Daily Murli for Wednesday 18 January 2017
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018/01/17 प्रातःमुरली ओम् शान्ति "बापदादा"' मधुबन
1“मीठे बच्चे - एवरहेल्दी बनना है तो एवर याद में रहो, इस याद की यात्रा में ही सच्ची कमाई है, इससे ही सतोप्रधान बनेंगे''
2प्रश्न:- सबसे बड़ा पुण्य कौन सा है?
3संगम पर पुण्यात्मा किसे कहेंगे?
4उत्तर:- अविनाशी ज्ञान रत्नों का दान करना - यह सबसे बड़ा पुण्य है।
5संगम पर पुण्यात्मा वह है जो ज्ञान रत्नों को धारण करता है।
6अभी तुम उस विनाशी धन से बेगर बनते हो और अविनाशी ज्ञान धन से भरपूर हो 21 जन्मों के लिए साहूकार बन जाते हो।
7गीत:- यह कौन आज आया सवेरे-सवेरे…
8ओम् शान्ति।
9बच्चों ने गीत सुना।
10जब परमात्मा बाप आकर आत्माओं से मिलते हैं तो जीव-आत्मा को अपना जीवपना भूल जाता है।
11उसे निश्चय हो जाता है कि हम आत्मा शिवबाबा की सन्तान हैं।
12हम आत्माओं का बाप इस मुख द्वारा बोल रहे हैं।
13हम आत्मा इन कानों द्वारा सुन रहीं हैं।
14ऐसी अपनी आदत डालने की मेहनत करनी होती है।
15बाप कहते हैं मीठे बच्चे मामेकम् याद करो, अन्त में यही वशीकरण मंत्र काम में आयेगा।
16इस याद की यात्रा से तुम अथाह सच्ची कमाई करते हो, जितना याद करेंगे उतना सतोप्रधान बनते जायेंगे और खुशी भी बढ़ती जायेगी, क्योंकि यह है आत्मा और परमात्मा का शुद्ध लव।
17तुम्हें ईश्वरीय आज्ञा मिली है मीठे बच्चे, अमृतवेले उठ बाप को बहुत प्यार से याद करो।
18बाबा आप कितने मीठे हो, आप हमें राजाओं का राजा, स्वर्ग का मालिक बनाते हो, हम आपकी श्रीमत पर जरूर चलेंगे।
19बाबा आपने तो कमाल किया है, 21 जन्मों के लिए स्वर्ग की बादशाही देते हो।
20हम तो आप पर बलिहार जाऊं।
21तो बलिहार जाना भी है, सिर्फ कहना नहीं है।
22जितना समय याद में रहेंगे तो उसका असर सारा दिन रहेगा।
23बच्चों को देही-अभिमानी बनना है और ईश्वरीय गुण धारण करने हैं।
24ईश्वरीय गुण धारण करना अर्थात् ईश्वर बाप के समान बनना।
25ईश्वरीय अधिकार अर्थात् ऊंच पद को पाना है।
26इस पुरानी दुनिया और पुरानी देह को भूल जाना है, इसमें नष्टोमोहा होना पड़े।
27मीठे बच्चे, तुम अपनी डिग्री खुद ही देख सकते हो, सारे दिन में हम कितना याद करते हैं!
28भोजन पर भी देखो हमने बाप की याद में रह हर्षितमुख हो भोजन खाया?
29माशूक को याद करने से कशिश बढ़ेगी, बहुत खुशी रहेगी और बहुत जमा होता जायेगा।
30याद में रहते-रहते इस पुरानी खाल को छोड़ जाए नई लेंगे।
31कांटे से फूल बन जायेंगे।
32जितना याद का अभ्यास होगा तो फिर अन्त मती सो गति हो जायेगी।
33अन्त में शरीर छूटे तो भी बाबा की याद हो।
34वशीकरण मंत्र याद हो तब प्राण तन से निकलें।
35याद में रहने से जो भी किचड़ा है वह भस्म हो आत्मा पावन बनती जायेगी।
36अभी तुम बच्चों को निश्चय है कि हमको पढ़ाने वाला कौन है!
37इस चैतन्य डिब्बी में चैतन्य हीरा बैठा है, वही सत-चित-आनंद स्वरूप है।
38सत बाप तुम्हें सच्ची-सच्ची श्रीमत देते हैं।
39बाप के बने हो तो कदम-कदम श्रीमत पर चलना है।
40याद से ही विकर्म विनाश होंगे।
41एवरहेल्दी बनना है तो एवर याद में रहना है, तब ही अन्त मती सो गति होगी।
42इसमें धक्के खाने की बात नहीं है।
43चुप रहना है और पढ़ना है, एक बाप को याद करना है।
44याद से ही तुम सारे विश्व को शान्ति का दान दे सकते हो।
45हर एक बच्चे को अपनी प्रजा भी बनानी है, वारिस भी बनाने हैं।
46मुरली कोई भी मिस नहीं करनी चाहिए।
47बाप बहुत प्यार से समझाते हैं मीठे बच्चे अपने पर रहम करो, कोई अवज्ञा न करो।
48देही-अभिमानी बनो।
49बाप की नज़र सदैव उन बच्चों पर रहती है जो खुशबूदार फूल बने हैं।
50जो आत्म-अभिमानी बन बाप को याद करते और जहाँ सर्विस देखते वहाँ भागते रहते हैं।
51ऐसे सर्विसएबुल, आज्ञाकारी बच्चे ही बाप को प्यारे लगते हैं।
52बाप की दिल अन्दर बच्चों को सदा सुखी बनाने के लिए कितनी फर्स्टक्लास आश रहती है कि बच्चे लायक बन स्वर्ग के मालिक बनें।
53तुम बच्चे जानते हो इस पुरानी दुनिया नर्क में कोई सुख नहीं है।
54इसमें कोई से दिल लगाना गोया अपना ही नुकसान करना है।
55कोई भी चीज़ में आसक्ति नहीं रहनी चाहिए।
56समझना चाहिए यह पुरानी दुनिया, पुराना शरीर तो खत्म होने वाला है। 57देही-अभिमानी बच्चे ही इस पुरानी दुनिया और पुरानी देह से उपराम रहते हैं। 58उन्हों की बुद्धि में रहता हम यहाँ दो घड़ी के मेहमान हैं, यह तो पुरानी जुत्ती है। 59भल कितना भी इनको साबुन पाउडर आदि लगाओ फिर भी पुराना शरीर है, इसको छोड़ हमें नया लेना है।
0 18/01/17 Morning Murli Om Shanti BapDada Madhuban
60यहाँ तुम बच्चे अविनाशी ज्ञान रत्नों से झोली भर रहे हो फिर औरों को भी ज्ञान रत्नों का दान देना है।
61यह सबसे बड़ा पुण्य है।
62ज्ञान रत्न धारण कर पुण्य आत्मा बनना है फिर औरों को दान करना है।
63उस विनाशी धन से तो तुम अभी बेगर बनते हो और अविनाशी ज्ञान धन से तुम 21 जन्मों के लिए साहूकार बनते हो।
64इस समय तुम बहुत बड़ा मट्टा-सट्टा (अदली-बदली) करते हो।
65पुराना तन-मन-धन सब बाबा को देते हो।
66बाबा फिर ज्ञान रत्नों से तुमको मालामाल कर देते हैं, जिससे भविष्य में तन-मन-धन सब नया मिल जाता है।
67अभी तुम फकीर हो और भविष्य में फिर तुम अमीर बनते हो।
68फकीर से अमीर बनने के लिए बातें ही दो हैं - मनमनाभव, मध्याजी भव बस।
69बाप को याद करते-करते तुम स्वर्ग के अमीर बन जायेंगे।
70तुम बेहद बाप की गोदी में आये हो - फकीर से अमीर बनने के लिए।
71तुम ब्रह्माकुमार-कुमारियों के पास सेन्टर्स पर मनुष्य आते हैं जीयदान लेने।
72किसको जीयदान देना बहुत बड़ा पुण्य है।
73यहाँ आकर खुशनशीब बनते हैं, तो उन्हों के लिए सदैव दरवाजा खुला रहना चाहिए।
74ऐसा प्रबन्ध करना चाहिए जहाँ बहुत मनुष्य आकर अपना सौभाग्य बनावें।
75जीवन हीरे जैसी बनावें।
76बड़े प्यार से एक-एक को सम्भालना पड़ता है, कहाँ विचारों के पाँव न खिसक जाएं।
77जितने जास्ती सेन्टर्स होंगे उतने जास्ती आकर जीयदान पायेंगे।
78जो सर्विसएबुल बच्चे हैं, वह बहुतों को जीयदान देते हैं।
79उन्हों को बाप भी याद करते हैं।
80देखता हूँ यह किस प्रकार का फूल है!
81इनमें क्या-क्या गुण हैं!
82बाप सब बच्चों की अवस्था को जानते हैं, नम्बरवार तो है ना।
83किसम-किसम के वैरायटी फूल हैं।
84जो खुशबूदार फूल हैं वह खींचते हैं।
85जो जैसा है ऐसी सर्चलाइट लेने की कोशिश करते हैं।
86खुशबूदार, गुणवान बच्चों को देख प्यार में खुशी में नयन गीले हो जाते है।
87उन्हें कुछ तकलीफ होती है तो बाप सर्चलाइट देते हैं।
88तुम बच्चों का बाप के साथ बहुत लव होना चाहिए।
89बाबा जो कहे बच्चे वह फौरन करके दिखा दें तब समझेंगे इनका बाप के साथ लव है।
90आज्ञाकारी, वफादार, फरमानबरदार हैं।
91बाप कितना प्यार से समझाते हैं।
92बाप बेहद का व्यापारी है, सौदा बड़ा फर्स्टक्लास है परन्तु इसमें साहस भी चाहिए।
93कई बच्चे चावल मुट्ठी ले आते हैं परन्तु ऐसा कभी नहीं समझना चाहिए कि हम बाबा को देते हैं।
94यह तो रिटर्न में सौगुणा लेते हैं।
95बाबा को थैंक्स देनी चाहिए, कहना चाहिए बाबा आप हमारे दो मुट्ठी चावल लेते हो आपका शुक्रिया जो आप हमें भविष्य में मालामाल कर देते हो, परन्तु इसमें बड़ी विशाल बुद्धि चाहिए।
96अच्छा-
97मीठे-मीठे सिकीलधे सर्विसएबुल, आज्ञाकारी बच्चों प्रति मात-पिता बापदादा का यादप्यार और गुडमार्निंग।
98रूहानी बाप की रूहानी बच्चों को नमस्ते।
99अव्यक्त महावाक्य (पर्सनल)
100अभी बाप सभी बच्चों को सम्पन्न रूप में देखना चाहते हैं, लेकिन सम्पन्न बनने में वन्डरफुल बातें देखेंगे क्योंकि सम्पन्न बनने के प्रैक्टिकल पेपर होते हैं।
101किसी भी प्रकार का नया दृश्य वा आश्चर्यजनक दृश्य सामने आये, लेकिन दृश्य साक्षी दृष्टा बनावे, हिलाये नहीं।
102कोई भी ऐसा दृश्य जब सामने आता है तो पहले साक्षी दृष्टा की स्थिति की सीट पर बैठ देखने वा निर्णय करने से बहुत मजा आयेगा, भय नहीं आयेगा।
103जब हुआ ही पड़ा है, विजय निश्चित है, तो घबराना वा भयभीत होना हो ही नहीं सकता।
104जैसेकि अनेक बार देखी हुई सीन फिर से देख रहे हैं - इस कारण क्या हुआ?
105क्यों हुआ?
106ऐसे भी होता है, यह तो नई बातें हैं!
107यह संकल्प वा बोल नहीं होगा।
108और ही राज़युक्त, योगयुक्त हो, लाईट हाउस हो, वायुमण्डल को डबल लाईट बनायेंगे।
109घबरायेंगे नहीं।
110ऐसे अनुभव होता है ना?
111इसको कहा जाता है पहाड़ समान पेपर राई के समान अनुभव हो।
112कमज़ोर को पहाड़ लगेगा और मास्टर सर्वशक्तिवान को राई अनुभव होगा।
113इसी पर ही नम्बर बनते हैं।
114प्रैक्टिकल पेपर पास करने के ही नम्बर बनते हैं।
115सदैव पेपर पर नम्बर मिलते हैं।
116अगर पेपर नहीं, तो नम्बर भी नहीं इसलिए श्रेष्ठ पुरुषार्थी पेपर को खेल समझते हैं।
117खेल में कब घबराया नहीं जाता है।
118खेल तो मनोरंजन होता है।
119अच्छा।
120आप सबको विनाश की डेट का पता है?
121कब विनाश होना है?
122जल्दी विनाश चाहते हो वा हाँ और ना की चाहना से परे हो?
123विनाश के बजाय स्थापना के कार्य को सम्पन्न बनाने में सभी ब्राह्मण एक ही दृढ़ संकल्प में स्थित हो जाएं तो परिवर्तन हुआ ही पड़ा है।
124कोई भी सम्पन्न बनने की विशेष बात लक्ष्य में रखते हुए डेट फिक्स करो-होना ही है, तब सम्पन्न हो जायेंगे।
125अभी संगठित रूप में एक ही दृढ़ संकल्प परिवर्तन का नहीं करते हो।
126कोई करता है कोई नहीं करता है इसलिए वायुमण्डल पावरफुल नहीं बनता है।
127मैनारिटी होने कारण जो करता है उसका वायुमण्डल में प्रसिद्ध रूप से दिखाई नहीं देता है इसलिए अब ऐसे प्रोग्राम बनाओ, जो ऐसे विशेष ग्रुप का कर्तव्य विशेष हो-दृढ़ संकल्प से करके दिखाना।
128जैसे शुरू में पुरुषार्थ के उत्साह को बढ़ाने के लिए ग्रुप्स बनाते थे और पुरुषार्थ की रेस करते थे, एक दूसरे को सहयोग देते हुए उत्साह बढ़ाते थे, वैसे अब ऐसा तीव्र पुरुषार्थियों का ग्रुप बने, जो यह पान का बीड़ा उठाये कि जो कहेंगे वही करेंगे, करके दिखायेंगे।
129जैसे शुरू में बाप से पवित्रता की प्रतिज्ञा की कि मरेंगे, मिटेंगे, सहन करेंगे, मार खायेंगे, घर छोड़ देंगे, लेकिन पवित्रता की प्रतिज्ञा सदा कायम रखेंगे-ऐसी शेरनियों के संगठन ने स्थापना के कार्य में निमित्त बन करके दिखाया, कुछ सोचा नहीं, कुछ देखा नहीं- करके दिखाया, वैसे ही अब ऐसा ग्रुप चाहिए।
130जो लक्ष्य रखा उस लक्ष्य को पूर्ण करने के लिए सहन करेंगे, त्याग करेंगे, बुरा-भला सुनेंगे, परीक्षाओं को पास करेंगे लेकिन लक्ष्य को प्राप्त करके ही छोड़ेंगे।
131ऐसे ग्रुप सैम्पल बनें तब उनको और भी फॉलो करें।
132जो आदि में सो अन्त में।
133ऐसे मैदान में आने वाले, जो निन्दा- स्तुति, मान-अपमान सभी को पार करने वाले हों - ऐसा ग्रुप चाहिए।
134कोई भी बात में सुनना वा सहन करना, किसी भी प्रकार से, यह तो करना ही होगा, कितना भी अच्छा करेंगे, लेकिन अच्छे को ज्यादा सुनना, सहन करना पड़ता है - ऐसी सहन शक्ति वाला ग्रुप हो।
135जैसे शुरू में पवित्रता के व्रत वाला ग्रुप मैदान में आया तो स्थापना हुई, वैसे अब यह ग्रुप मैदान में आए तब समाप्ति हो।
136ऐसा ग्रुप नज़र आता है?
137जैसे वह पार्लियामेन्ट बनाते हैं ना - यह फिर सम्पन्न बनने की पार्लियामेन्ट हो, नई दुनिया, नया जीवन बनाने का विधान बनाने वाली विधान सभा हो।
138अब देखेंगे कौन-सा ग्रुप बनाते हो।
139विदेशी भी ऐसा ही ग्रुप बनाना।
140सच्चे ब्राह्मण बनकर दिखाना।
141जहाँ भी जाओ वहाँ पहुंचते ही सब समझें कि यह तो अवतार अवतरित हुए हैं।
142जब एक अवतार दुनिया में शान्ति ला सकता है तो इतने सभी अवतार जब उतरेंगे तो कितनी बड़ी शान्ति हो जायेगी।
143विश्व में शान्ति लाने वाले अवतार हो, ऐसे समझते हुए कार्य करना।
144अच्छा।
145वरदान:- अपनी आकर्षणमय स्थिति द्वारा सर्व को आकर्षित करने वाले रूहानी सेवाधारी भव
146रूहानी सेवाधारी कभी यह नहीं सोच सकते कि सेवा में वृद्धि नहीं होती या सुनने वाले नहीं मिलते।
147सुनने वाले बहुत हैं सिर्फ आप अपनी स्थिति रूहानी आकर्षणमय बनाओ।
148जब चुम्बक अपनी तरफ खींच सकता है तो क्या आपकी रूहानी शक्ति आत्माओं को नहीं खींच सकती!
149तो रूहानी आकर्षण करने वाले चुम्बक बनो जिससे आत्मायें स्वतः आकर्षित होकर आपके सामने आ जायें, यही आप रूहानी सेवाधारी बच्चों की सेवा है।
150स्लोगन:- समाधान स्वरूप बनना है तो सबको स्नेह और सम्मान देते चलो।
151तपस्वी मूर्त बनो
152विशेष ज्ञान स्वरूप स्थिति में स्थित हो याद की यात्रा को पॉवरफुल बनाओ।
153अपनी शुभ वृत्ति व कल्याण की वृत्ति और शक्तिशाली वातावरण द्वारा अनेक तड़पती हुई, भटकती हुई, पुकार करने वाली आत्माओं को आनन्द, शान्ति और शक्ति की अनुभूति कराओ।