक आत्मा सच्चा हीरा बन चमकती रहे।

164Achcha. 165Baba is now taking leave.

415अच्छा !

166* * * * *