Avyakt murli for Monday 20 January 1986
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0> 120-01-86ओम शान्ति अव्यक्त बापदादामधुबन
0> > 20-01-86 Om Shanti Avyakt Bapdada Madhuban
2पुरूषार्थ और परिवर्तन के गोल्डन चांस का वर्ष 3आदि अनादि बाप अपने आदि बच्चों प्रति बोले 4आज समर्थ बाप अपने समर्थ बच्चों को देख रहे हैं।
1Today the powerful father is seeing the powerful children who have the determined thoughts to create the new world and to make every soul peaceful and happy.
5जिन समर्थ आत्माओं ने सबसे बड़े ते बड़ा समर्थ कार्य, विश्व को नया श्रेष्ठ विश्व बनाने का दृढ़ संकल्प किया है। 6हर आत्मा को शान्त वा सुखी बनाने का, समर्थ कार्य करने का संकल्प किया है और इसी श्रेष्ठ संकल्प को लेकर दृढ़ निश्चय बुद्धि बन कार्य को प्रत्यक्ष रूप में ला रहे हैं। 7सभी समर्थ बच्चों का एक ही यह श्रेष्ठ संकल्प है कि यह श्रेष्ठ कार्य होना ही है। 8इससे भी ज्यादा यह निश्चित है कि यह कार्य हुआ ही पड़ा है।
2The task is already done - the destination is fixed - you are simply the instruments to receive the fruit.
9सिर्फ कर्म और फल के,पुरूषार्थ और प्रालब्ध के निमित्त और निर्माण के कर्म-फिलासफी के अनुसार निमित्त बन कार्य कर रहे हैं। 10भावी अटल है। 11लेकिन सिर्फ आप श्रेष्ठ भावना द्वारा,भावना का फल अविनाशी प्राप्त करने के निमित्त बने हुए हैं। 12दुनिया की अन्जान आत्मायें यही सोचती हैं कि - शान्ति होगी,क्या होगा,कैसे होगा!
3It has happened many times before and it is happening again.
13कोई उम्मीद नहीं दिखाई देती।
4You see the practical proof of self transformation.
14क्या सचमुच होगा!
5You have unshakeable faith.
15और आप कहते हो, होगा तो क्या लेकिन हुआ ही पड़ा है।
6This is the task of God, and such is always successful.
16क्योंकि नई बात नहीं है। 17अनेक बार हुआ है और अब भी हुआ ही पड़ा है।
7People are afraid of destruction, but you are carefree because the new world will be established.
18निश्चयबुद्धि निश्चित भावी को जानते हो। 19इतना अटल निश्चय क्यों है?
8In front of you the golden sun is rising for the golden world, and in front of them are dark clouds.
20क्योंकि स्व-परिवर्तन के प्रत्यक्ष प्रमाण से जानते हो कि प्रत्यक्ष प्रमाण के आगे और कोई प्रमाण की आवश्यकता ही नहीं है। 21साथ-साथ परमात्म वार्य सदा सफल है ही है। 22यह कार्य आत्माओं, महान आत्माओं वा धर्म आत्माओं का नहीं है। 23परमात्म कार्य सफल हुआ ही पड़ा है ऐसे निश्चय बुद्धि, निश्चित भविष्य को जानने वाले निश्चिन्त आत्मायें हो।
9The time is coming closer and so you are wearing the bells of happiness and dancing.
24लोग कहते हैं वा डरते हैं कि विनाश होगा और आप निश्चिन्त हो कि नई स्थापना होगी। 25कितना अन्तर है - असम्भव और सम्भव का।
10The complete stage and the complete Father are both calling you “come powerful children - become equal - and rest in your home”.
26आपके सामने सदा स्वार्णिम दुनिया का स्वार्णिम सूर्य उदय हुआ ही पड़ा है।
11Become angels - angels bestow - bestow blessings.
27और उन्हों के सामने है - विनाश की काली घटायें। 28अभी आप सभी तो समय समीप होने के कारण सदा खुशी के घुँघरू डाल नाचते रहते हो कि आज पुरानी दुनिया है, कल स्वार्णिम दुनिया होगी। 29आज और कल, इतना समीप पहुँच गये हो। 30अभी इस वर्ष सम्पूर्णता और समानताका समीप अनुभव करना है।
12A deity always gives.
31सम्पूर्णता आप सभी फरिश्तों का विजय माला ले आह्वाहन कर रही है। 32विजय माला के अधिकारी तो बनना है ना। 33सम्पूर्ण बाप और सम्पूर्ण स्टेज, दोनों ही आप बच्चों को बुला रहे हैं कि - आओ श्रेष्ठ आत्मायें आओ,समान बच्चे आओ, समर्थ बच्चे आओ, समान बन अपने स्वीट होम में विश्रामी बनो। 34जैसे बापदादा विधाता है, वरदाता है ऐसे आप भी इस वर्ष विशेष ब्राह्मण आत्माओं प्रति वा सर्व आत्माओं प्रति विधाता बनो, वरदाता बनो।
13Become the embodiment of the great mantra - hum so, so hum.
35फरिश्ता क्या करता? 36वरदाता बन वरदान देता है। 37देवता सदा देता है, लेता नहीं है। 38लेवता नहीं कहते।
14From now on, over a long period of time, emerge the sanskars of being an angel, and so a deity.
39तो वरदाता और विधाता, फरिश्ता सो देवता … अभी यह महामन्त्र हमफरिश्ता सो देवता, इस मंत्र को विशेष स्मृति स्वरूप बनाओ। 40मन्मनाभव तो हो ही गये, यह आदि का मंत्र रहा। 41अभी इस समर्थ मंत्र को अनुभव में लाओ। 42यह होना चाहिए,यह मिलना चाहिए यह दोनों ही बातें लेवता बनाती हैं, लेवता-पन के संस्कार देवता बनने में समय डाल देंगे।
15When will destruction will take place?
43इसलिए इन संस्कारों को समाप्त करो।
16Don’t calculate a date for that.
44पहले जन्म में ब्रह्मा के घर से देवता बन नये जीवन, नये युग के वन नम्बर में आओ।
17Don’t calculate towards 2000. Destruction is the very end period.
45संवत भी वन-वन-वन हो। 46प्रकृति भी सतोप्रधान नम्बरवन हो। 47राज्य भी नम्बरवन हो।
18By then, the chance to practice over a long time will be finished.
48आपकी गोल्डन स्टेज भी नम्बर वन हो। 49एक दिन के फर्क में भी वन-वन-वन से बदल जायेगा। 50अभी से फरिश्ता सो देवता बनने में बहुत काल के संस्कार प्रैक्टिकल कर्म में इमर्ज करो। 51क्योंकि बहुत काल जो गया है, वह बहुत काल की सीमा अब समाप्त हो रही है।
19Even now the long time is changing into a short time.
52उसकी डेट नहीं गिनती करो। 53विनाश को अन्तकाल कहा जायेगा।
20Effort over a short time means fruit for a short time.
54उस समय बहुत काल का चांस तो समाप्त है ही, लेकिन थोड़े समय का भी चांस समाप्त हो जायेगा। 55इसलिए बापदादा बहुत काल की समाप्ति का इशारा दे रहे है। 56फिर बहुत काल की गिनती का चांस समाप्त हो थोड़ा समय पुरूषार्थ,थोड़ा समय प्रालब्ध, यही कहा जायेगा। 57कर्मों के खाते में अब बहुत काल खत्म हो थोड़ा समय वा अल्पकाल आरम्भ हो रहा है।
21For some there is still the account for a long period of waste thoughts, inaccurate action, and a backlog of sin.
58इसलिए यह वर्ष परिवर्तन काल का वर्ष है। 59बहुत काल से थोड़े समय से परिवर्तन होना है।
22BapDada knows - he just doesn’t reveal it - he draws a curtain over it.
60इसलिए इस वर्ष के पुरूषार्थ में बहुत काल का हिसाब जितना जमा करने चाहो वह कर लो। 61फिर उल्हना नहीं देना कि हम तो अलबेले होकर चल रहे थे।
23Baba, the ocean of love, has love in all relationships, and though seeing carelessness and ordinary effort, it is as if he has not heard or seen them.
62आज नहीं तो कल बदल ही जायेंगे। 63इसलिए कर्मों की गति को जानने वाले बनो।
24With the extra help of love, he gives extra marks, and enables you to move forward.
64नॉलेजफुल बन तीव्रगति से आगे बढ़ो।
25It has been said that the 18th chapter has begun.
65ऐसा न हो दो हजार का हिसाब ही लगाते रहो। 66पुरूषार्थ का हिसाब अलग है और सृष्टि परिवर्तन का हिसाब अलग है।
26The speciality of the 18th chapter is to become the embodiment of remembrance.
67ऐसा नहीं सोचो - कि अभी 15 वर्ष पड़ा है,अभी 18वर्ष पड़ा है। 6899 में होगा, 88 में होगा… यह नहीं सोचते रहना। 69हिसाब को समझो।
27Not remembrance one minute and forgetting the next, but remembrance over a long period of time, in an automatic easy way.
70अपने पुरूषार्थ और प्रालब्ध के हिसाब को जान उस गति से आगे बढ़ो। 71नहीं तो बहुत काल के पुराने संस्कार अगर रह गये तो इस बहुत काल की गिनती धर्मराजपुरी के खाते में जमा हो जायेगी। 72कोई-कोई का बहुत काल के व्यर्थ, अयथार्थ कर्म-विकर्म का खाता अभी भी है, बापदादा जानते हैं सिर्फ आउट नहीं करते हैं। 73थोड़ा-सा पर्दा डाले हैं।
28Finish battling.
74लेकिन व्यर्थ और अयथार्थ यह खाता अभी भी बहुत है। 75इसलिए यह वर्ष एकस्ट्रा गोल्डन चांस का वर्ष है - जैसे पुरूषोत्तम युग है वैसे यह पुरूषार्थ और परिवर्तनके गोल्डन चांस का वर्ष है। 76इसलिए विशेष हिम्मत और मदद के इस विशेष वरदान के वर्ष को साधारण 50 वर्ष के समान नहीं गँवाना। 77अभी तक बाप स्नेह के सागर बन सर्व सम्बन्ध के स्नेह में, अलबेलापन,साधारण पुरूषार्थ इसको देखते-सुनते भी न सुन न देख बच्चों को स्नेह की एकस्ट्रा मदद से, एकस्ट्रा मार्क्स देकर बढ़ा रहे हैं।
29Finish labour.
78लिफ्ट दे रहे हैं। 79लेकिन अभी समय परिवर्तन हो रहा है। 80इसलिए अभी कर्मों की गति को अच्छी तरह से समझ समय का लाभ लो। 81सुनाया था ना - कि 18 वाँ अध्याय आरम्भ हो गया है।
30Finish confusion.
8218वें अध्याय की विशेषता - अब स्मृति स्वरूप बनो। 83अभी स्मृति, अभी विस्मृति नहीं।
31In the 18th chapter you become free from all attachments, by becoming the embodiment of remembrance.
84स्मृति स्वरूप अर्थात् बहुत काल स्मृति स्वतः और सहज रहे। 85अभी युद्ध के संस्कार, मेहनत के संस्कार,मन को मुँझाने के संस्कार इसकी समाप्ति करो। 86नहीं तो यही बहुत काल के संस्कार बन, अन्त मति सो भविष्य गतिप्राप्त कराने के निमित्त बन जायेंगे। 87सुनाया ना - अभी बहुत काल के पुरूषार्थ का समय समाप्त हो रहा है और बहुत काल की कमज़ोरी का हिसाब शुरू हो रहा है।
32As yet the list of attachments is still very long.
88समझ में आया! 89इसलिए यह विशेष परिवर्तन का समय है। 90अभी वरदाता है फिर हिसाब-किताब करने वाले बन जायेंगे। 91अभी सिर्फ स्नेह का हिसाब है।
33First is the household of the self, then the household of the divine family, then the household of service, then the household of limited attainments.
92तो क्या करना है! 93स्मृति स्वरूप बनो। 94स्मृति स्वरूप स्वतः ही नष्टोमोहा बना ही देगा। 95अभी तो मोह की लिस्ट बड़ी लम्बी हो गई है।
34You now very well the secret of how to isolate yourself from each one of these households.
96एक स्व की प्रवृत्ति,एक दैवी परिवार की प्रवृत्ति,सेवा की प्रवृत्ति,हद के प्राप्तियों की प्रवृत्ति - इन सभी से नष्टोमोहा अर्थात् न्यारा बन प्यारा बनो। 97मैं-पन अर्थात् मोह। 98इससे नष्टोमोहा बनो। 99तब बहुतकाल के पुरूषार्थ से बहुतकाल के प्रालब्ध की प्राप्ति के अधिकारी बनेंगे।
35Become detached and loving.
100बहुतकाल अर्थात् आदि से अन्त तक की प्रालब्ध का फल। 101वैसे तो एक-एक प्रवृत्ति होने का राज़ भी अच्छी तरह से जानते हो और भाषण भी अच्छा कर सकते हो। 102लेकिन निवृत्त होना अर्थात् नष्टोमोहा होना। 103समझा!
36To those who make elevated effort over a long time; who are the original jewels of the age of God, the confluence age; who are the first deities, the original jewels of the children of God; who are equal to the original , eternal Father, love, remembrance, and namaste from Baba the server.
104प्वाइंटस तो आपके पास बापदादा से भी ज्यादा हैं।
105इसलिए प्वाइन्ट क्या सुनायें। 106प्वाइन्टसतो हैं अबप्वाइन्टबनो। 107अच्छा 108सदा श्रेष्ठ कर्मों के प्राप्ति की गति को जानने वाले, सदा बहुतकाल के तीव्र पुरूषार्थ के, श्रेष्ठ पुरूषार्थ के श्रेष्ठ संस्कार वाले,सदा स्वार्णिम युग के आदि रत्न, संगमयुग के भी आदि रत्न, ऐसे आदि देव के समान बच्चों को, आदि बाप, अनादि बाप की सदा आदि बनने की श्रेष्ठ वरदानी यादप्यार और साथ-साथ सेवाधारी बाप की नमस्ते।
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