Mamma's Murli - gyan-sitar-49
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२६.७.६३
यह असार संसार है, आसक्ति छोड़ नई सार वाली दुनिया को याद करो
ओम् शान्ति । जैसे हद के दिन और रात रोज़ होते हैं, ऐसे इस सृष्टि-चक्र में बेहद का भी दिन और रात है जिसको गीता में शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष कहा हुआ है। रात पूरी हो दिन होने का भी अभी समय है। रात पूरी होगी तो दिन आयेगा। ऐसे नहीं कि रात और दिन इक्ट्ठे होंगे। हद की रात और दिन भी इक्ट्ठे नहीं होते हैं। सृष्टि-चक्र में भी ऐसे है। ऐसे नहीं कि सुख-दुःख इक्ट्ठा है। अन्धियारे को दुःख, रोशनी को सुख कहेंगे। दुःख का समय अलग, सुख का समय अलग हो गया।
कई समझते हैं - "सुख-दुःख चले आये हैं भल आगे दुःख कम था, अभी जास्ती है।” परन्तु यह नहीं समझते कि दुःख था ही नहीं। वह सुख की दुनिया थी, यह दुःख की दुनिया है। कम जास्ती पर कान्ट्रास्ट नहीं है, कान्ट्रास्ट है - हाँ और ना पर । दुःख था ही नहीं। याद उस चीज को किया जाता है जो है ही नहीं। अगर सुख होता तो फिर उनकी चाहना क्यों होती ? भल धनवान है, मर्तबे वाले हैं, वह भी सुख को याद करते हैं। तो जरुर वह चीज अभी नहीं है जिसको सब चाहते हैं। प्रेजेन्ट वह होती तो चाहना क्यों रखते ? अब अपना पुरुषार्थ उस चीज के लिए है जो चीज इस दुनिया में है नहीं। इस दुनिया से किनारा कर लिया है क्योंकि यह है ही पुरानी तमोप्रधान नर्क की दुनिया। वह सुख की दुनिया ही और है।
अब है रात । दिन और रात की तो रौनक ही अपनी-अपनी है। तो हम उसके पीछे लगे हुए हैं - ऐसी दुनिया के सुख को प्राप्त करें । इसलिए पुरानी दुनिया से किनारा किया है। यह तो है ही असार संसार । सार वाला संसार ही दूसरा है। इस दुनिया में जो कुछ है उसकी आसक्ति छोड़नी है। मान, मर्तबा, धन आदि कोई भी चीज में इच्छा नहीं रखनी है। पहले तो यह कान्ट्रास्ट बुद्धि में रहना चाहिए । मनुष्य समझते हैं- यह दुःख-सुख सब परम्परा से चला आया है। परन्तु परम्परा से जो चला आया है वह पुरानी दुनिया की चाल चली आई है। नई दुनिया की तो चाल ही निराली है। बाप कहते हैं - "इस दुनिया में जो कुछ करते आये हो, उनका फल भी यहाँ ही पाया है। इस दुनिया की पवित्रता तमोगुणी है। मैं तुमको सतोप्रधान पवित्रता सिखलाता हूँ ।” तो तुम रजो, तमोगुणी पवित्रता से भेंट क्यों करते हो। पुरानी दुनिया की अब एन्ड है। अब नई दुनिया के लिए पुरुषार्थ करेंगे तो उसका फल नई दुनिया में मिल जायेगा । विनाश तो होना ही है। परन्तु तुम पहले से ही करेंगे तो वह करने का फायदा तुमको मिलेगा । अच्छा ।