Avyakt murli for Sunday 22 January 1984
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22-01-84ओम शान्ति अव्यक्त बापदादामधुबन
नामीग्रामी सेवाधारी बनने की विधि
ज्ञान के सागर, शिवबाबा,अपने कुलदीपक बच्चों के प्रति बोले:-
आज बापदादा अपने एक टिक जगते हुए दीपकों की दीपमाला को देख रहे हैं। कैसे हर एक जगा हुआ दीपक अचल, निर्विघ्न,अपनी ज्योति से विश्व को रोशनी दे रहे हैं। यह दीपकों की रोशनी आत्मा को जगाने की रोशनी है। विश्व की सर्व आत्माओं के आगे जो अज्ञान का आवरण है,उसको मिटाने के लिए कैसे जगाकर और जगा रहे हैं, अंधकार के कारण अनेक प्रकार की ठोकरें खाने वाले आप जगे हुए दीपकों की तरफ बड़े प्यार से रोशनी की इच्छा से, आवश्यकता से, आप दीपकों की तरफ देख रहे हैं। ऐसे अंधकार में भटकने वाली आत्माओं को ज्ञान की रोशनी दो। जो घर-घर में दीपक जग जायें। (बिजली चली गई) अभी भी देखो अंधकार अच्छा लगा? रोशनी प्रिय लगती है ना। तो ऐसे बाप से कनेक्शन जुड़ाओ। कनेक्शन जोड़ने का ज्ञान दो।
सभी डबल विदेशी रिफ्रेश हो अर्थात् शक्तिशाली बन, लाइट हाउस, माइट हाउस बन, नॉलेजफुल बन, पावरफुल बन, सक्सेसफुल बनकर के सेवा स्थानों पर जा रहे हो फिर से आने के लिए। जाना अर्थात् सफलता स्वरूप का पार्ट बजाकर एक से अनेक हो करके आना। जाते हो अपने परिवार की अन्य आत्माओं को बाप के घर में ले आने के लिए। जैसे हद की लड़ाई करने वाले योद्धे बाहुबल, साइन्स बल वाले योद्धे सर्व शस्त्रं से सजकर युद्ध के मैदान पर जाते हैं विजय का मैडल लेने के लिए, ऐसे आप सभी रूहानी योद्धे सेवा के मैदान पर जा रहे हो विजय का झण्डा लहराने के लिए। जितना-जितना विजयी बनते हो उतना बाप द्वारा स्नेह,सहयोग,समीपता,सम्पूर्णता के विजयी मैडल्स प्राप्त करते हो। तो यह चेक करो कि अब तक कितने मैडल्स मिले हैं। जो विशेषताए है वा टाइटल्स देते हैं वह कितने मैडल्स धारण किये हैं। विशेष टाइटल्स की लिस्ट निकाली है ना। वह लिस्ट सामने रखकर स्वयं को देखना कि यह सब मैडिल्स हमें प्राप्त हैं? अभी तो यह बहुत थोड़े निकाले हैं। कम से कम108 तो होने चाहिए। और अपने इतने मैडल्स को देख नशे में रहो। कितने मैडल्स से सजे हुए हो। जाना अर्थात् विशेषता का कार्य कर सदा नये ते नये मैडल्स लेते जाना। जैसा कार्य वैसा मैडल मिलता है। तो इस वर्ष हर एक सेवा के निमित्त बने हुए बच्चों को यह लक्ष्य रखना है कि कोई न कोई ऐसा नवीनता का विशेष कार्य करें जो अब तक ड्रामा में छिपा हुआ, नूँधा हुआ है। उस कार्य को प्रत्यक्ष करें। जैसे लौकिक कार्य में कोई विशेषता का कार्य करते हैं तो नामीग्रामी बन जाते हैं। चारों ओर विशेषता के साथ विशेष आत्मा का नाम हो जाता है। ऐसे हरेक समझे कि मुझे विशेष कार्य करना है। विजय का मैडल लेना है। ब्राहमण परिवार के बीच विशेष सेवाधारियों की लिस्ट में नामीग्रामी बनना है। रूहानी नशे में रहना है। नाम के नशे में नहीं। रूहानी सेवा के नशे में निमित्त और निर्माण के सर्टिफिकेट सहित नामीग्रामी होना है।
आज डबल विदेशी ग्रुप का विजयी बन विजय स्थल पर जाने का बधाई समारोह है। कोई भी विजय स्थल पर जाते हैं तो बड़ी धूमधाम से खुशी के बाजे गाजे से विजय का तिलक लगाकर बधाई मनाई जाती है। विदाई नहीं, बधाई। क्योंकि बापदादा और परिवार जानते हैं कि ऐसे सेवाधारियों की विजय निश्चित है। इसलिए बधाई का समारोह मनाते हैं। विजय हुई पड़ी है ना। सिर्फ निमित्त बन रिपीट करना है। क्योंकि करने से निमित्त बन - करेंगे और पायेंगे! जो निमित्त कर्म है और निश्चित प्रत्यक्ष फल है! इस निश्चय के उमंग उत्साह से जा रहे हो औरों को अधिकारी बना कर ले आने के लिए। अधिकार का अखुट खज़ाना महादानी बन दान पुण्य करने के लिए जा रहे हो। अब देखेंगे पाण्डव आगे जाते हैं वा शक्तियाँ आगे जाती हैं। विशेष नया कार्य कौन करते हैं। उसका मैडल मिलेगा। चाहे कोई ऐसी विशेष सेवा के निमित्त आत्माओं को निकालो। चाहे सेवा के स्थान और वृद्धि को प्राप्त कराओ। चाहे चारों ओर नाम फैलने का कोई विशेष कार्य करके दिखाओ। चाहे ऐसा बड़ा ग्रुप तैयार कर बापदादा के सामने लाओ। किसी भी प्रकार की विशेष सेवा करने वाले को विजय का मैडल मिलेगा।84 में ही। क्योंकि दिसम्बर में न्यू ईयर मनाने तो सभी आते हो ना। खुद नहीं भी आयेंगे तो समाचार आ जायेगा। ऐसे विशेष कार्य करने वाले को सब सहयोग भी मिल जाता है। स्वयं ही कोई टिकिट भी आफर कर लेंगे। शुरू- शुरू में जब आप सभी सेवा पर निकले थे तो सेवा कर फर्स्ट क्लास में सफर करते थे। और अभी टिकेट भी लेते और सेकण्ड थर्ड में आते। ऐसी कोई कम्पनी की सेवा करो, सब हो जायेगा। सेवाधारी को साधन भी मिल जाता है। समझा! सभी सन्तुष्ट होकर विजयी बनकर जा रहे हैं ना। किसी भी प्रकार की कमज़ोरी अपने साथ तो नहीं ले जा रहे हो। कमज़ोरियों को स्वाहा कर शक्तिशाली आत्मायें बन जा रहे हो ना! कोई कमज़ोरी रह तो नहीं गई! अगर कुछ रह गया हो जो स्पेशल समय लेकर समाप्ति करके जाना। अच्छा
ऐसे सदा अचल, जगे हुए दीपक, सदा ज्ञान रोशनी द्वारा अंधकार को मिटाने वाले, हर समय सेवा की विशेषता में विशेष पार्ट बजाने वाले,बाप द्वारा सर्व प्राप्त हुए मैडल्स को धारण करने वाले, सदा विजय निश्चित के निश्चय में रहने वाले, ऐसे अविनाशी विजय के तिलकधारी, सदा सर्व प्राप्तियों से सम्पन्न,सन्तुष्ट आत्माओं को बापदादा का यादप्यार और नमस्ते!
जगदीश भाई से - बापदादा के साकार पालना के पले हुए रत्नों की वैल्यु होती है। जैसे लौकिक रीति में भी पेड़ (वृक्ष) में पके हुए फलों का कितना मूल्य होता है। ऐसे साकार पालना में पले हुए अर्थात् पेड़ में पके हुए। आज ऐसी अनुभवी आत्माओं को सभी कितना प्यार से देखते हैं। पहले मिलन में ही वरदान पा लिया ना। पालना अर्थात् वृद्धि ही वरदानों से हुई ना। इसलिए सदा पालना के अनुभव का आवाज़ अनेक आत्माओं की पालना के लिए प्रेरित करते रहेंगे। सागर के भिन्न-भिन्न सम्बन्ध की लहरों में लहराने के अनुभवों की लहरों में लहराते रहेंगे। सेवा के निमित्त आदि में एकानामी के समय निमित्त बने। एकानामी के समय निमित्त बनने के कारण सेवा का फल सदा श्रेष्ठ है। समय प्रमाण सहयोगी बने इसलिए वरदान मिला। अच्छा
कांफ्रेंस के प्रति - सभी मिलकर जब कोई एक उमंग उत्साह से कार्य करते हैं तो उसमें सफलता सहज होती है। सभी के उमंग से कार्य हो रहा है ना तो सफलता अवश्य होगी। सभी को मिलाना यह भी एक श्रेष्ठता की निशानी है। सभी के मिलने से अन्य आत्मायें भी मिलन मनाने के समीप आती है। दिल का संकल्प मिलाना अर्थात् अनेक आत्माओं का मिलन मनाना। इसी लक्ष्य को देखते हुए कर रहे हो और करते रहेंगे। अच्छा - फारेनर्स सब ठीक हैं? सन्तुष्ट हैं? अभी सब बड़े हो गये हैं। सम्भालने वाले है। पहले छोटे-छोटे थे तो नाज़ नखरे करते थे, अभी औरों को सम्भालने वाले बन गये। हमें कोई सम्भाले,यह नहीं। अभी मेहनत लेने वाले नहीं, मेहनत देने वाले। कम्पलेन्ट करने वाले नहीं, कम्पलीट। कोई भी कम्पलेन्ट अभी भी नहीं,फिर पीछे भी नहीं, ऐसा है ना! सदा खुशखबरी के समाचार देना। और जो नहीं भी आये हैं उन्हों को भी मायाजीत बनाना। फिर ज्यादा पत्र नहीं लिखने पड़ेंगे। बस सिर्फ ओ.के.। लिख देना, बस ज्यादा बड़े पत्र नहीं लिखना। सिर्फ ओ.के. अच्छी-अच्छी बातें भले लिखो लेकिन शार्ट में। अच्छा।
टीचर्स से - बापदादा का टीचर्स से विशेष प्यार है क्योंकि समान हैं। बाप भी टीचर और आप मास्टर टीचर। वैसे भी समान प्यारे लगते हैं। बहुत अच्छा उमंग उत्साह से सेवा में आगे बढ़ रही हो। सभी चक्रवर्ती हो। चक्र लगाते अनेक आत्माओं के सम्बन्ध में आए, अनेक आत्माओं को समीप लाने का कार्य कर रही हो। बापदादा खुश हैं। ऐसा लगता है ना कि बापदादा हमारे पर खुश हैं, या समझती हो कि अभी थोड़ा-सा कुछ करना है। खुश हैं और भी खुश करना है। मेहनत अच्छी करती हो,मेहनत मुहब्बत से करती हो इसलिए मेहनत नहीं लगती। बापदादा सर्विसएबुल बच्चों को सदा ही सिर का ताज कहते हैं। सिरताज हो। बापदादा बच्चों के उमंग उत्साह कोदेख और आगे उमंग-उत्साह बढ़ाने का सहयोग देते हैं। एक कदम बच्चों का,पद्म कदम बाप के। जहाँ हिम्मत है वहाँ उल्लास की प्राप्ति स्वतः होती है। हिम्मत है तो बाप की मदद है, इसलिए बेपरवाह बादशाह हो सेवा करते चलो। सफलता मिलती रहेगी। अच्छा