Mamma's Murli - gyan-sitar-30
Saving in progress..
You can now read this murli without Internet.
You can read this murli without Internet.
in order to be able to read it without internet.
७.१२.५९
बाप के गोल्डन वर्शन्स ही आत्मा को सच्चा सोना बनाते हैं
गीत:- यह कौन आज आया सवेरे-सवेरे… ।
सवेरा एक तो है हद का, दूसरा है बेहद के चक्र की रात-दिन का सवेरा । अब सवेरा आरम्भ हो रहा है। आगे फिर दिन होता जाएगा। जब रात के अन्त और दिन के आदि का संगम होता है, तब ही परमात्मा का आना होता है। भक्ति वाले भी जो मस्त होते हैं, एक बजे उठते हैं। वह सतोप्रधान समय है। समय का प्रभाव रहता है। तो बाबा ने समय भी संगम का पकड़ा है। अन्त से फिर आदि करना उसका काम है। तो अब सवेरे के टाईम बाबा आए हैं, जिनकी आँखों में जादू, बातों में सोना है। बाबा के गोल्डन वर्शन्स हैं ना। जो डायरेक्ट महावाक्य उच्चारण करते हैं-- मामेकम् । और कोई भी नहीं कहेंगे-- मुझे याद करो। मनुष्य कहेंगे -- उनको याद करो। बाबा तो डायरेक्ट सिखाते हैं - मुझे याद करो । तो उनकी बातों में सोना है जो हम भी गोल्डन अथवा पत्थर से पारस बन जाते हैं। जैसे अर्जुन को परमात्मा का साक्षात्कार हुआ तो कहा - हज़ारों सूर्यों से तेज है। वह तो एवर-गोल्ड है। इसलिए बाबा का नाम है पारसनाथ ।
सोमनाथ ज्ञान सोमरस पिलाते हैं। बाकी मीठा पानी पिलाने की बात नहीं। उनसे आत्मा मीठी वा स्वच्छ नहीं बनेगी। गंगा नहाने की बात भी यह ज्ञान की है। कहते हैं - मैं ज्ञान सागर हूँ, मेरे से यह ज्ञान गंगाएँ निकली हैं। उन्होंने फिर नदियों पर नाम रखे हैं। कहते हैं ना -- ज्ञानामृत पिलाना। तो उन्होंने फिर यह स्थूल अमृत पिलाना, गंगा नहाना.. अनेक बातें निकाली हैं। समझते हैं - इससे पाप नाश होंगे। अब गंगा नहाना तो बहुत सहज है। फिर शास्त्र, संस्कृत आदि पढ़ने की क्या दरकार है ? गंगा नहाने से पाप नाश हो जाएं फिर तो मुक्त हो गये । लेकिन अब हम जानते हैं कि यह भी भक्ति मार्ग है। इसका भी बड़ा वृक्ष है। वृद्धि होती रहती है। अभी फिर जड़जड़ीभूत अवस्था है। पहले भक्ति सतोप्रधान थी। अब तमोप्रधान है तो चींटी, मकोड़े, मिट्टी आदि सबको पूजते रहते हैं। हम किसी बात को खण्डन नहीं करते । यह सब ड्रामा में है और अब इसका भी अन्त होना है। फिर अब नया चक्र चलेगा।
अब बाबा ने सवेरा शुरु किया है। ज्ञान-अमृत अथवा ज्ञान-अंजन सब यह है। जादू का सुर्मा भी मशहूर है, वह भी यह है। बड़ा जादूगर तो बाबा है जो मनुष्य को देवता बनाते हैं। कितना ट्रान्सफर कर देते हैं ! तो बड़ा जादूगर हुआ ना । तमोप्रधान आत्मा को सतोप्रधान बना देते हैं। सौदागर भी कैसा है ? कहते हैं – सब दे दो। जैसे सत्य नारायण की कथा है। कहा मेरे पास कुछ नहीं है तो कुछ नहीं हो गया। यह वही पार्ट चल रहा है। सौदा भी देखो कैसा करते हैं ! हम अपना तन-मन-धन देते हैं तो उसका १०० गुणा जास्ती बाप से मिलता है। तो बाप से सौदा करने में कितने फायदे हैं ! यह खुदा दोस्त है। त्वमेव माताश्च पिता.. सब संबंध उनके साथ हैं। विद्या देने वाला टीचर भी बनते हैं। कहते हैं - मैं वह विद्या पढ़ाता हूँ जिससे राजाओं का राजा बनते हो । कहा है - सबसे उत्तम मेरा यही रुद्र-यज्ञ है। रुद्र कहो, पारसनाथ कहो, सोमनाथ कहो – एक बाबा के ही सब नाम हैं। बाबा का काम है तमोप्रधान का विनाश कर सतोप्रधान की स्थापना करना। सर्वशक्तिवान का यही मतलब है ना। बाकी व्यापक है, तब सर्वशक्तिवान है - ऐसे तो नहीं कहेंगे।
इस समय तमोप्रधान हैं, ५ भूत प्रवेश हैं। बाबा आकर इन ५ भूतों का विनाश कर सतोप्रधान बनाते हैं । यह बाबा की शक्ति है। बाकी मुर्दे को जिन्दा बनाना या जिन्दे को मारना -- यह बाबा की शक्ति नहीं है। हाँ, हम माया से मरे पड़े थे और बाबा ने आकर सुरजीत किया है ज्ञान-संजीवनी-बूटी से । तो यह है बाबा का जादू। आंखों में, बातों में सोना है जिससे आत्मा को सोना बनाते हैं। स्टार्स भी कोई चमक वाला, कोई कम चमक वाला होता है। तो अपने को चमकदार बनाना है। फिर शरीर भी ऐसा सुन्दर मिलेगा। इसलिए देवतायें बड़े सुन्दर होते हैं। नेचुरल ब्युटी रहती है, तन्दरुस्ती भी रहती है। तो शरीर ब्युटीफुल रहते हैं-- चेहरे पर मुस्कराहट, सरल, शान्त यह संस्कार हैं आत्मा में तो चेहरा भी ऐसा रहता है। जितना सोल में पॉवर है उतना नज़दीक संबंध में आते हैं। यह है हमारे पुरुषार्थ की सिद्धि । ज्ञान-योग बल से जितना प्योर होंगे उतना संबंध में समीप आयेंगे। बाकी अभी यहाँ ही संबंध नहीं जोड़ने हैं। योग तो एक के साथ लगाना है।
पुरुषार्थ का सिर्फ यही टाईम है। कहते हैं- इस समय यह अन्तिम जीवन मेरे हवाले करने से बड़ा फायदा है। जिसको सरेन्डर कहते हैं, हैण्ड्स-अप । फिर जैसे चलावे । अब कुछ रहा नहीं है। उनके हवाले करने से हल्के हो जायेंगे। इसलिए कहते हैं - सारा बोझा मुझे दे दो तो रेसपान्सिबल मैं हूँ। कहते हैं – सब भूलो, जो कुछ पढ़ा है उनको भूलो। अर्जुन को भी कहा है ना - यह जो पुराने संस्कार भरे हैं, उन सबको भूल जो मैं सुनाता हूँ वह सुनो। अब वह सब प्रैक्टिकल चल रहा है। जो पढ़े-लिखे हैं तो बुद्धि भटकती है, मूँझ पड़ते हैं। इसलिए वही फरमान हो रहा है। कोई माने, न माने ।
विनाश तो सामने खड़ा है। ऐसी चीजें बनी हैं जो पूरा विनाश करेंगी। इसके आगे और क्या बनाएंगे। इसको ही तो महाभारत महाभारी लड़ाई कहेंगे ना। आगे तो छोटी लड़ाइयाँ लगती थीं। अब तो पूरा विनाश सामने है। महाभारी महाभारत लड़ाई सामने है। तो गीता का भगवान भी ज़रुर होगा। सब यादव भी सामने खड़े हैं मरने-मारने के लिए, कौरव भी खड़े हैं और पाण्डव भी खड़े हैं। तब बाबा कहते हैं – यह लास्ट वार है। फिर तो न लड़ाइयाँ होंगी, न यह कोर्ट आदि चोरी-चकारी होंगे। आधा कल्प के लिए लड़ाई का नाम-निशान नहीं होगा। यह अकासुर, बकासुर, सूर्पनखा, पूतना सब इस समय हैं। यह सब कर्त्तव्यों पर नाम हैं। बाकी कोई सिर पर सींग नहीं होते । यह सब क्रोध के चिह्न दिखाते हैं। जैसे सोल के संस्कार हैं। यहाँ ही कई औरतें पुरुषों को तंग करती हैं, मार भी देती हैं। बड़े मजे के खेल चलते हैं। जो वन्डर्स बाबा की स्थापना में चलते हैं, आगे कभी नहीं चले हैं।
गोपियों को बंधन होना दिखाते हैं। जब कृष्ण परमात्मा था तो उनके पास जाने से क्यों रोकते थे ? अगर खराब आदमी था तो उनको पूजते क्यों हैं ? जिस कृष्ण के दीदार के लिए मीरा ने राणा को तज दिया, वह (कृष्ण) जब स्वयं था तब औरतों को जाने से रोकते क्यों थे ? जरुर कुछ गड़बड़ है। साधारण तन में आते हैं, तब तुच्छ समझ गाली देते हैं। तो इसलिए बाँध होती है। इसलिए वकील लोगों को अपनी वकालत को भी प्योरीफाइ करना है। ऐसे कानून को पकड़ो, जो इन्हों का कुछ प्रबंध हो। इस सर्विस से वकालत भी प्योर हो जायेगी। समझावें तो एक समझेगा, लेकिन एक तो कुछ कर नहीं सकता। एक का राज्य तो है ही नहीं। परमात्मा सर्वव्यापी है तो सब परमात्मा हो गए, सब अथॉरिटी हो गए। ऐसे समय बाबा आकर डिफीकल्ट काम करते हैं, जो कोई मनुष्य कर नहीं सकता । मनुष्य को तो घर का ही कुछ झंझट होता है तो हैरान हो जाते हैं। यह कितना भारी झंझट है ! यह तो उस समर्थ का काम है जो सारी रेस्पॉन्सिबिलिटी उठाते हैं। वह अथॉर्टी सब काम कर रही है, यह भूलना मत । 'कार्य' ही सिद्ध करता है यह मनुष्य की ताकत नहीं। यह बाबा भी कहते – चलते-चलते हमको पकड़ लिया। ब्रह्मा भी नाम बाबा ने रखा है। वह तन भी तो मरजीवा बना जो ब्रह्मा नाम पड़ गया। तो दादा का काम नहीं, डाडे (ग्रैन्ड फादर) का काम है जो कर रहे हैं, जो हमको भी हिम्मत दे रहे हैं। सहनशील बनने से शक्ति आती है। सहन करने का भी बाबा बल दे रहा है। इसमें डरना नहीं है। भल इस लोक में नाम बदनाम हो, लेकिन उस लोक में नाम बाला होगा। बाकी यह तो लड़ेंगे, कहेंगे – काम, क्रोध बिगर कैसे काम चलेगा ? यह सब सुनाकर फिर बाबा कहते हैं – मन्मनाभव ।